सुबहका वक्त. कांचके ग्लासेस लगाई इमारतोंके जंगलमें एक इमारत और उस इमारतके चौथे मालेपर एक एक करके एक आयटी कंपनीके कर्मचारी आने लगे थे. दस बजनेको आए थे और कर्मचारीयोंकी भीड अचानक बढने लगी. सब कर्मचारी ऑफीसमें जानेके लिए भीड और जल्दी करने लगे. कारण एकही था की देरी ना हो जाए. सब कर्मचारीयोंके आनेका वक्त दरवाजेपरही स्मार्ट कार्ड रिडरपर दर्ज कीया जाता था. सिर्फ जानेका वक्तही नही तो उनकी पुरी अंदर बाहर जानेकी गतिविधीयां उस कार्ड रिडरपर दर्ज किई जाती था. कंपनीका जो कांचसे बना मुख्य दरवाजा था उसे मॅग्नेटीक लॉक लगाया था और दरवाजा कर्मचारीयोंने अपना कार्ड दिखानेके सिवा खुलता नही था. उस कार्ड रिडरकी वजहसे कंपनीकी सुरक्षा और नियमितता बरकरार रखी जाती थी. दसका बझर बज गया और तबतक कंपनीके सारे कर्मचारी अंदर पहूंच गए थे. कंपनीकी डायरेक्टर और सिईओ अंजलीभी.

अंजलीने बी.ई कॉम्प्यूटर किया था और उसकी उम्र जादासे जादा 23 होगी. उसके पिता, कंपनीके पुर्व डायरेक्टर और सिईओ, अचानक गुजर जानेसे, उम्रके लिहाजसे कंपनीकी बहुत बडी जिम्मेदारी उसपर आन पडी थी. नही तो यह तो उसके हंसने खेलनेके और मस्ती करनेके दिन थे. उसकी आगेकी पढाई यु.एस. में करनेकी इच्छा थी. लेकिन उसकी वह इच्छा पिताजी गुजर जानेसे केवल इच्छाही रह गई थी. वहभी कंपनीकी जिम्मेदारी अच्छी तरहसे निभाती थी और साथमें अपने मस्तीके, हंसने खेलनेके दिन मुरझा ना जाए इसका खयाल रखती थी.

हॉलमें दोनो तरफ क्यूनिकल्स थे और उसके बिचमेंसे जो संकरा रास्ता था उससे गुजरते हूए अंजली अपने कॅबिनकी तरफ जा रही थी. वैसे वह ऑफीसमें पहननेके लिए कॅजुअल्स पहनावाही जादा पसंद करती थी – ढीला सफेद टी शर्ट और कॉटनका ढीला बादामी पॅंन्ट. कोई बडा प्रोग्रॅम होनेपर या कोई स्पेशल क्लायंट के साथ मिटींग होनेपर ही वह फॉर्मल ड्रेस पहनना पसंद करती थी. ऑफीसके बाकी स्टाफ और डेव्हलपर्सकोभी फॉर्मल ड्रेसकी कोई जबरदस्ती नही थी. वे जिन कपडोमें कंफर्टेबल महसूस करे ऐसा पहनावा पहननेकी उन सबको छूट थी. ऑफीसके कामके बारेमें अंजलीका एक सूत्र था. की सब लोग ऑफीस का कामभी ऍन्जॉय करनेमें सक्षम होना चाहिए. अगर लोग कामभी ऍन्जॉय कर पाएंगे तो उन्हे कामकी थकान कभी महसूसही नही होगी. उसने ऑफीसमेंभी काम और विश्राम या हॉबी इसका अच्छा खासा तालमेंल बिठाकर कर उसके कंपनीमें काम कर रहे कर्मचारीयोंकी प्रॉडक्टीव्हीटी बढाई थी. उसने ऑफीसमें स्विमींग पुल, झेन चेंबर, मेडीटेशन रुम, जीम, टी टी रुम ऐसी अलग अलग सुविधाए कर्मचारीययोंको मुहय्या कराकर उनका ऑफीसके बारेमें अपनापन बढानेकी कोशीश की थी. और उसे उसके अच्छे परिणामभी दिखने लगे थे.

उसके कॅबिनकी तरफ जाते जाते उसे उसके कंपनीके कुछ कर्मचारी क्रॉस हो गए. उन्होने उसे अदबके साथ विश किया. उसनेभी एक मीठे स्माईलके साथ उनको विश कर प्रतिउत्तर दिया. वे सिर्फ डरके कारण उसे विश नही करते थे तो उनके मनमें उसके बारेमें उसके काबीलीयतके बारेमें एक आदर दिख रहा था. वह अपने कॅबिनके पास पहूंच गई. उसके कॅबिनकी एक खासियत थी की उसकी कॅबिन बाकि कर्मचायोंसे भारी सामानसे ना भरी होकर, जो सुविधाएँ उसके कर्मचारीयोंको थी वही उसके कॅबिनमेंभी थी. ‘मै भी तुममेंसे एक हूँ.’ यह भावना सबके मनमें दृढ हो, यह उसका उद्देश्य होगा.

वह अपने कॅबिनके पास पहूँचतेही उसने स्प्रिंग लगाया हूवा अपने कॅबिनका कांचका दरवाजा अंदरकी ओर धकेला और वह अंदर चली गई.

अंजलीने ऑफीसमें आयेबराबर रोजके जो महत्वपुर्ण काम थे वह निपटाए. जैसे महत्वपुर्ण खत, ऑफीशियल मेल्स, प्रोग्रेस रिपोर्ट्स इत्यादी. कुछ महत्वपुर्ण मेल्स थी उन्हे जवाब भेज दिया, कुछ मेल्सके प्रिंट लिए. सब महत्वपुर्ण काम निपटनेके बाद उसने अपने कॉम्प्यूटरका चॅटींग सेशन ओपन किया. कामकी थकान महसूस होनेसे या कुछ खाली वक्त मिलनेपर वह चॅटींग करती थी. यह उसका हर दिन कार्यक्रम रहता था. यूभी इतनी बडी कंपनीकी जिम्मेदारी संभालना कोई मामूली बात नही थी. कामका तणाव, टेन्शन्स इनसे छूटकारा पानेके लिए उसने चॅटींगके रुपमें बहुत अच्छा विकल्प चुना था. तभी फोनकी घंटी बजी. उसने चॅटींग विंडोमें आये मेसेजेस पढते हूए फोन उठाया. हुबहु कॉम्प्यूटरके पॅरेलल प्रोसेसिंग जैसे सारे काम वह एकही वक्त कर सकती थी.

” यस मोना”

” मॅडम .. नेट सेक्यूराज मॅनेजींग डायरेक्टर … मि. भाटीया इज ऑन द लाईन…” उधरसे मोनाका आवाज आया.

” कनेक्ट प्लीज”

‘ हाय’ तबतक चॅटींगपर किसीका मेसेज आया.

अंजलीने किसका मेसेज है यह चेक किया. ‘टॉम बॉय’ मेसेज भेजनेवालेने धारण किया हुवा नाम था.

‘ क्या चिपकू आदमी है ‘ अंजलीने सोचा.

यही ‘टॉम बॉय’ हमेशा चॅटींगपर उसे मिलता था. और लगभग हरबार अंजलीने चॅटींग सेशन ओपन किए बराबर उसका मेसेज आया नही ऐसा बहुत कम होता था.

‘ इसे कुछ काम धंदे है की नाही … जब देखो तब चॅटींगपर पडा रहता है ‘

अंजलीने आजभी उसे इग्नोर करनेकी ठान ली. दो तिन ऑफलाईन मेसेजेस थे.

अंजली कान और कंधेके बिच फोनका क्रेडल पकडकर की बोर्डपर सफाईसे अपनी नाजुक उंगलीया चलाते हूए वे ऑफलाईन मेसेजेस चेक करने लगी.

” गुड मॉर्निंम मि. भाटीया… हाऊ आर यू” अंजलीने फोन कनेक्ट होतेही मि. भाटीयाका स्वागत किया और वह उधरसे भाटीयाकी बातचीत सुननेके लिए बिचमें रुक गई.

” देखीए भाटीयाजी… वुई आर द बेस्ट ऍट अवर क्वालीटी ऍन्ड डिलीवरी शेड्यूलस… यू डोन्ट वरी… वुई विल डिलीवर युवर प्रॉडक्ट ऑन टाईम… हमारी डिलीवरी वक्तके अंदर नही हूई ऐसा कभी हुवा है क्या?… नही ना?… देन डोंट वरी… अप एकदम निश्चिंत रहीएगा … यस… ओके… बाय.. ” अंजलीने फोन रख दिया और फिरसे दो डीजीट डायल कर फोन उठाया, ” जरा शरवरीको अंदर भेज दो ”

फोनपर चल रहे बातचीतसे अंजलीका कॉम्प्यूटरपर खयाल नही रहा था. क्योंकी उस वक्त काम महत्वपुर्ण था और बाकी बाते बाद में.

तभी कॉम्पूटरपर ‘बिप’ बजा. चॅटींग विंडोमें अंजलीको किसीका मेसेज आया था. अंजलीने चिढकर मॉनिटरकी तरफ देखा.

‘ फिरसे उसी टॉम बॉयकाही मेसेज होगा ‘ उसने सोचा.

लेकिन वह मेसेज टॉम बॉयका नही था. इसलिए वह पढने लगी.

मेसेज था – ‘ क्या तुम मेरी दोस्त बनना पसंद करोगी ?’

मॉनिटरपर अबभी ‘ क्या तुम मेरा दोस्त बनना पसंद करोगी ?’ यह चॅटींगपर आया मेसेज दिख रहा था. अब इसे क्या जवाब भेजा जाए ताकी वह अपना पिछा छोडेगा ऐसा सोचते हूए अंजलीने मेसेज भेजनेवालेका नाम देखा. लेकिन वह ‘टॉम बॉय’ नही था यह देखकर उसे सुकून महसुस हूवा.

‘ क्यो नही ? जरुर… दोस्ती करनेसे निभाना जादा मायने रखता है ‘ अंजलीने मेसेज टाईप किया.

तभी शरवरी – अंजलीकी सेक्रेटरी अंदर आ गई.

” यस मॅडम”

” शरवरी मैने तुम्हे कितनी बार कहा है … की डोन्ट कॉल मी मॅडम… कॉल मी सिम्प्ली अंजली… तुम जब मुझे मॅडम कहती हो मुझे एकदम 23 सालसे 50 सालका हुए जैसा लगता है ” अंजली चिढकर बोली.

वह उसपर गुस्सा तो हो गई लेकिन फिर उसे बुरा लगने लगा.

अंजली अचानक एकदम गंभीर होकर बोली, ” सच कहूं तो पापा के अचानक जानेके बाद यह जिम्मेदारी मुझपर आन पडी है … नहीतो अभी तो मेरे हसने खेलनेके दिन थे… सच कहूं तो … मैने तुम्हे यहां जानबुझकर बुला लिया है .. ताकी इस कामकाजी मौहोलमें मै अपनी हंसी खुशी ना खो दूं … कम से कम तूम तो मुझे अंजली कह सकती हो … तूम मेरी दोस्त पहले हो और सेक्रेटरी बादमें … समझी? ” अंजलीने कहा.

” यस मॅडम … आय मीन अंजली” शरवरीने कहा.

अंजली शरवरीकी तरफ देखकर मंद मंद मुस्कुराने लगी. शरवरी उसके सामने कुर्सीपर बैठ गई तभी फिरसे कॉम्पूटरका अलर्ट बझर बज गया. चाटींगके विंडोमें फिरसे मेसेज आ गया था –

‘तुम्हारा नाम क्या है ?’

‘ मेरा नाम अंजली … तुम्हारा ?’ अंजलीने मेसेज टाइप किया.

अंजलीने सेन्ड बटनपर माऊस क्लिक किया और बोलनेके लिए शरवरी बैठी थी उधर अपनी चेअर घुमाई.

” वह नेट सेक्यूराका प्रोजेक्ट कैसा चल रहा है ?…” अंजलीने पुछा.

” वैसे सबतो ठिक है … लेकिन एक मॉड्यूल सिस्टीमको बारबार क्रॅश कर रहा है … बग क्या है कुछ समझमें नही आ रहा है … ” शरवरीने जानकारी दी.

तभी चॅटींगपर फिरसे मेसेज आया –

‘ मेरा नाम विवेक है … बाय द वे… आपकी पसंदीदा चिजें क्या है … आय मीन हॉबीज?’

अंजलीने कॉम्पूटरकी तरफ देखा. और उस मेसेजकी तरफ ध्यान ना देते हूए चिंतायुक्त चेहरेसे शरवरीकी तरफ देखने लगी.

” उस मॉड्यूलपर कौन काम कर रहा है ?” अंजलीने पुछा.

” दिनेश माहेश्वरी” शरवरीने जानकारी दी.

” वही ना जो पिछले महिने जॉईन हुवा था ?” अंजलीने पुछा.

” हां वही ”

” उसके साथ कोई सिनीयर असोशिएट करो और सी दॅट द मॅटर इज रिझॉल्वड ” अंजलीने एक पलमें उस समस्याकी जड ढूंढते हुए उसपर उपायभी सुझाया था.

” यस मॅडम… आय मीन अंजली” शरवरी बडे गर्वके साथ अंजलीके तरफ देखते हूए बोली.

उसे अपने बॉस और दोस्त अंजलीके मॅनेजमेंट स्किलसे हमेशा अभिमानीत महसूस करती थी.

अंजलीने फिरसे अपना रुख अपने कॉम्प्यूटरकी तरफ किया.

शरवरी वहांसे उठकर बाहर गई और अंजली कॉम्प्यूटरपर आए चॅटींग मेसेजको जवाब टाईप करने लगी.

‘ हॉबीज … हां .. पढना, तैरना … कभी कभी लिखना और ऑफ कोर्स चॅटींग’

अंजलीने मेसेज टाईप कर ‘सेन्ड’ की दबाकर वह भेजा और चॅटींग विंडो मिनीमाईझ कर उसने मायक्रोसॉफ्ट एक्सेलकी दुसरी एक विंडो ओपन की. वह उस एक्सेल शिटमें लिखे हूए आंकडे पढते हूए गुमसी गई. शायद वह उसके कंपनीके किसी प्रोजेक्टके फायनांसिएल डिटेल्स थे.

तभी फिरसे एक चॅटींग मेसेज आ गया.

‘ अरे वा .. क्या संयोग है … मेरी हॉबीजभी तुम्हारी हॉबीजसे मेल खाती है … एकदम हुबहु … एक कम ना एक जादा …’ उधरसे विवेकका था.

‘ रिअली?’ उसने उपरोधसे भरे लहजेसे जवाब दिया.

फ्लर्टींगके इस पुराने नुस्केसे अंजली अच्छी तरहसे वाकिफ थी.

तभी पियून अंदर आया. उसने कुछ कागजाद दस्तखत करनेके लिए अंजलीके सामने रखे. अंजलीने उन सब कागजाद पर एक दौडती हुई नजर घुमाई और उनपर दस्तखत करने लगी.

‘ आय स्वीअर’ मॉनिटरपर विवेकने उधरसे भेजा हुवा मेसेज आ गया.

शायद उसे उसके शब्दोमें छुपा उपरोध समझमें आया था.

‘ मुझे तुम्हारा मेलींग ऍड्रेस मीलेगा ? ‘ उधरसे विवेकका फिरसे मेसेज आ गया.

‘ anjali5000@gmail.com’ अंजलीने खास चॅटींगपर मिलनेवाले अजनबी लोगोंको देनेके लिए बनाया मेल ऍड्रेस उसे भेज दिया.

अंजलीने अब अपनी चेअर घुमाकर अपनी डायरी ढुंढी और अपने घडीकी तरफ देखते हूए वह कुर्सीसे उठ खडी हो गई.

अपनी डायरी लेकर वह जानेके लिए घुम गई तभी फिरसे कॉम्प्यूटरपर चॅटींगका बझर बज गया. उसने जाते जाते मुडकर मॉनिटरकी तरफ देखा.

मॉनिटरपर विवेकका मेसेज था, ‘ ओके थॅंक यू… बाय … सी यू सम टाईम…’

इंटरनेट कॅफेमें विवेक एक कॉम्प्यूटरके सामने बैठकर कुछ कर रहा था. एक उसकेही उम्रके लडकेने, शायद उसका दोस्तही हो, जॉनीने पिछेसे आकर उसके दोनो कंधोपर अपने हाथ रख दिए और उसके कंधे हल्केसे दबाकर कहा, ” हाय विवेक… क्या कर रहे हो ?”

अपने धूनसे बाहर आते हूए विवेकने पिछे मुडकर देखा और फिरसे अपने काममें व्यस्त होते हूए बोला, ” कुछ नही यार… एक लडकीको मेल भेजनेकी कोशीश कर रहा हूं ”

” लडकीको? …ओ हो… तो मामला इश्क का है” जॉनी उसे चिढाते हूए बोला.

” अरे नही यार… बस सिर्फ दोस्त है …” विवेकने कहा.

” प्यारे … मानो या ना मानो…

जब कभी लडकीसे बात करना हो और लब्ज ना सुझे…

और जब कभी लडकीको खत लिखना हो और शब्द ना सुझे…

तो समझो मामला इश्क का है …”

जॉनी उसे और चिढाते हूए बोला.

विवेक कुछ ना बोलते हूए सिर्फ मुस्कुरा दिया.

” देखो देखो गाल कैसे लाल लाल हो रहे है …” जॉनीने कहा.

विवेक फिरसे कुछ ना बोलते हूए सिर्फ मुस्कुरा दिया.

” जब कोई ना करे इन्कार …

या ना करे इकरार …

तो समझो वह प्यार है ”

जॉनी उसे छोडनेके लिए तैयार नही था.

लेकिन अब विवेक चिढ गया, ” तू यहांसे जाने वाले हो या मुझसे पिटने वाले हो? …”

” तुम जैसा समझ रहे हो ऐसा कुछ नही है … मै सिर्फ अपने पिएचडीके टॉपीक्स सर्च कर रहा हूं और बिच बिचमें बोरीयतसे बचनेके लिए मेल्स भेज रहा हूं बस्स…” विवेकने अपना चिढना काबूमें रखनेकी कोशीश करते हूए कहा.

” बस्स?” जॉनी.

” तुम अब जानेवाले हो? … या तुम्हारी इतने सारे लोगोंके सामने अपमानीत होनेकी इच्छा है ?” विवेक फिरसे चिढकर बोला.

” ओके .. ओके… काम डाऊन… अच्छा तुम्हारे पिएचडीका टॉपीक क्या है ?” जॉनीने पुछा.

” इट्स सिक्रीट टॉपीक डीयर… आय कान्ट डिस्क्लोज टू ऐनीवन…” विवेकने कहा.

” नॉट टू मी आल्सो ?…” जॉनीने पुछा.

” यस नॉट टू यू आल्सो” विवेकने जोर देकर कहा.

” तुम्हारा अच्छा है … सिक्रसीके पिछे … इश्कका चक्करभी चल रहा है …” जॉनीने कहा.

” तूम वह कुछभी समझो …” विवेकने कहा.

” नही अब मै समझनेकेभी आगे पहूंच चूका हूँ …” जॉनीने कहा.

” मतलब ?”

” मतलब … मुझे कुछ समझनेकी जरुरत नही बची है ”

” मतलब ?”

” मतलब अब मुझे पक्का यकिन हो गया है ” जॉनीने कहा.

विवेक फिरसे चिढकर पिछे मुडा. तबतक जॉनी मुस्कुराते हूए उसकी तरफ देखते हूए वहांसे दरवाजेकी तरफ निकल चूका था.

सुबहके लगभग दस बजे होंगे. अंजली जल्दी जल्दी अपने कॅबिनमें घुस गई. जब वह कॅबिनमें आगई थी तब शरवरीकी कॅबिनकी चिजे ठिक लगाना चल रहा था. अंजलीके अनुपस्थितीमें उसके कॅबिनकी पुरी जिम्मेदारी शरवरीकीही रहती थी.

अंजलीके कॅबिनमें प्रवेश करतेही शरवरीने अदबसे खडे रहते हूए उसे विश किया, ” गुडमॉर्निंग…”

‘मॅडम’ उसकें मुंहमें आते आते रह गया. अंजली उसे कितनीभी दोस्तकी तरह लगती हो या उससे दोस्तकी तरह व्यवहार करती हो फिरभी शरवरीको कमसे कम उसके कॅबिनमें उससे दोस्तकी तरह बरताव करना बडा कठिण जाता था, और वह भी कभी कभी बाकी लोगोंके सामने.

अंजलीने अंदर आकर उसके पाससे गुजरते हूए उसके पिठपर थपथपाते हूए कहा, ” हाय”

उसके पिछे पिछे उसका ड्रायव्हर उसकी सुटकेस लेकर अंदर आ गया. जैसेही अंजली अपने कुर्सीपर बैठ गई, ड्रायव्हरने सुटकेस उसके बगलमे रख दी और वर कॅबिनसे निकल गया.

शरवरी अंजलीके आमने सामने कुर्सीपर बैठ गई और उसने उसकी अपॉईंटमेंट्सकी डायरी खोलकर उसके सामने खिसकाई. अंजलीने अपने कॉम्पूटरका स्विच ऑन किया और वह डायरीमें लिखी अपॉईंटमेट्स पढने लगी.

” सुबह आए बराबर मिटींग…” अंजली बुरासा मुंह बनाकर बोली, ” अच्छा इस दोपहरके सेमीनारको मै नही जा पाऊंगी .. क्यों न शर्माजीं को भेज दे?…”

” ठिक है ” शरवरी उस अपॉईंटके सामने स्टार मार्क करते हूए बोली.

” क्या करें इन लोगोंको मुंहपर कुछ बोलभी नही सकते … और समयके अभावमें सेमीनार को जा भी नही सकते…. सचमुछ किसी कंपनीके हेडका काम कोई मामुली नही होता.”

अंजली अपनी सूटकेस खोलकर उनमेंसे कुछ पेपर्स बाहर निकालने लगी. पेपर निकालते हूए एक पेपरकी तरफ देखकर, वह पेपर बगलमें निकालकर रखते हूए बोली, ” अब यह देखो … इस कंपनीके टेंडरका काम अब तक पुरा नही हुवा … यह पेपर जरा उस कुलकर्णीकी तरफ भेज देना …”

” कुलकर्णी आज छुट्टीपर है ” शरवरीने कहा.

” लेकिन मेरे जानकारीके अनुसार उनकी छुट्टी तो कलतक ही थी. …” अंजली चिढकर बोली.

” हां …लेकिन अभी थोडी देर पहले उनका फोन आया था. … वे कामपर नही आ सकते यह बोलनेके लिए ” शरवरीने कहा.

” क्यों नही आ सकते ?” शरवरीने गुस्सेसे पुछा.

” मैने पुछा तो उन्होने कुछ ना कहते हूएही फोन रख दिया.

” यह कुलकर्णी मतलब एक बेहद गैरजिम्मेदाराना आदमी …” अंजली चिढकर बोली.

और फिर जो अंजलीकी बडबड शुरु होगई वह रुकनेका नाम नही लेही थी. शरवरीको खुब पता था की जब अंजली ऐसी बडबड करने लगे तो क्या करना चाहिए. कुछ नही, चूपचाप बैठकर सिर्फ उसकी बडबड सुन लेना. बिचमें एकभी लब्ज नही बोलना. अंजलीने ही उसे एक बार बताया था की जब अपना बॉस ऐसा बडबड करने लगे, तो उसकी वह बडबड मतलब एक तरह का स्ट्रेस बाहर निकालने का तरीका होता है. जब उसकी ऐसी बडबड चल रही होती है तब जो सेक्रेटरी उसे और कुछ बोलकर या और कुछ पुछकर उसकी और स्ट्रेस बढाती है उसे मोस्ट अनसक्सेसफुल सेक्रेटरी कहना चाहिए. और जो सेक्रेटरी चूपचाप अपने बॉसकी बकबक सुनती है और अपने बॉसको फिर से नॉर्मल होनेकी राह देखती है उसे मोस्ट सक्सेसफुल सेक्रेटरी कहना चाहिए.

अंजलीकी बकबक अब बंद होकर वह काफी शांत हो गई थी. वह हाथमें कुछ पेपर्स और फाईल्स लेकर मिटींगको जानेके लिए अपने कुर्सीसे उठ खडी हो गई. शरवरीभी उठ खडी होगई.

बगलमें चल रहे कॉम्प्यूटरके मॉनिटरकी तरफ देखते हूए वह शरवरीसे बोली, ” तूम जरा मेरी मेल्स चेक कर लेना … मै मिटींगको हो आती हूं …” और अंजली अपने कॅबिनसे बाहर जाने लगी.

” पर्सनल मेल्सभी ?” शरवरीने उसे छेडते हूए मुस्कुराकर मजाकमें कहा.

” यू नो… देअर इज नथींग पर्सनल… और जोभी है … तुम्हे सब पता है ही …” अंजलीभी उसकी तरफ देखकर, मुस्कुराते हूए बोली और पलटकर जल्दी जल्दी मिटींगको जानेके लिए निकल पडी.

सुबह सुबह रास्तेपर बॅग हाथमें लेकर विवेककी कही जानेकी गडबड चल रही थी.

पिछेसे दौडते हूए आकर उसके दोस्त जॉनीने उसे जोरसे आवाज दिया, ” ए सुन गुरु… इतनी सुबह सुबह कहां जा रहा है”

विवेकने मुडकर देखा और उसे अनदेखा करते हूए फिरसे पहले जैसे जल्दी जल्दी सामने चलने लगा.

” किसी लडकी के साथ भाग तो नही जा रहे हो ?…” जॉनीने वह रुक नही रहा है और उसकी गडबड देखते हूए पुछा.

जॉनी अबभी उसके पिछेसे दौडते हूए उसके पास पहूंचनेकी कोशीश कर रहा था.

” क्या सरदर्द है … जरा दो दिन बाहर जा रहा हूं … उसका भी इतना ढींढोरा… ” विवेक बडबड करते हूए सामने चल रहा था.

” दो दिन बाहर जा रहा हूं … उतनाही तूमसे छूटकारा मिलेगा” विवेकने चलते हूए जोरसे जॉनीको ताना मारते हूए कहा.

” थोडी देर रुको तो सही … तुमसे एक अर्जंट बात पुछनी थी. …” जॉनीने कहा.

विवेक रुक गया और जॉनी दौडते हूए आकर उसके पास पहूंच गया.

” बोलो … क्या पुछना है ? … जल्दी पुछो … नही तो उधर मेरी बस छूट जाएगी ” विवेक बुरासा मुंह बनाकर बोला.

” क्या हूवा फिर कल ?” जॉनीने पुछा.

” किस बातका ?” विवेकने प्रतिप्रश्न किया.

” वही उस मेलका? … कल मेल भेजी की नही ? ” जॉनीने उसे छेडते हूए उसके गलेमें हाथ डालकर पुछा.

” अजीब बेवकुफ हो तूम … किस वक्त किस बातका महत्व है इसका कोई तुम्हे सरोकार नही होता… उधर मेरी बस लेट हो रही है और तुम्हे उस मेलकी पडी है …” विवेक झल्लाते हूए उसका हाथ अपने कंधेसे झटकते हूए बोला.

विवेक अब फिरसे तेजीसे आगे बढने लगा.

” क्या बात करते हो यार तूम ?… बससे कभीभी मेल महत्वपुर्ण होगी … अब मुझे बता.. हावडा मेल, राजधानी मेल…. ये सारी मेल बडी की वह तुम्हारी टपरी बस?” जॉनी अबभी उसके पिछे पिछे जाते हूए उसे छेडते हूए बोला.

विवेक समझ चूका था की अब जॉनीसे बात करनेमें कोई मतलब नही था. वह अपने बडे बडे कदम बढाते हूए आगे चलने लगा. और जॉनीभी बकबक करते हूए और उसे छेडते हूए उसके साथ साथ चलने लगा.

शरवरी अंजलीके कॅबिनमें कॉम्प्यूटरपर बैठी हूई थी. अंजली उसकी सुबहकी मिटींग निपटाकर उसके कॅबिनमें वापस आ गई. उसने घडी की तरफ देखा. लगभग दोपहरके बारा बज गए थे. कुर्सी पिछे खिंचकर वह अपने कुर्सीपर बैठ गई और कुर्सीपर पिछेकी ओर झुलते हूए अपनी थकावट दूर करनेका प्रयास करने लगी. शरवरीने एक बार अंजलीकी तरफ देखा और वह फिरसे अपने कॉप्म्यूटरके काममें व्यस्त हो गई.

”किसीकी कोई खास मेल ?” अंजलीने शरवरीकी तरफ ना देखते हूए ही पुछा.

” नही .. कोई खास नही… लेकिन एक उस ‘टॉमबॉय’ की मेल थी. ” शरवरीने कहा.

” टॉमबॉय … कुछ लोग बहुतही चिपकू होते है … नही?” अंजलीने कहा.

” सही है …” शरवरीको अंजलीका इशारा समझ गया था.

क्योंकी अंजलीने पहले एकबार उसे उस टॉमबॉयके बारेमें बताया था.

” और हां … एक और किसी विवेककी मेल थी ” शरवरीने आगे कहा.

” विवेक?… हां वही होगा जो कल चॅटींगपर मिला था…. मै बोलती हूं ना उसने क्या लिखा होगा…. तुम्हारी उम्र क्या है ?… तुम्हारा ऍड्रेस क्या है ?… मेरी उम्र फलां फलां है … मेरा ऍड्रेस फलां फलां … और मै फलां फलां काम करता हू… और धीरे धीरे वह अपने असली जातपर आएगा… इन आदमीयोंकी जातही ऐसी होती है … लंपट ..बदमाश आणि चिपकू…”

” तूम बोल रही हो वैसा उसने कुछभी लिखा नही है …” शरवरी बिचमेंही उसे टोकते हूए बोली.

” नही?… तो फिर किसी कंपनीके प्रॉडक्टकी सिफारीश की होगी उसने… मतलब वह प्राडक्ट खरीद हम लेंगे और वह उसका फौकटमें कमिशन खाएगा” अंजलीने कहा.

” नही वैसाभी उसने कुछ लिखा नही है .” शरवरीने कहा.

” फिर ?… फिर उसने क्या लिखा है ?” अंजलीने उत्सुकतावश गर्दन घुमाकर शरवरीके तरफ देखते हूए पुछा.

” उसने मेलमें कुछभी लिखा नही है .. उसने ब्लॅंक मेल भेजी है और निचे सिर्फ उसका नाम ‘विवेक’ ऐसा लिखा हुवा है ” शरवरीने कहा.

अंजली एकदम उठकर सिधी बैठ गई.

” देखूं तो ..” अंजली शरवरीकी तरफ मुडकर कॉम्प्यूटरकी तरफ देखते हूए बोली.

शरवरीने अंजलीके मेलबॉक्ससे विवेककी मेल क्लीक कर खोली. सचमुछ वह मेल ब्लॅंक थी.

” अंजली तूम कुछभी कहो … लडकेमें ‘स्टाईल’ है … ऍटलिस्ट इतना पक्का है की वह बाकी लडकोसे जरा हटके है …” शरवरी अंजलीके दिलको टटोलनेकी कोशीश करते हूए बोली.

” तूम जरा चूप बैठोगी … और क्या लडका … लडका लगा रखा है … तुम्हे वह कौन ? कहाका? .. उसकी उम्र क्या है ?… कुछ पता भी है ?… वह कोई रंगीन मिजाजवाला, कोई खुसट बुढाभी हो सकता है … तुम्हे पता हैही आजकल लोग इंटरनेटपर कैसे पर्सनलायझेशन करते है …”

” … हां तुम सही कहती हो … लेकिन चिंता मत करो … ये लो मै अभी उसकी सायबर तहकिकात करती हूं” शरवरी फटाफट कॉम्प्यूटरके किबोर्डकी कुछ बटन्स दबाती हुई बोली.

थोडीही देरमें कॉम्प्यूटरके मॉनीटरपर मानो एक रिपोर्ट आ गया.

” यहां तो उसका नाम सिर्फ विवेक ऐसा लिखा हुवा है … सरनेम लिखा नही है … मुंबईका रहनेवाला है और पिएच डी कर रहा है … उम्र है …” शरवरीने मानो किसी बातका क्लायमॅक्स खोलना हो ऐसा एक पॉज लिया.

अंजलीकीभी अब जिज्ञासा जागृत हुई थी और वह शरवरी उसकी उम्र क्या बताती है इसकी राह देखने लगी.

” पिएचडी? … मतलब जरुर कोई बुढ्ढा खुसट होना चाहिए … मैने कहा था ना?”

” और उसकी उम्र है 25 साल …” शरवरीने मानो क्लायमॅक्स खोला था.

” तो नूर ए जन्नत मिस अंजली अब क्या किया जाए? शरवरी उसे छेडते हूए बोली.

अंजलीभी प्रयत्नपुर्वक आपना चेहरा भावनाविरहीत रखते हूए बोली, ” तो फिर? … हमें उसका क्या करना है ?”

” देने वाले अपना पैगाम देकर चले गए

करने वाले तो अपना इशारा कर चले गए

उधर बडा बुरा हाल है दिलके गलियारोंका

अब उन्हे इंतजार है बस आपके इशारोंका ”

” वा वा क्या बात है …” शरवरी अपनेही शेरकी तारीफ करते हूए बोली, ” अब क्या करना है इस मेलका? ”

” करना क्या है … डिलीट कर दो ” अंजलीने कंधे उचकाते हूए बेफिक्र अंदाजमें कहा … मतलब कमसे कम वैसे जताते हूए कहा.

” डिलीट… नही इतना बडा सितम मत करो उसपर… एक काम करते है … कोरे खत का जवाब कोरे खतसेही देते है …”

शरवरीने फटाफट कॉम्प्यूटरके किबोर्डके कुछ बटन्स दबाए और उस ब्लॅंक मेलको ब्लॅंक रिप्लाय भेज दिया.

अंजलीने आज सुबह आए बराबर कुर्सीपर बैठकर कॉम्प्यूटर शुरु किया. कॉम्प्यूटर बुट होनेके बाद उसने चॅटींग विंडो ओपन किया और किसीका कोई ऑफलाईन मेसेज है क्या देखने लगी. किसीका भी ऑफलाईन मेसेज नही था. उसके चेहरेपर मायूसी छा गई लेकिन वह छिपाते हूए वह सामने टेबलपर रखे रिपोर्टस उलट पुलटकर देखने लगी. उसके टेबलके सामने शरवरी बैठी थी. वह बडी गौरसे अंजलीकी एक एक हरकत देख रही थी और मुस्कुरा रही थी. रिपोर्ट देखते हूए अंजलीके यह बात ध्यानमें आगई तो झटसे उसने शरवरीकी तरफ एक कटाक्ष डाला.

” क्या हूवा … क्यो मुस्कुरा रही हो ?” अंजलीने उसे पुछा.

शरवरीभी बडी चतूराईसे अपने चेहरेके भाव छिपाकर गंभीर मुद्रा धारण करती हूई बोली,

” कहां… मै कहा मुस्कुरा रही हूं ?… ”

तभी अंजलीके कॉम्प्यूटरका बझर बजा. अंजलीने झटसे मुडकर अपने कॉम्प्यूटरके मॉनीटरकी तरफ देखा और फिरसे रिपोर्ट पढनेमें व्यस्त हो गई.

” दो दिनसे मै देख रही हूं की जबभी चाटींगका बझर बजता है तुम सारे कामधाम छोडकर मॉनीटरकी तरफ देखती हो … क्या किसीके मेसेजकी या मेलकी राह देख रही हो ? ” शरवरीने पुछा.

” नहीतो ?” अंजलीने कहा और फिरसे अपने टेबलपर रखे रिपोर्ट पढनेमें व्यस्त होगई, या कमसे कम वैसे जतानेकी कोशीश करने लगी. कॉम्प्यूटरका बझर फिरसे बजा. अंजलीने फिरसे छटसे मॉनीटरकी तरफ देखा और इस बार वह अपनी पहिएवाली कुर्सी झटकेसे घुमाकर कॉम्प्यूटरकी तरफ अपना रुख कर बैठ गई.

” यह जरुर विवेकका मेसेज है ” शरवरी फिरसे उसे छेडते हूए बोली.

” किस विवेकका ?” अंजलीभी कुछ समझी नही ऐसा जताते हूए बोली.

” किस विवेकका? … वही जो उस दिन चॅटींगपर मिला था ” शरवरीभी उसे छोडनेके मुडमें नही थी.

” यह तुम इतने यकिनके साथ कैसे कह सकती हो ?” अंजलीने कॉम्प्यूटरपर काम करते हूए पुछा.

” मॅडम आपके चेहरेकी लाली सब कुछ बता रही है ” शरवरी मुस्कुराते हूए बोली.

पहले तो अंजलीके चेहरेपर चोरी पकडने जैसे झेंपभरे भाव आ गए. लेकिन झटसे अपने आपको संभालते हूए वह शरवरीपर गुस्सा होते हूए बोली.

” तूम जरा मेरा पिछा छोडोगी… कबसे मै देख रही हो मेरे पिछेही पडी हो… उधर बाहर देखो ऑफिसके कितने काम पेंडीग पडे हूए है…. वह जरा देखके आओ.. जाओ ..” अंजलीने कहा.

अंजलीका इशारा समझकर शरवरी वहांसे उठ गई और मुस्कुराते हूए वहांसे चली गई.

शरवरी जानेके बाद अंजलीने झटसे कॉम्प्यूटर पर अभी अभी आया हूवा विवेकका मेसेज खोला.

अंजलीने कॉम्प्यूटरपर आया हुवा विवेकका चॅटींग मेसेज खोला तो सही, लेकिन खोलते वक्त उसका दिल जोर जोरसे धडक रहा था. उसे अपने इस बेचैन स्थितीपर खुदही आश्चर्य हो रहा था. उसने झटसे उसने भेजा हुवा मेसेज पढा –

” हाय गुड मॉर्निंग … हाऊ आर यू?” उसके मेसेज विंडोमें लिखा था.

वह कही उसमें फसती तो नही जा रही है – इस बातकी उसने तस्सल्ली करते हूए बडी सावधानीसे जवाब टाईप किया –

” फाईन…”

और अपने मनकी अधिरता वह भांप ना पाए इसलिए मनही मन सौ तक गिना और फिर काफी समय हो गया है इसकी तसल्ली करते हूए ‘सेंड’ बटनपर क्लीक किया.

” कल मै बाहर गया था ” उधरसे तूरंत विवेकका मेसेज आ गया.

‘ तूम कल चॅटींगपर क्यो नही मिले ?’ इस अंजलीके दिमागमें घुम रहे सवालका जवाब देकर उसने मानो उसके दिलका हाल जान लिया था ऐसा उसे लगा.

वह अपने मनको पढ तो नह सकता है? …

अंजलीके मन मे आया.

” अच्छा अच्छा ” उसने भी खबरदारी के तौरपर अपनी रुखी रुखी प्रतिक्रिया व्यक्त की.

” और कुछ पुछोगी नही ?” उसने पुछा.

वह उसका मेसेज आनेके बाद जवाब देनेमें जानबुझकर देरी लगा रही थी, लेकिन उसके मेसेजेस तुरंत, मानो मेसेज मिलनेके पहलेही टाईप किए हो ऐसे जल्दी जल्दी आ रहे थे.

” तूमही पुछो ” उसने रिप्लाय भेजा.

उसे लडकी देखनेके लिए लडका आनेके बाद, एक अलग कमरेमें जाकर जैसे बाते करते है, ऐसा लग रहा था.

” अरे हां उस दिन मैने तुम्हे ब्लॅंक मेल इसलिए भेजी थी की मुझे तुम्हारी कुछभी जानकारी नही… फिर क्या लिखता ?… लेकिन मेल भेजे बिनाभी रहा नही जा रहा था … इसलिए भेज दी ब्लॅंक मेल..”

फिर उसनेही पहल करते हूए पुछा, ” अच्छा तुम क्या करती हो? … मेरा मतलब पढाई या जॉब?”

” मैने बी. ई. कॉम्प्यूटर किया हूवा है … और जी. एच. इन्फॉरमॅटीक्स इस खुदके कंपनीकी मै फिलहाल मॅनेजींग डायरेक्टर हूं ” उसने मेसेज भेजा.

उसे पता था की चॅटींगमें पहलेही खुदकी सच जानकारी देना खतरनाक हो सकता है. फिरभी वह खुदको रोक नही सकी, मानो जानकारी टाइप कर रही उंगलीयोंपर उसका कोई कन्ट्रोल नही रहा था.

“” अरे बापरे!.. ” उधरसे विवेककी प्रतिक्रिया आ गई.

” तुम्हे तुम्हारे उम्रके बारेमें पुछा तो गुस्सा तो नही आएगा ?… नही … मतलब मैने कही पढा है की लडकियोंको उनके उम्रके बारेमें पुछना अच्छा नही लगता है. … ” उसने उसे बडी खबरदारीके साथ सवाल पुछा.

उसने भेजा , ” 23 साल”

” अरे यह तो मुझे पताही था… मैने तुम्हारे मेल आयडीसे मालूम किया था…. सच कहूं ? तूमने जब बताया की तूम मॅनेजींग डायरेक्टर हो … तो मेरे सामने एक 45-50 सालके वयस्क औरतकी तस्वीर आ गई थी… ” वह अब खुलकर बाते कर रहा था.

वह उसके खुले और मजाकिया अंदाजपर मनही मन मुस्कुरा रही थी. उसने उसके बारेमेंभी इंटरनेटपर सर्च कर जानकारी इकट्ठा की यह जानकर उसके खयालमें आगया था की वह भी उसके बारेमें उतनाही सिरीयस है.

” तूमने तुम्हारी उम्र नही बताई ?…” उसने सवाल किया.

” मैने मेरे मेल ऍड्रेसकी जानकारीमें … मेरी असली उम्र डाली हूई है …” उसका उधरसे मेसेज आया.

उसके इस जवाबसे उसे अहसास हूवा की वाकई वह बाकी लोगोसे कुछ हटके है.

विवेक कॉम्प्यूटरके सामने बैठकर कुछ पढ रहा था. तभी उसका दोस्त धीरेसे, कोई आवाज ना हो इसका ध्यान रखते हूए, उसके पिछे आकर खडा हो गया. काफी समय तक जॉनी विवेकका क्या चल रहा है यह समझनेकी कोशीश करते रहा.

” क्या गुरु… कहां तक पहूंच गई है तुम्हारी प्रेम कहानी ? ” जॉनीने एकदमसे उसके कंधे झंझोरते हूए सवाल पुछा.

विवेक तो एकदम चौंक गया और हडबडाहटमें मॉनीटरपर दिख रही विंडोज मिनीमाईझ करने लगा.

जोरसे ठहाका लगाते हूए जॉनीने कहा , ” छुपाकर कोई फायदा नही … मै सबकुछ पढ चूका हूं ”.

विवेक अपने चेहरेपर आए हडबडाहटके भाव छिपानेका प्रयास करते हूए फिरसे मॉनिटरपर सारी विंडोज मॅक्सीमाईज करते हूए बोला, ” देख तो .. उसने मेलके साथ क्या अटॅचमेंट भेजी है ”

” मतलब आग बराबर दोनो तरफ लगी हूई है …. वैसे उस चिडीयाका कुछ नाम तो होगा… जिसने हमारे विवेक का दिल उडाया है” जॉनीने पुछा.

” अंजली” विवेकका चेहरा शर्मके मारे लाल लाल हुवा था.

” देख देख कितना शर्मा रहा है ” जॉनी उसे छेडते हूए बोला.

” देखूतो … क्या भेजा है उसने ?…” जॉनीने उसे आगे पुछा.

जॉनी बगलमें रखे स्टूलपर बैठकर पढने लगा तो विवेक उसे अंजलीने अटॅच कर भेजे उस सॉफ्टवेअर प्रोग्रॅमके बारेमें जानकारी देने लगा –

” यह एक जॅपनीज सॉफ्टवेअर इंजीनिअरने लिखा हुवा सॉफ्टवेअर प्रोग्रॅम है … इस प्रोग्रॅमके लिए रिफ्लेक्शन टेक्नॉलॉजीजका इस्तेमाल किया गया है. जब हम कॉम्प्यूटरके मॉनिटरके सामने बैठे होते है तब जो रोशनी अपने चेहरेपर पडती है वह अलग अलग रंगोमें विभाजीत होकर मॉनिटरपर परावर्तीत होती है. इस सॉफ्टवेअर प्रोग्रॅमद्वारा परावर्तीत हूए रोशनीकी तिव्रता एकत्रीत कर उसे इस टेक्नॉलॉजीद्वारा फोटोग्राफमें परिवर्तीत किया जा सकता है. मतलब अगर आप इस प्रोग्रॅमको रन करोगे तो मॉनिटरपर पडे परिवर्तनके तिव्रताको एकत्रित कर यह प्रोग्रॅम आपका फोटो बना सकता है. लेकिन फोटो निकालते वक्त इतना ध्यान रखना पडता है की आप मॉनिटरके एकदम सामने, समांतर और समानांतर बैठे हूए है. मॉनीटर और आपके चेहरेमें अगर कोई तिरछा कोण होगा तो फोटो ठिकसे नही आएगा.”

” मतलब यह सॉफ्टवेअर फोटो निकालता है ?” जॉनीने पुछा.

” हां … यह देखो अभी अभी थोडी देर पहले मैने मेरा फोटो निकाला हूवा है ” विवेकने कॉम्प्यूटरपर उसका अपना फोटो खोलकर दिखाया.

” अरे वा… एकदम बढीया … अगर ऐसा है तो हमे कॅमेरा खरीदनेकी जरुरतही नही पडेगी. ” जॉनीने खुशीके मारे कहा.

” वही तो ..”

” रुको … मुझे जरा देखने दो … मै मेरा फोटो निकालता हूं ..” जॉनी मॉनीटरके सामनेसे विवेकको उठाते हूए खुद उस स्टूलपर बैठते हूए बोला.

जॉनीने स्टूलपर बैठकर माऊस कर्सर मॉनीटरपर इधर उधर घुमाते हूए पुछा, ” हां अब क्या करना है. ?”

” कुछ नही … सिर्फ वह स्नॅपका बटन दबावो … लेकिन रुको .. पहले सिधे ठिकसे बैठो…” विवेकने कहा.

जॉनी सिधा बैठकर माऊसका कर्सर ‘स्नॅप’ बटनके पास ले जाकर बटन दबाने लगा.

” स्माईल प्लीज ” विवेकने उसे टोका.

जॉनीने अपने चेहरेपर जितनी हो सकती है उतनी हंसी लानेकी कोशीश की.

” रेडी … नाऊ प्रेस द बटन” विवेक

जॉनीने ‘स्नॅप’ बटनपर माऊस क्लीक किया. मॉनीटरवर एक-दो पलके लिए निला ‘प्रोसेसींग’ बार आगे बढता हूवा दिखाई दिया और फिर मॉनीटरपर फोटो दिखाई देने लगा. जैसेही मॉनीटरवर फोटो आगया विवेक जोर जोरसे हंसने लगा और जॉनीका चेहरा तो देखने लायक हो गया था. मॉनीटरपर एक हंसते हूए बंदरका फोटो आ गया था.

दिनबदीन अंजली और विवेकका चॅटींग, मेल करना बढताही जा रहा था. मेलकी लंबाई चौडाई बढ रही थी. एकदुसरेको फोटो भेजना, जोक्स भेजना, पझल्स भेजना … मेल भेजनेके न जाने कितने बहाने उनके पास थे. धीरे धीरे अंजली को अहसास होने लगा था की वह उससे प्यार करने लगी है. लेकिन प्यार का इजहार उसने विवेक के पास या विवेक ने अंजलीके पास कभी नही किया था. उनके हर मेलके साथ… मेल मे लिखे हर वाक्य के साथ… उनके हर फोटो के साथ… उनके व्यक्तीत्व का एक एक पहेलू उन्हे पता चल रहा था. और उतनी ही वह उसमें डूबती जा रही थी. अंजलीने भी अपने आपको कभी रोका नही. या यू कहीए खुद को रोकने से खुदको उसके प्यारमें पुरी तरह डूबनेमें ही उसे आनंद मिल रहा हो. लेकिन प्यारके इजहार के बारे में वह बहूत फूंक फूंककर अपने कदम आगे बढा रही थी. उसके पास बहाना था की उसने अब तक उसे आमने सामने देखा नही था. वैसे उसके प्रेम का अहसास उसे नही था ऐसे नही. लेकिन विवेक भी प्यारके इजहारके बारेमें शायद उतनाही खबरदारी बरत रहा था. शायद उसने भी उसे अबतक आमने सामने न देखनेके कारण. वह मिलनेके बाद मुकर तो नही जाएगा? इसके बारेमें वह एकदम बेफिक्र थी. क्यो की विश्वामित्रको भी ललचाए ऐसा उसका सौंदर्य था.

अंजली अपने कॉम्प्यूटरपर चाटींग कर रही थी और उसके टेबलके सामने कुर्सीपर शरवरी बैठी हूई थी. कॉम्प्यूटरपर आई एक मेल पढते हूए अंजली बोली,

” शरवरी देख तो विवेकने मेलपर क्या भेजा है? ”

शरवरी कुर्सीसे उठकर अंजलीके पिछे जाकर खडी होगई और मॉनिटरकी तरफ ध्यान देकर देखने लगी. इन दिनो वैसे विवेक और अंजलीका कुछ ना कुछ आदान प्रदान चलता ही रहता था. और शरवरीको भी उनका प्रेमभरा आदान प्रदान देखने में या पढनेमें बडा मजा आता था. उसने मॉनीटरपर देखा की एक छोटा चायनीज बच्चा बडे मजेदार तरीकेसे डांस कर रहा था. डांस करते हूए वह बच्चा एकदमसे शूशू करने लगा तो दोनोही बडी जोरसे हंसने लगी.

” पता नही वह कहां कहांसे यह सब ढूंढता है .” अंजलीने कहा.

” सही है… मै तो इंटरनेटपर कितना सर्फ करती हूं लेकिन यह ऍनीनेशन अबतक मेरे देखनेमें कैसे नही आया. ” शरवरीने कहा.

तभी एक बुजुर्ग आदमी दरवाजेपर नॉक कर अंदर आया. वह आदमी आतेही अंजलीने अपनी पहिएवाली कुर्सी घुमाकर अपना ध्यान उस आदमीपर केंद्रीत किया. शरवरी वहांसे बाहर चली गई. वह बुजुर्ग आदमी टेबलके सामने कुर्सीपर बैठतेही अंजलीने कहा,

” बोलो आंनंदजी..”

” मॅडम … इंटेल कंपनीने अपने सारे कोलॅबरेटर्स के साथ एक मिटींग रखी है. अभी थोडीही देर पहले उनका फॅक्स आया है…. उन्होने मिटींगका दिन और व्हेन्यू हमें भेजा है … और साथही मिटींगका अजेंडाभी भेजा है. …” आनंदजीने जानकारी दी.

” कहां रखी है मिटींग ?” अंजलीने पुछा.

” मुंबई … 25 तारखको … यानीकी .. इस सोमवारको ” आनंदजीने कॅलेडरकी तरफ देखते हूए कहा.

अंजलीभी कॅलेंडरकी तरफ देखते हूए कुछ सोचते हूए बोली,

” ठिक है कन्फर्मेशन फॅक्स भेज दो … और मोनाको मेरे सारे फ्लाईट और होटल बुकींग डिटेल्स दे दो”

” ठिक है मॅडम” आनंदजी उठकर खडे होते हूए बोले.

जैसे आनंदजी वहांसे चले गए वैसे अंजलीने अपनी पहिएवाली कुर्सी घुमाकर अपना ध्यान कॉम्प्यूटरपर केंद्रीत कर दिया. उसके चेहरेपर खुशी समाए नही समा रही थी. झटसे उसने मेल प्रोग्रॅम खोला और जल्दी जल्दी वह मेल टाईप करने लगी –

” विवेक … ऐसा लगता है की जल्दीही अपने नसिबमें मिलना लिखा है …पुछो कैसे? लेकिन मै अभी नही बताऊंगी. क्योंकी कुछ तो क्लायमॅक्स रहना चाहिए ना ? अगले मेलमे सारे डिटेल्स भेजूंगी … बाय फॉर नाऊ… टेक केअर .. —अंजली…”

अंजलीने फटाफट कॉम्प्यूटरके दो चार बटन्स दबाकर आखिर ऐंन्टर दबाया. कॉम्प्यूटरके मॉनीटरपर मेसेज आ गया – ‘मेल सेन्ट’

विवेक सायबर कॅफेमें अपने कॉम्प्यूटरपर बैठा था. फटाफट हाथकी सफाई किए जैसे उसने गुगल मेल खोलतेही उसे अंजलीकी मेल आई हूई दिखाई दी. उसका चेहरा खुशीसे दमकने लगा. उसने एक पलभी ना गवांते हूए झटसे डबल क्लीक करते हूए वह मेल खोली और उसे पढने लगा –

” विवेक … 25 को सुबह बारा बजे मै एक मिटींगके सिलसिलेमें मुंबई आ रही हूं … 12.30 बजे तक हॉटेल ओबेराय पहूचूंगी… और फिर फ्रेश वगैरे होकर 1.00 बजे मिटींग अटेंड करुंगी…. मिटींग 3 से 4 बजेतक खत्म हो जाएगी … तुम मुझे बराबर 5.00 बजे वर्सोवा बिचपर मिलना … बाय फॉर नॉऊ… टेक केअर”

विवेकने मेल पढी और खुशीके मारे खडा होकर ” यस्स…” करके चिल्लाया.

सायबर कॅफेमें बैठे बाकी लोग क्या होगया करके उसकी तरफ आश्चर्यसे देखने लगे. जब उसने होशमें आकर बाकी लोगोंको अपनी तरफ आश्चर्यसे ताकते पाया वह शर्माकर निचे बैठ गया.

वह फिरसे अपने रिसर्चके सिलसिलेमें गुगल सर्च ईंजीनपर जानकारी ढुंढने लगा. लेकिन उसका ध्यान किसी चिजमें नही लग रहा था. कब एक बार वह दिन आता है , कब अंजली मुंबइको आती है और कब उसे वह वर्सोवा बिचपर मिलता है ऐसा उसे हो गया था.

‘ वर्सोवा बिच’ दिमागमें आगया लेकिन उस बिचकी तस्वीर उसके जहनमें नही आ रही थी. वर्सोवा बिचका नाम उसने सुना था लेकिन वह कभी वहां नही गया था. वैसे वह मुंबईमें रहकर पिएचडी कर तो रहा था लेकिन वह जादातर कभी घुमता नही था. मुंबईमें वह वैसे पहले पहले काफी घुमा था. लेकिन वर्सोवा बिचपर कभी नही गया था. अब यहां सायबर कॅफेमें बैठे बैठे क्या करेंगे यह सोचकर उसने गुगल सर्च ओपन किया और उसपर ‘वर्सोवा बिच’ सर्च स्ट्रींग दिया. इंटरनेटपर काफी जानकारी फोटोज और जानेके रास्ते मॅप्स अवतरीत हूए . उसने वह जानकारी पढकर जानेका रास्ता तय किया. अब और क्या करना चाहिए ? उसका दिमाग सुन्न हो गया था. चलो उसने भेजी हूई पुरानी मेल्स पढते है और उसने भेजे हूए फोटोज देखते है ऐसा सोचकर वह एक एक कर उसकी पुरानी मेल्स खोलने लगा. मेल्सकी तारीखसे उसके खयालमें आ गया की उनका यह ‘सिलसिला’ वैसे जादा पुराना नही था. आज लगभग 1 महिना हो गया था जब वह पहली बार उसे चॅटींगपर मिल गई थी. लेकिन उसे उनकी पहचान कैसे कितनी पुरानी लग रही थी. उन्होने एकदुसरेको भेजे मेल्स और फोटोजसे वैसे उन्हे एक दुसरेको जाननेका मौका मिला था और एक दुसरेके जहनमें उन्होने एकदुसरेकी एक तस्वीर बना रखी थी. वैसे उन्होने एकदुसरेके स्वभावकाभी एक अंदाजा लगाकर अपने अपने मनमें बसाया था.

‘ वह अपने कल्पनानूसारही होगी की नही ?’ उसके दिमागमें एक प्रश्न उपस्थित हुवा.

या मिलनेके बाद मैने सोचे इसके विपरीत कोई अनजान… कोई कभी ना सोची होगी ऐसी एक व्यक्ती अपने सामने खडी हो जाएगी…

‘ चलो आमने सामने मिलनेके बाद कमसे कम यह सब शंकाए मिट जाएगी ‘ उसने उसका फोटो अल्बम देखते हूए सोचा.

अचानक उसे उसके पिछे कोई खडा है ऐसा अहसास हो गया. उसने पलटकर देखा तो जॉनी एक नटखट मुस्कुराहट धारण करते हूए उसकी तरफ देख रहा था.

” साले बस बात यहीतक पहूंची है तो यह हाल है … तुझे आजुबाजुकाभी कुछ दिखता नही… शादी होनेके बाद पता नही क्या होगा?” जॉनीने उसे छेडते हूए कहा.

” अरे… तुम कब आए ?” विवेक अपने चेहरेपर आए हडबडाहटके भाव छुपाते हूए बोला.

” कमसे कम पुरा आधा घंटा हो गया होगा… ऐसा लगता है शादी होनेके बाद तु हमें जरुर भुल जाएगा ” जॉनी फिरसे उसे छेडते हूए बोला.

” अरे नही यार… ऐसा कैसे होगा ?… कमसे कम तुम्हे मै कैसे भूल पाऊंगा ?” विवेक उसके सामने आए हूए तोंदमें मुक्का मारनेका अविर्भाव करते हूए बोला.

अंजली वर्सोवा बीचपर आकर विवेककी राह देखने लगी. उसने फिरसे एकबार अपनी घडीकी तरफ देखा. विवेकके आनेको अभी वक्त था. इसलिए उसने समुंदरके किनारे खडे होकर दुरतक अपनी नजरे दौडाई. नजर दौडाते हूए उसके विचार जा चक्र भूतकालमें चला गया. उसके दिलमें अब उसकी बचपनकी यादे आने लगी…

वर्सोवा बीच यह अंजलीका मुंबईमें स्थित पसंदीदा स्थान था. बचपनमें वह उसके मां बापके साथ यहां अक्सर आया करती थी. उसे उसके मां बाप की आज बहुत याद आ रही थी. भलेही आज वह समुंदर का किनारा इतना साफ सुधरा नही था लेकिन उसके बचपनमें वह बहुत साफ सुधरा रहा करता था. सामने समुंदरके लहरोंका आवाज उसके दिलमें एक अजीबसी कसक पैदा कर रहा था.

उसने अपने कलाईपर बंधे घडीकी तरफ फिरसे देखा. विवेकको उसने शामके पांचका वक्त दिया था.

पांच तो कबके बज चूके थे … फिर वह अबतक कैसे नही पहूंचा ?…

उसके जहनमें एक सवाल उठा …

कही ट्रॅफिकमें तो नही फंस गया? …

मुंबईकी ट्रॅफिक में कब कोई और कहां फंस जाएं कुछ कहा नही जा सकता….

उसने लंबी आह भरते हुए फिरसे चारों ओर अपनी नजरे दौडाई.

सामने किनारेपर एक लडका समुंदरके किनारे रेतके साथ खेल रहा था. वह देखकर उसके विचार फिरसे भूतकालमें चले गए और फिर एक बार उसकी बचपनकी यादोंमे डूब गए.

वह तब लगभग 12-13 सालकी होगी जब वह अपने मां और पिताके साथ इसी बीचपर आई थी. वह लडका जहां खेल रहा था, लगभग वही कही रेतका किला बना रहे थे. तभी उसके पिताने कहा था,

” देखो अंजली उधर तो देखो…”

समुंदर के किनारे एक लडका कुछ चिज समुंदरके अंदर दुरतक फेंकनेका जीतोड प्रयास कर रहा था. वह लेकिन समुंदरकी लहरे उस चिजको फिरसे किनारेपर वापस लाती थी. वह लडका बार बार उस चिजको समुंदरमें बहुत दुरतक फेकनेकेका प्रयास करता था और बार बार वह लहरें उस चिजको किनारेपर लाकर छोडती थी.

फिर उसके पिताजीने अंजलीसे कहा –

” देखो अंजली वह लडका देखो … वह चिज वह समुंदरमें फेकनेकी कोशीश कर रहा है और वह वस्तू बार बार किनारेपर वापस आ रही है… अपने जिवनमेंभी दु:ख और सुखका ऐसेही होता है… आदमी जैसे जैसे अपने जिवनमें आए दुखको दुर करनेका प्रयास करता है… उस वक्त के लिए लगता है की दुख चला गया है और वह फिरसे वापस कभी नही आएगा… लेकिन दुखका उस चिज जैसाही रहता है … जितना तुम उसे दुर धकेलनेकी कोशीश करो वह फिरसे उतनेही जोरसे वापस आता है… अब देखो वह लडका थोडी देर बाद अपने खेलनेमें व्यस्त हो जाएगा… और वह उस चिजको पुरी तरहसे भूल जाएगा… फिर जब उसे उस चिजकी याद आएगी… वह चिज किनारेपर ढूंढकरभी नही मिलेगी… वैसेही आदमीने अगर दुखको जादा महत्व ना देते हूए … सुख और दूखका एकही अंदाजसे सामना किया तो उसे दुखसे तकलिफ नही होगी… …देअर विल बी पेन बट टू सफर ऑर नॉट टू सफर वील बी अप टू यू!”

उसे याद आ रहा था की उसके पिता कैसे उसे छोटी छोटी बातोंसे बहुत कुछ सिखकी बाते कह जाते थे.

जब अंजली अपनी पुरानी यादोंसे बाहर आ गई, उसके सामने विवेक खडा था. उंचा, गठीला शरीर, चेहरेपर हमेशा मुस्कान और उसकी हर एक हरकतसे दिखता उसका उत्साह. उसने देखे उसके फोटोसे वह बहुत अलग और मोहक लग रहा था. वे एकदुसरेसे पहली बारही मिल रहे थे इसलिए दोनोंके चेहरे खुशीसे दमक उठे थे. दोनों एकदुसरे की तरफ सिर्फ एकटक देखने लगे.

अंजली और विवेक दोनो न जाने कितनी देर सिर्फ एक दुसरे की तरफ ताक रहे थे. भलेही वे एकदुसरे को एक महिने से जानते थे लेकिन वे एक दुसरे के सामने पहली बार आ रहे थे. वैसे वे एकदुसरे को सिर्फ जानते ही नही थे तो उन्होने एक दुसरेको अच्छी तरह से समझ लिया था. एकदुसरे के स्वभाव की खुबीया या खामीयां वे भली भांती जानते थे. फिरभी एक दुसरे के सामने आते ही उन्हे क्या बोले कुछ समझ नही आ रहा था. वे इतने चूप थे की मानो दो-दो तिन-तिन पेजेस की मेल करनेवाले वे हमही है क्या? ऐसी उन्हे आशंका आए. आखिर विवेकने ही पहल करते हूए शुरवात की,

” ट्रॅफिकमें अटक गया था… इसलिए देर हो गई …”

” मै तो साडेचार बजेसेही तुम्हारी राह देख रही हूं ..” अंजलीने कहा.

” लेकिन तूमने तो पांच का वक्त दिया था. ” विवेकने कहा.

सिर्फ शुरु करनेकी ही देरी थी, अब वे आपस में अच्छे खासे घुल मिलकर बाते करने लगे, मानो इंटरनेट पर चॅटींग कर रहे हो. बाते करते करते वे धीरे धीरे बीचके रेतपर समुंदरके किनारे किनारे चलने लगे. चलते चलते कब उनके हाथ एकदुसरे में गुथ गए, उन्हे पताही नही चला. न जाने कितनी देर तक वे एक दुसरेके हाथ पकडकर बीचपर घुम रहे थे.

सुर्यास्त हो चुका था और अब अंधेराभी छाने लगा था. बिचमेंही अचानक रुककर, गंभीर होकर विवेकने कहा,

” अंजली… एक बात पुछू ?”

उसने आखोंसेही मानो हा कह दिया.

” मुझसे शादी करोगी ?” उसने सिधे सिधे पुछा.

उसके इस अनपेक्षित सवालसे वह एक पल के लिए गडबडासी गई. अपने गडबडाए हालातसे संभलकर उसने कुछ ना बोलते हूए अपनी गर्दन निचे झूकाई.

विवेकका दिल अब जोरजोरसे धडकने लगा था.

मैने बडा ढांढस कर यह सवाल तो पुछा….

लेकिन वह ‘हां’ कहेगी या ‘नही’ ?…

वह उसके जवाबकी प्रतिक्षा करने लगा.

मैने यह सवाल पुछनेमें कुछ जल्दी तो नही कर दी ?…

उसने अगर ‘नही’ कहा तो ?…

उसके जहनमें अलग अलग आशंकाएं आने लगी.

थोडी देरसे वह बोली,

” चलो हमें निकलना चाहिए ..”

उसने बोलने के लिए मुंह खोला तब उसका दिल जोर जोरसे धडकने लगा था.

लेकिन यह क्या … वह उसके सवालके जवाबसे बच रही थी….

लेकिन वह एक पीएचडी का छात्र था. किसी भी सवाल के जवाब का पिछा करना उसके खुनमें ही भिना हूवा था.

” .. तूमने मेरे सवाल का जवाब नही दिया ..” उसने उसे टोका.

” चलो मै तुम्हे छोड आती हूं ” वह फिर से उसके सवाल के जवाब से बचते हूए बोली.

लेकिन वहभी कुछ कम नही था.

” अभी तक तूमने मेरे सवालका जवाब नही दिया ”

वह शर्मके मारे चूर चूर हो रही थी. उसकी गर्दन झूकी हूई थी और उसका गोरा चेहरा शर्मके मारे लाल लाल हुवा था. वह अपनी भावनाए छुपानेके लिए पैर के अंगुठेसे जमीन कुरेदने लगी.

” मैने थोडी ना कहा है ” वह किसी तरह, अभीभी अपनी गर्दन निची रखते हूए बोली.

अपने मुंहसे वह शब्द बाहर पडे इसका उसे खुदको ही आश्चर्य लग रहा था. विवेक का अब तक मायूस हुवा चेहरा एकदम से खुशीके मारे खिल उठा. उसे इतनी खुशी हुई थी की वह उसे कैसे व्यक्त करे कुछ समझ नही पा रहा था. उसने अपने आपको ना रोक पाकर उसे अपने बाहोंमें कसकर भरकर उपर उठा लिया.

अंजली गाडी ड्राईव्ह कर रही थी और गाडीमें आगे उसके बगलकीही सिटपर विवेक बैठा हुवा था. गाडीमें काफी समयतक दोनो अपने आपमें खोए हूए गुमसुमसे बैठे हूए थे.

सच कहा जाए तो विवेक उसने सोचे उससेभी जादा चुस्त , तेज तर्रार और देखनेमें उमदा है … और उसका स्वभाव कितना सिधा और सरल है …

पहलेही मुलाकातमें शादीके बारेमें सवाल कर उसने अपनी भावनाएं जाहिर की यह एक तरहसे अच्छा ही हुवा.. सच कहा जाए तो उसने वह सवाल पुछकर मुझेभी उसके बारेमें अपनी भावनाएं व्यक्त करनेका मौका दिया है…

उसे अब उसके बारेंमे एक अपनापन महसूस हो रहा था. उसने अब उसमें अपना भावी सहचारी … एक दोस्त… जो हमेशा दुख और सुखमें उसका साथ देगा … देखना शुरु किया था.

उसने सोचते हूए उसकी तरफ एक कटाक्ष डाला. उसनेभी उसकी तरफ देखकर एक मधूर मुस्कुराहट बिखेरी.

लेकिन अब वहभी अपनेही बारेमें सोच रहा होगा क्या?…

” तूम पढाई वैगेरा कब करते हो… नही .. मतलब .. हमेशा तो चॅटींग और इंटरनेटपरही बिझी रहते हो ” अंजली कुछ तो बोलना है और विवेकको थोडा छेडनेके उद्देश्यसे बोली.

विवेक उसके छेडनेका मुड पहचानकर सिर्फ मुस्कुरा दिया.

” हालहीमें तुम्हारे कंपनीका प्रोग्रेस क्या कहता है ? ” विवेकने पुछा.

” अच्छा है … क्यों?… हमारी कंपनी तो दिनबदीन प्रोग्रेस करती जा रही है ” अंजलीने कहा.

” नही मैने सोचा … हमेशा चॅटींग और इंटरनेटपर बिझी होनेसे उसका असर कंपनीके कामपर हुवा होगा. … नही?” विवेकभी उसे वैसाही नटखट जवाब देते हूए बोला.

वहभी उसके तरफ देखकर सिर्फ हंस दी. वह उसके इस बातोंमें उलझानेके खुबीसे वाकीफ थी और उसे उसका इस बारेमें हमेशा अभिमान रहा करता था.

अंजलीकी गाडी एक आलीशान हॉटेलके सामने – हॉटेल ओबेरायके सामने आकर रुकी. गाडी पार्कींगमें ले जाकर अंजलीने कहा, ” एक मिनीट मै मेरा मोबाईल हॉटेलमें भूल गई हूं … वह झटसे लेकर आती हूं और फिर हम निकलेंगे… नही तो एक काम कर सकते है … कुछ ठंडा या गरम हो जाए तो मजा आ जाएगा … नही?… और फिर निकलेंगे ” अंजली गाडीके निचे उतरते हूए बोली.

अंजली उतरकर हॉटेलमें जाने लगी और विवेकभी उतरकर उसके साथ हो लिया.

हॉटेलका सुईट जैसे जैसे नजदिक आने लगा, वैसे एक अन्जानी भावनासे अंजलीके दिलकी धडकन तेज होने लगी थी. एक अनामिक डरने मानो उसे घेर लिया था. विवेक भलेही उसके पिछे पिछे चल रहा था लेकिन उसके सासोंकी गति विचलीत हो चुकी थी. अंजलीने सुईटका दरवाजा खोला और अंदर चली गई.

विवेक दरवाजेमेही इधर उधर करता हुवा खडा हो गया.

” अरे आवोना अंदर आवो ” अंजली उनके बिच बनी, असहजता, एक तणाव दूर करनेका प्रयास करती हुई बोली.

” बैठो ” अंजली उसे बैठनेका इशारा करती हुई बोली और वही कोनेमें रखा फोन उठानेके लिए उसके पासही बैठ गई.

अंजलीने विवेकके पास रखा हुवा फोन उठानेके लिए हाथ बढाया और बोली, ” क्या लोगे ठंडा या गरम”

फोन उठाते हूए अंजलीके हाथका हल्कासा स्पर्ष विवेकको हुवा था. उसका दिल जोर जोरसे धडकने लगा. अंजलीको भी वह स्पर्श आल्हाददायक और अच्छा लगा था. लेकिन चेहरेपर वैसा कुछ ना बताते हूए उसने ऑर्डर देनेके लिए फोनका क्रेडल उठाया.

फोनका नंबर डायल करनेके लिए अब उसने अपना दुसरा हाथ बढाया. इसबार इस हाथकाभी हल्कासा स्पर्ष विवेकको हुवा. इस बार वह अपने आपको रोक नही सका. उसने अंजलीने आगे बढाया हुवा हाथ हल्केही अपने हाथमें लिया. अंजली उसकी तरफ देखकर शर्माकर मुस्कुराई. उसे वह हाथ उसके हाथसे छुडाकर लेना नही हो रहा था. मानो वह हाथ सुन्न हो गया हो. विवेकने अब वह हाथ कसकर पकडकर उसे खिंचकर अपनी बाहोंमे भर लिया. सबकुछ कैसे तेजीसे घट रहा था और वह सब अंजलीकोभी अच्छा लग रहा था. उसका पुरा बदन गर्म हो गया था और होंठ कांपने लगे थे. विवेकनेभी अपने गर्म और बेकाबू हूए होंठ उसके कांपते होंठोपर रख दिए. अंजलीका एक मन प्रतिकार करनेके लिए कह रहा था. लेकिन दुसरा मन तो विद्रोही होकर सारी मर्यादाए तोडने निकला था. वह उसपर हावी होता जा रहा था और अंजलीकी मानो होशोहवास खोए जैसी स्थिती हो गई थी. विवेकने उसे झटसे अपने मजबुत बाहोंमे उठाकर बगलमें रखे बेडपर लिटाया. उसके उस उठानेमें उसे एक आधार देनेवाली मर्दानी और हक जतानेवाली भावना दिखी इसलिए वह इन्कारभी नही कर सकी. या यू कहिए उसके पास प्रतिकार करनेके लिए कुछ शक्तीही नही बची थी.

उसे उसका वह सवाल याद आगया, ” अंजली मुझसे शादी करोगी ?”

और उसे अपना जवाबभी याद आगया, ” मैने ना थोडीही कहा है ”

उसे अब उसके बाहोमें एक सुरक्षा का अहसास हो रहा था. वहभी अब उसके हर भावनाको उतनीही उत्कटतासे प्रतिसाद दे रही थी.

” विवेक आय लव्ह यू सो मच” उसके मुंहसे शब्द बाहर आ गये.

” आय टू” विवेक मानो उसके गलेका चुंबन लेते हूए उसके कानमें कह रहा था.

धीरे धीरे उसका मजबुत मर्दानी हाथ उसके नाजूक बदनसे खेलने लगा. और वहभी किसी लतीका की तरह उसको चिपककर अपने भविष्यके आयुष्यका सहारा ढुंढ रही थी.

‘ हां मैही तुम्हारे आगेके आयूष्य का सहारा … साथीदार हुं ‘ इस हकसे अब वह उसके बदनसे एक एक कपडे हटाने लगा था.

‘ हां मैने भी अब तुम्हे सब कुछ अर्पन कर दिया है .. ‘ इस विश्वास के साथ समर्पन करके वहभी उसके शरीर से एक एक कपडे हटाने लगी.

अंजली अचानक हडबडाकर निंदसे जाग गई. उसने बेडपर बगलमें देखा तो वहा विवेक निर्वस्त्र अवस्थामें चादर बदनपर ओढे गहरी निंद सो रहा था. लेकिन निंदमेंभी उसका एक हाथ अंजलीके निर्वस्त्र बदनपर था. इतने दिनोंमे रातको अचानक बुरे सपनेसे जगनेके बाद उसे पहली बार उसके हाथका एक बडा सहारा महसूस हुवा था.

अंजली चिंताग्रस्त अवस्थामें अपनी कुर्सीपर बैठी थी. उसके टेबलके सामनेही शरवरी बैठी हूई थी. विवेकके साथ बिताया एक एक पल याद करते हूए पिछले तिन कैसे बित गए अंजलीको कुछ पता ही नही चला था. लेकिन आज उसे चिंता होने लगी थी.

“” आज तिन दिन हो गए … ना वह चाटींगपर मिल रहा है ना उसकी कोई मेल आई है.” अंजलीने शरवरीसे चिंताभरे स्वरमें कहा.

एक दिनमें न जाने कितनी बार चॅटींगपर चॅट करनेवाला और एक दिनमें न जाने कितनी मेल्स भेजनेवाला विवेक अब अचानक तिन दिनसे चूप क्यों होगया? सचमुछ वह एक चिंताकी ही बात थी.

“” उसका कोई कॉन्टॅक्ट नंबर तो होगाना ?” शरवरीने पुछा.

“” हां है… लेकिन वह कॉलेजका नंबर है… लेकिन वहां फोन कर उसके बारेमें पुछना उचीत होगा क्या ?” अंजलीने कहा.

“” हा वह भी है ” शरवरीने कहा.

“” मुझे चिंता है … कही वह मेरे बारेमें कुछ गलत सलत सोचकर ना बैठे … और अगर वैसा है तो पता नही वह मेरे बारेंमे क्या सोच रहा होगा … ” अंजलीने मानो खुदसेही सवाल किया.

हॉटेलमें जो हुवा वह नही होना चाहिए था …

उसकी वजहसे शायद वह अपने बारेमें कुछ गलत सोच रहा होगा….

लेकिन जोभी हुवा वह कैसे … अचानक… दोनोंको कोई मौका दिए बिना हो गया….

मैने उसे हॉटेलमें बुलाना ही नही चाहिए था…

उसे अगर हॉटेलमें नही बुलाया होता तो यह घटना घटी ही नही होती…

अंजलीके दिमागमें पता नही कितने सवाल और उनके जवाब भिड कर रहे थे.

“” मुझे नही लगता की वह तुम्हारे बारेमें कुछ गलत सोच रहा होगा… वह दुसरेही किसी कारणवश तुम्हारे संपर्कमें नही होगा… जैसे किसी महत्वपुर्ण कामके सिलसिलेमें वह किसी बाहर गाव गया होगा….” शरवरी अंजलीके दिलको समझाने बहलानेकी कोशीश करते हुए बोली.

लेकिन अंदरसे वहभी उतनीही चिंतातूर थी. अंजलीने शरवरीको हॉटेलमें घटीत घटनाके बारेमें विस्तारसे बताया मालूम हो रहा था. वैसे वह उसे अपनी बहुत करीबी दोस्त मानती थी और उससे निजी बातेभी नही छुपाती थी.

“” उसे हॉटेलके अंदर बुलाया नही होता तो शायद यह नौबत नही आती ” अंजलीने कहा.

“” नही नही वैसा कुछ नही होगा… पहले तुम अपने आपको बिना मतलब कोसना बंद करदो… ” शरवरी उसे समझानेकी कोशीश करती हुई बोली.

मोनाने जल्दी जल्दी उसके सामनेसे गुजर रहे आनंदजींको रोका.

“”आनंदजी आपने शरवरीको देखा क्या ?” मोनाने पुछा.

“” हां .. वह उपर विकासके पास बैठी हूई है … क्यो क्या हुवा ?” आनंदजीने मोनाका चिंतासे ग्रस्त चेहरा देखकर पुछा.

“” कुछ नही… अंजली मॅमने उसे तुरंत बुलानेके लिए कहा है .. आप उधरही जा रहे हो ना … तो उसे अंजली मॅमके पास तुरंत भेज देंगे प्लीज… कुछ महत्वपुर्ण काम लगता है ” मोना आनंदजींसे बोली.

“” ठिक है … मै अभी भेज देता हूं ..” आनंदजी सिढीयां चढते हूए बोले.

शरवरीको आनंदजींका मेसेज मिलतेही वह तुरंत अंजलीके कॅबिनमें गई. देखती है तो अंजली हताश, निराश दोनो हाथोंके बिच टेबलपर अपना सर रखकर बैठी थी.

“” अंजली क्या हुवा ?” अंजलीको उस अवस्थामें बैठी हुई पाकर शरवरीने चिंताभरे स्वरमें, उसके पास जाकर, उसके पिठपर हाथ सहलाते हूए पुछा.

उसने उसे इतना हताश और निराश, और वह भी ऑफीसमें कभी नही देखा था.

ऐसा अचानक क्या हुवा होगा?…

शरवरी सोचने लगी. अंजलीने धीरेसे अपना सर उठाया. उसके हर हरकतमें एक धीमापन और दर्द दुख का अहसास दिख रहा था. उसका चेहराभी उदास दिख रहा था.

हां उसके पिताजी जब अचानक हार्ट अटॅकसे गुजर गए थे तबभी वह ऐसीही दिख रही थी….

धीरेसे अपना चेहरा कॉम्प्यूटरके मॉनीटरकी तरफ घुमाते हूए अंजली बोली, “” शरवरी… सब कुछ खतम हो चुका है ”

कॉम्प्यूटरका मॉनीटर शुरुही था. शरवरीने झटसे नजदिक जाकर कॉम्प्यूटरपर क्या चल रहा है यह देखा. उसे मॉनीटरपर विवेककी अंजलीने खोली हूई मेल दिखाई दी. शरवरी वह मेल पढने लगी –

“” मिस अंजली… हाय… वुई हॅड अ नाईस टाईम … आय रिअली ऍन्जॉइड इट.. खुशीसे और तुम्हारे प्यारकी वर्षावसे भिगे हुए वह पल मैने मेरे दिलमें और मेरे कॅमेरेमें कैद करके रखे है… मै तुम्हारी माफी चाहता हूं की वे पल मैने तुम्हारे इजाजतके बिना कॅमेरेमें बंद किये है … वह पल थे ही ऐसे की मै अपने मोहको रोक नही सका…. तुम्हे झूट तो नही लग रहा है न? .. देखो … उन पलोंसे एक चुने हूए पलको मैने इस फोटोग्राफके स्वरुपमें तुम्हारे मेलके साथ अटॅच करके भेजा है…. ऐसे बहुतसे पल मैने मेरे कॅमेरेमे और मेरे हृदयमें कैद कर रखे है … सोचता हूं की उन पलोंको .. इन फोटोग्राफ्सको इंटरनेटपर पब्लीश कर दूं .. क्यो कैसी दिमागवाली आयडिया है ? है ना? … लेकिन यह तुम्हे पसंद नही आएगी … तुम्हारी अगर इच्छा नही हो तो उन पलोंको मै हमेशाके लिए मेरे दिलमें दफन करके रख सकता हूं … लेकिन उसके लिए तुम्हे उसकी एक मामुलीसी किमत अदा करनी पडेगी…. क्या करे हर बात की एक तय किमत होती है … है की नही ?…कुछ नही बस 50 लाख रुपए… तुम्हारे लिए बहुतही मामुली रकम … और हां … पैसेका बंदोबस्त तुरंत होना चाहिए … पैसे कब कैसे पहुंचाने है … यह बादमें मेलके द्वारा बताऊंगा …

मै इस मेलके लिए तुम्हारी तहे दिलसे माफी चाहता हूं .. लेकिन क्या करें कुछ पाने के लिए कुछ खोना पडता है … अगले मेलका इंतजार करना … और हां … तुम्हे बता दूं की मुझे पुलिसका बहुत डर लगता है … और जब मै डरता हूं तब हडबडाहटमें कुछभी अटपटासा करने लगता हूं …. किसीका खुनभी …

— तुम्हारा … सिर्फ तुम्हारा … विवेक ”

मेल पढकर शरवरीको मानो उसके पैरके निचेसे जमिन खिसक गई हो ऐसा लग रहा था. वह एकदम सुन्न हो गई थी. ऐसाभी हो सकता है, इसपर उसका विश्वासही नही हो रहा था. उसने विवेकके बारेमें क्या सोचा था, और वह क्या निकला था.

” ओ माय गॉड… ही इज अ बिग फ्रॉड… आय कांट बिलीव्ह इट…” शरवरीके आश्चर्यसे खुले मुंहसे निकल गया.

शरवरीने मेलके साथ अटॅच कर भेजे फोटोके लिंकपर क्लीक करके देखा. वह अंजलीका और विवेकका हॉटेलके सुईटमें एकदुसरेको बाहों में लिया हुवा नग्न फोटो था.

” लेकिन उसने यह फोटो, कैसे लिया होगा ?” शरवरीने अपनी उलझन जाहिर की.

“” मै मुंबईको कब जानेवाली थी … कहा रुकने वाली थी … इसकी उसे पहलेसेही पुरी जानकारी थी. ” अंजलीने कहा.

” यह तो सिधा सिधा ब्लॅकमेलींग है.” शरवरी गुस्सेसे आवेशमें आकर चिढकर बोली.

” उसके मासूम चेहरेके पिछे इतना भयानक चेहराभी छिपा हूवा हो सकता है … मुझे तो अबभी विश्वास नही होता. ” अंजलीने दुखसे कहा.

” कमसे कम शादीके पहले हमें उसका यह भयानक रुप पता चला… नही तो न जाने क्या हो जाता …” शरवरीने कहा.

” मुझे दुख पैसेका नही … दुख है तो सिर्फ उसने दिए इतने बडे धोखे और विश्वासघात का है. ” अंजलीने कहा.

” एक पलके लिए समझ लो की अगर हम उसे 50 लाख रुपए दे देते है… लेकिन पैसे लेनेके बादभी वह फिरसे हमें ब्लॅकमेल नही करेगा इसकी क्या ग्यारंटी? … ” शरवरीने फिरसे अपने मनमें चल रहा सवाल जाहिर किया.

अंजली चेहरे पर डर लिए सिर्फ उसकी तरफ देखती रही. क्योंकी उसके पासभी इस सवालका कोई जवाब नही था.

“” मुझे लगता है तूम एक बार उसे मेल कर उसका मन परिवर्तीत करनेका प्रयास करो… और अगर फिरभी वह नही मानता है तो … चिंता मत करो… हम जरुर इसमेंसेभी कुछ रास्ता निकालेंगे. ” शरवरी उसको ढांढस बढाते हूई बोली.

सायबर कॅफेमें लोग अपने अपने क्यूबीकल्समें अपने अपने इंटरनेट सर्फींगमें बिझी थे. कुछ कॉम्प्यूटर्स वही खुले हॉलमें रखे थे, वहांभी कोई कॉम्प्यूटर खाली नही था. की बोर्डके बटन्स दबानेका एक अजिब आवाज एक लय और तालमें सारे कॅफेमें घुम रहा था. सब लोग, कोई चॅटींग, कोई सर्फींग, कोई गेम्स खेलनेमें तो कोई मेल्स भेजनेमें मग्न था. तभी एक आदमी दरवाजेसे अंदर आ गया. वह अंदर आकर जिस तरहसे इधर उधर देख रहा था, कमसे कम उससे वह यहां पर पहली बार आया हो ऐसा लग रहा था. रिसेप्शन काऊंटरपर बैठा स्टाफ मेंबर उसके सामने रखे कॉम्प्यूटरपर ताशका गेम ‘सॉलीटेअर’ खेल रहा था. उस आदमीकी आहट होतेही उसने झटसे, बडी स्फुर्तीके साथ अपने मॉनिटरपर चल रहा वह गेम मिनीमाईझ किया और आया हुवा आदमी अपना बॉस या उसके घरका कोई आदमी नही है यह ध्यानमें आतेही वह फिरसे वह गेम मॅक्सीमाईज करके खेलने लगा. वह अंदर आया हुवा आदमी कुछ पलके लिए रिसेप्शन काऊंटरके पास मंडराया और रुककर स्टाफको पुछने लगा –

” विवेक आया क्या ?”

उस स्टाफने भावना विरहित चेहरेसे उसकी तरफ देखकर पुछा –

” कौन विवेक?”

” विवेक सरकार … वह मेरा दोस्त है ….. और उसनेही मुझे यहां बुलाया है ..” उस आदमीने कहा.

” अच्छा वह विवेक… नही आज तो वह दिखा नही .. वैसे तो वह रोज आता है … लेकिन कलसे मैने उसे देखा नही है … ” काऊंटरपर बैठे स्टाफने जवाब दिया और वह सामने रखे हूए कॉम्प्यूटरपर फिरसे ‘सॉलीटेअर’ खेलनेमें व्यस्त हो गया.

अंजली कॉन्फरंन्स रुममें दिवारपर लगे छोटे पडदेपर प्रोजेक्टरकी सहाय्यतासे शरवरीको कुछ समझा रही थी. और शरवरी वह जो बोल रही है वह ध्यान देकर सुन रही थी.

” शरवरी जैसा तुमने कहा था वैसेही मैने विवेकको समझाकर देखनेके लिए एक मेल भेजी है … लेकिन उसे सिर्फ मेलही ना भेजते हूए मैने एक बडा दांव भी फेंका है … ” अंजली बोल रही थी.

” दांव? … कैसा ?…” शरवरीने कुछ ना समझते हूए आश्चर्यसे पुछा.

” उसे भेजे हूए मेलके साथ मैने एक सॉफ्टवेअर प्रोग्रॅम अटॅच कर भेजा है” अंजलीने कहा.

” कैसा प्रोग्रॅम?” शरवरीको अभीभी कुछ समझ नही रहा था.

” उस प्रोग्रॅमको ‘स्निफर’ कहते है … जैसेही विवेक उसे भेजी हूई मेल खोलेगा .. वह स्निफर प्रोग्रॅम रन होगा …” अंजली बोल रही थी.

” लेकिन वह प्रोग्रॅम रन होनेसे क्या होगा ?” शरवरीने पुछा.

” उस प्रोग्रॅमका काम है … विवेकके मेलका पासवर्ड मालूम करना … और वह पासवर्ड मालूम होतेही वह प्रोग्रॅम हमे वह पासवर्ड मेलद्वारा भेजेगा … ” अंजली बोल रही थी.

” अरे वा… ” शरवरी उत्साहभरे स्वरमें बोली लेकिन अगलेही पल कुछ सोचते हूए उसने पुछा, ” लेकिन उसका पासवर्ड मालूम कर हमें क्या मिलेगा ?”

” जिस तरहसे विवेक मुझे ब्लॅकमेल कर रहा है … उसी तरह हो सकता है की वह और बहुत लोगोंको ब्लॅकमेल कर रहा होगा …या फिर उसके मेलबॉक्समें हमे उसकी कुछ कमजोरी… या जो हमारे कामका साबीत हो ऐसा कुछतो हमें पता चलेगा … वैसे फिलहाल हम अंधेरेमें निशाना साध रहे है…. लेकिन मुझे यकिन है … हमें कुछ ना कुछतो जरुर मिलेगा ” अंजली बता रही थी.

” हां … हो सकता है ” शरवरीने कहा.

और फिर कुछ सोचकर उसने कहा, ” मुझे क्या लगता है … हमें अपना दुश्मन कौन है यह पता है … वह कहां रहता है यहभी पता है … फिर वह अपनेपर वार करनेके पहलेही अगर हम उसपर वार करते है तो ?”

” वह संभावनाभी मैने जांचकर देखी है … लेकिन अब वह उसके होस्टेलसे गायब है … वुई डोन्ट नो हिज व्हेअर अबाऊट्स”

तभी कॉम्प्यूटरका बझर बजा. अंजलीने और शरवरीने झटसे पलटकर मॉनिटरकी तरफ देखा. मॉनिटरकी तरफ देखतेही दोनोके चेहरे खिल गए. क्योंकी उनकी अपेक्षानुसार अंजलीने विवेकके मेलको अटॅच कर भेजे ‘स्निफर’ सॉफ्टवेअरकीही वह मेल थी. अब दोनोंको वह मेल खोलनेकी जल्दी हो गई थी. कब एक बार वह मेल खोलती हूं और कब एक बार उस मेल द्वारा आए विवेकके पासवर्डसे उसका मेल अकाऊंट खोलती हूं ऐसा अंजलीको हुवा था. उसने तुरंत डबलक्लीक कर वह मेल खोली.

” यस्स!” उसके मुंहसे विजयी उद्गार निकले.

उसने भेजे स्निफरने अपना काम बराबर किया था.

उसने बिजलीके गतीसे मेल सॉफ्टवेअर ओपन किया और …

” यह उसका मेल आयडी और यह उसका पासवर्ड” बोलते हूए विवेकका मेल ऍड्रेस टाईप कर उस प्रोग्रॅमको विवेकके मेलका पासवर्ड दिया.

अंजलीने उसका मेल अकाऊंट खोलतेही और कुछ की बोर्डकी बटन्स और दो चार माऊस क्लीक्स किए. और दोनो अब कॉम्प्यूटरके मॉनिटरकी तरफ देखने लगी.

” ओ माय गॉड … आय जस्ट कान्ट बिलीव्ह” अंजलीके खुले मुंहसे निकल गया.

शरवरी कभी मॉनिटरकी तरफ तो कभी अंजलीके खुले मुंहकी तरफ असमंजससे देख रही थी.

अंजली अपने ऑफीसमें कुर्सीपर बैठकर कुछ सोच रही थी. उसका चेहरा मायूस दिख रहा था. शायद उसने उसके जिवनमें इतना बडा भूचाल आएगा ऐसा कभी सोचा नही होगा. उसने अपना कॉम्प्यूतर शुरु कर रखा तो था, लेकिन उसे ना चाटींग करनेकी इच्छा हो रही थी ना किसी दोस्तको मेल भेजनेकी. उसने अपनी सारी ऑफीशियल मेल्स चेक की और फिरसे वह सोचने लगी. तभी कॉम्प्यूटरपर बझर बजा. उसने अपनी चेअर घुमाकर कॉम्प्यूटरकी तरफ अपना रुख कीया –

‘ हाय … मिस अंजली’

विवेकका चॅटींगपर मेसेज था.

उसे अहसास हो गया की उसके दिलकी धडकने तेज होने लगी है. लेकिन इसबार धडकने बढनेकी वजह कुछ अलग थी. अंजली सिर्फ उस मेसेजकी तरफ देखती रही. उसे अब क्या किया जाए कुछ सुझ नही रहा था. तभी शरवरी अंदर आ गई. अंजलीने शरवरीको विवेकका मेसेज आया है ऐसा कुछ इशारा किया. शरवरी झटसे बाहर चली गई, मानो पहले उन्होने कुछ तय किया हो. अंजली अबभी उस मेसेजकी तरफ देख रही थी.

‘ अंजली कम ऑन एकनॉलेज यूवर प्रेझेन्स’ विवेकका फिरसे मेसेज आ गया.

‘ यस’ अंजलीने टाईप किया और सेंड बटनपर क्लीक किया.

अंजलीने कॉम्प्यूटर ऑपरेट करते हूए उसके हाथोमें और उंगलियोंमे पहली बार कंपन महसूस किया.

‘ मै अब मेलमें सारी जानकारी भेज रहा हूं ‘ विवेकका मेसेज आ गया.

‘ लेकिन 50 लाख रुपए देनेके बादभी फिरसे तुम ब्लॅकमेल नही करोगे इसकी क्या गॅरंटी. ?’ अंजलीने मेसेज भेजकर उसे बार बार सता रहा सवाल उठाया.

विवेकने उधरसे एक हंसता हूवा छोटासा चेहरा भेजा.

इस बार अंजलीको उस चेहरेके हसनेमें मासूमियतसे जादा कपट दिख रहा था.

‘ देखो … यह दुनिया भरोसेपर चलती है … तुम्हे मुझपर भरोसा करना पडेगा … और तुम्हारे पास मुझपर भरोसा करनेके अलावा और क्या चारा है ?’ उधरसे विवेकका ताना मारता हुवा मेसेज आ गया.

और वहभी सचही तो था … उसके पास उसपर भरोसा करनेके अलावा कोई दुसरा चारा नही था….

अंजली अब उसने भेजे मेसेजको क्या जवाब दिया जाए इसके बारेमें सोचने लगी. तभी अगला मेसेज आ गया –

‘ ओके देन बाय… दिस इज अवर लास्ट कन्व्हरसेशन… टेक केअर… तुम्हारा … और सिर्फ तुम्हारा विवेक…’

अंजली उस मेसेजकी तरफ काफी देरतक देखती रही. बादमें उसे क्या सुझा क्या मालूम, उसने फटाफट कीबोर्डपर कुछ बटन्स दबाए और कुछ माऊस क्लीक्स किए. उसके सामने उसका खुला हुवा मेलबॉक्स अवतरीत हुवा. उसके अपेक्षानुसार और विवेकने जैसा कहा था, उसकी मेल उसके मेलबॉक्समें पहूंच चूकी थी. उसने पलभरकी भी देरी ना करते हूए वह मेल खोली.

मेलमें 50 लाख रुपए कहां, कैसे, और कब पहुचाने है यह सब विस्तारपुर्वक बताया था. साथमें पुलिसके चक्करमें ना पडनेकी हिदायतरुप धमकीभी दी थी. अंजलीने अपनी कलाईपर बंधी घडीकी तरफ देखा. अबभी मेलमें बताए स्थानपर पैसे पहुंचानेमें 4 घंटेका अवधी बाकी था. उसने एक दिर्घ श्वास लेकर धीरेसे छोड दी. वह वैसे कर शायद अपने मनका बोझ हलका करनेकी कोशीश करती होगी. वैसे चार घंटे उसके लिए काफी समय था. और पैसोंका बंदोबस्त भी उसने पहलेसे ही कर रखा था – यहांतक की पैसे सुटकेसमें पॅकभी कर रखे थे. मेलकी तरफ देखते देखते उसके अचानक ध्यानमें आ गया की मेलके साथ कोई अटॅचमेंटभी आई हूई है. उसने वह अटॅचमेंट खोलकर देखी. वह एक JPG फॉरमॅटमें भेजा हुवा एक फोटो था. उसने क्लीक कर वह फोटो खोला.

वह उनके हॉटेलके रुममें दोनो जब एक दिर्घ चुंबन लेते हूए आलिंगनबध्द थे तबका फोटो था.

जॉनी अपनेही धुनमें मस्त मजेमें सिटी बजाते हूए रास्तेपर चल रहा था. तभी उसे पिछेसे किसीने आवाज दिया.

” जॉनी…”

जॉनीने वही रुककर सिटी बजाना रोक दिया. आवाज पहचानका नही लग रहा था इसलिए उसने पिछे मुडकर देखा. एक आदमी जल्दी जल्दी उसीके ओर आ रहा था. जॉनी असमंजससा उस आदमीकी तरफ देखने लगा क्योंकी वह उस आदमीको पहचानता नही था.

फिर उसे अपना नाम कैसे पता चला ?..

जॉनी उलझनमें वहा खडा था. तबतक वह आदमी आकर उसके पास पहूंच गया.

” मै विवेकका दोस्त हूं … मै उसे कलसे ढूंढ रहा हूं … मुझे कॅफेपर काम करनेवाले लडकेने बताया की शायद तुम्हे उसका पता मालूम हो ” वह आदमी बोला.

शायद उस आदमीने जॉनीके मनकी उलझन पढ ली थी.

” नही वैसे वह मुझेतो बताकर नही गया. … लेकिन कल मै उसके होस्टेलपर गया था… वहां उसका एक दोस्त बता रहा था की वह 10-15 दिनके लिए किसी रिस्तेदारके यहां गया है …” जॉनीने बताया.

” कौनसे रिस्तेदारके यहां ?” उस आदमीने पुछा.

” नही उतना तो मुझे मालूम नही … उसे मैने वैसा पुछाभी था लेकिन वह उसेभी पता नही था … उसे सिर्फ उसकी मेल मिली थी ” जॉनीने जानकारी दी.

अंजली अपने कुर्सीपर बैठी हूई थी और उसके सामने रखे टेबलपर एक बंद ब्रिफकेस रखी हूई थी. उसके सामने शरवरी बैठी हूई थी. उनमें एक अजीबसा सन्नाटा छाया हूवा था. अचानक अंजली उठ खडी हो गई और अपना हाथ धीरेसे उस ब्रिफकेसपर फेरते हूए बोली, ” सब पहेलूसे अगर सोचा जाए तो एकही बात उभरकर सामने आती है ..”

अंजली बोलते हूए रुक गई. लेकीन शरवरीको सुननेकी बेसब्री थी.

” कौनसी ?” शरवरीने पुछा.

” … की हमें उस ब्लॅकमेलरको 50 लाख देनेके अलावा फिलहाल अपने पास कोई चारा नही है … और हम रिस्क भी तो नही ले सकते ”

” हां तुम ठिक कहती हो ” शरवरी शुन्यमें देखते हूए, शायद पुरी घटनापर गौर करते हूए बोली.

अंजलीने वह ब्रिफकेस खोली. ब्रिफकेसमें हजार हजारके बंडल्स ठिकसे एक के उपर एक करके रखे हूए थे. उसने उन नोटोंपर एक नजर दौडाई, फिर ब्रिफकेस बंद कर उठाई और लंबे लंबे कदम भरते हूए वह वहांसे जाने लगी. तभी उसे पिछेसे शरवरीने आवाज दिया –

” अंजली…”

अंजली ब्रेक लगे जैसे रुक गई और शरवरीके तरफ मुडकर देखने लगी.

” अपना खयाल रखना ” शरवरीने अपनी चिंता जताते हूए कहा.

अंजली दो कदम फिरसे अंदर आ गई, शरवरीके पास गई, शरवरीके कंधेपर उसने हाथ रखा औड़ मुडकर फिरसे लंबे लंबे कदम भरते हूए वहांसे चली गई.

घना जंगल. जंगलमें चारो तरफ बढे हूए उंचे उंचे पेढ. और पेढोंके निचे सुखे पत्ते फैले हूए थे. जंगलके पेढोंके बिचसे बने संकरे जगहसे रास्ता ढूंढते हूए एक काली, काले कांच चढाई हूई, कार तेडेमेडे मोड लेते हूए सुखे पत्तोसे गुजरने लगी. उस कारके चलनेके साथही उस सुखे पत्तोका एक अजिब मसलने जैसा आवाज आ रहा था. धीरे धीरे चल रही वह कार उस जंगलसे रास्ता निकालते हूए एक पेढके पास आकर रुकी. उस कारके ड्रायव्हर सिटका काला शिशा धीरे धीरे निचे सरक गया. ड्रायव्हींग सिटपर अंजली काला गॉगल पहनकर बैठी हूई थी. उसने कारका इंजीन बंद किया और बगलके पेढके तनेपर लगे लाल निशानकी तरफ देखा.

उसने यही वह पेढ ऐसा मनही मन पक्का किया होगा…

फिर उसने जंगलमें चारो ओर एक नजर दौडाई. दुर-दुरतक कोई परींदाभी नही दिख रहा था. आसपास किसीकीभी उपस्थिती नही है इसका यकिन होतेही उसने अपने बगलके सिटपर रखी ब्रिफकेस उठाकर पहले अपने गोदीमें ली. ब्रिफकेसपर दो बार अपना हाथ थपथपाकर उसने अपना इरादा पक्का किया होगा. और मानो अपना इरादा डगमगा ना जाए इस डरसे उसने झटसे वह ब्रिफकेस कारके खिडकीसे उस पेढके तरफ फेंक दी. धप्प और साथही सुखे पत्तोंका मसलनेजैसा एक अजिब आवाज आया.

होगया अपना काम तो होगया …

चलो अब अपनी इस मसलेसे छूट्टी होगई…

ऐसा सोचते हूए उसने छुटनेके अहसाससे भरी लंबी आह भरी. लेकिन अगलेही क्षण उसके मनमें एक खयाल आया.

क्या सचमुछ वह इस सारे मसलेसे छूट चूकी थी? …

या वह अपने आपको एक झूटी तसल्ली दे रही थी…

उसने फिरसे चारो तरफ देखा. आसपास कहीभी कोई मानवी हरकत नही दिख रही थी. उसने फिरसे कार स्टार्ट की. और एक मोड लेते हूए कार वहांसे तेज गतिसे चली गई. मानो वहांसे निकल जाना यह उसके लिए इस मसलेसे हमेशाके लिए छूटनेजैसा था.

जैसेही कार वहांसे चली गई, उस सुनसान जागहके एक पेढके उपर, उंचाईपर कुछ हरकत हो गई. उस पेढके उपर उंचाई पर बैठे, हरे पेढके पत्तोके रंगके कपडे पहने हूए एक आदमीने उसी हरे रंगका वायरलेस बोलनेके लिए अपने मुंहके पास लीया.

” सर एव्हरी थींग इज क्लिअर … यू कॅन प्रोसीड” वह वायरलेसपर बोला और फिरसे अपनी पैनी नजर इधर उधर घूमाने लगा. शायद वह, वहांसे चली गई कार कही वापस तो नही आ रही है, या उस कारका पिछा करते हूए वहां और कोई तो नही आयाना, इस बातकी तसल्ली करता होगा.

” सर एव्हती थींग इज क्लिअर… कन्फर्मींग अगेन” वह फिरसे वायरलेसपर बोला.

उस पेढपर बैठे आदमीका इशारा मिलतेही जिस पेढके तनेको लाल निशान लगाया हुवा था, उस पेढके बगलमेंही एक बढा सुखे हूए पत्तोका ढेर था, उसमें कुछ हरकत होगई. कार शुरु होनेका आवाज आया और उस सुखे हूए पत्तोके ढेरको चिरते हूए, उसमेंसे एक कार बाहर आ गई. वह कार धीर धीरे आगे सरकती हूई जहां वह ब्रीफकेस पडी हूई थी वहा गई. कारसे एक काले कपडे पहना हूवा और मुंहपरभी काले कपडे बंधा हूवा एक आदमी बाहर आ गया. उसने अपनी पैनी नजरसे इधर उधर देखा. जहां उसका आदमी पेढपर बैठा हूवा था उधरभी देखा और उसे अंगुठा दिखाकर इशारा किया. बदलेमें उस पेढपर बैठे आदमीनेभी अंगूठा दिखाकर जवाब दिया. शायद सबकुछ कंट्रोलमें होनेका संकेत दिया. उस कारमेंसे उतरे, उस काले कपडे पहने आदमीने आसपास कोई उसे देखतो नही रहा है इसकी तसल्ली करते हूए वह निचे पडी हूई ब्रीफकेस धीरेसे उठाई. ब्रीफकेस उठाकर कारके बोनेटपर रखकर खोलकर देखी. हजार रुपयोंके एकके उपर एक ऐसे रखे हूए बंडल्स देखतेही उसके चेहरेपर काले कपडेके पिछे, एक खुशीकी लहर जरुर दौड गई होगी. और उन नोटोंकी खुशबू उसके नाकसे होते हूए उसके मश्तिश्क तक उसे एक नशा चखाती हूए दौड गई होगी. उसने उसमेंसे एक बंडल उठाकर उंगली फेरकर देखकर फिरसे ब्रिफकेसमें रख दिया. उसने फिरसे ब्रिफकेस बंद की. पेढपर बैठे आदमीको फिरसे अंगुठा दिखाकर सबकुछ ठिक होनेका इशारा किया. वह काला साया वह ब्रिफकेस उठाकर फिरसे अपने कारमें जाकर बैठ गया. कारका दरवाजा बंद हो गया, कार शुरु होगई और धीरे धीरे गति पकडती हूई तेज गतिसे वहांसे अदृष्य होगई. मानो वहांसे जल्द से जल्द निकल जाना उस कारमें बैठे आदमीके लिए उन नोटोंपर जल्द से जल्द कब्जा जमाने जैसा था.

उस दिलको दर्द देनेवाले, नही दिल को पुरी तरह तबाह कर देनेवाले घटनाको घटकर अब लगभग 10-15 दिन हो गए होंगे. उस घटना को जितना हो सके उतना भूलनेकी कोशीश करते हूए अंजली अब पहले जैसे अपने काममें व्यस्त हो गई थी. या यू कहिए उन घटनासे होनेवाले दर्दसे बचनेके लिए उसने खुदको पुरी तरह अपने काममें व्यस्त कर लिया था. उसी बिच अंजलीको आयटी क्षेत्रमें भूषणाह समझे जाने वाला ‘आय टी वुमन ऑफ द ईअर’ अवार्ड मिला. उस अवार्डकी वजहसे उसके यहां प्रेसवालोंका तांता लगने लगा था. उस भिडकी अब अंजलीकोभी जरुरत महसूस होने लगी थी. क्योंकी उस तरहसे वह अपने अकेलेपनसे और कटू यादोंसे बच सकती थी. पिछले चारपांच दिनसे लगभग रोजही कभी न्यूजपेपरमें तो कभी टिव्हीपर उसके इंटरव्हू आ रहे थे.

अंजली ऑफीसमें बैठी हूई थी. शरवरी उसके बगलमेंही बैठकर उसके कॉम्प्यूटरपर काम कर रही थी. उस बुरे अनुभवके बाद अंजलीका चॅटींग और दोस्तोंको मेल भेजना एकदमही कम हुवा था. खाली समयमें वह यूंही बैठकर शुन्यमें ताकते हुए सोचते बैठती थी. उसके दिमागमें मानो अलग अलग तरहकी विचारोंका सैलाब उठता था. लेकिन वह तुरंत उन विचारोंको अपने दिमागसे झटकती थी. अबभी उसके मनमें विचारोंका सैलाब उमड पडा था. उसने तुरंत अपने दिमागमें चल रहे विचार झटकर अपने मनको दुसरे किसी चिजमे व्यस्त करनेके लिए टेबलका ड्रावर खोला. ड्रॉवरमें उसे उसने संभालकर रखे हूए न्यूजपेपरके कुछ कटींग्ज दिखाई दिए. ‘ आय टी वुमन ऑफ द इअर – अंजली अंजुळकर’ न्यूज पेपरके एक कटींगपर हेडलाईन थी. उसने वह कटींग बाहर निकालकर टेबलपर फैलाया और वह फिरसे वह समाचार पढने लगी.

यह समाचार पढनेके लिए अब इस वक्त मेरे पिताजी होने चाहिए थे….

उसके जहनमें एक विचार आकर गया.

उन्हे कितना गर्व महसूस हुवा होता… अपनी बेटीका …

लेकिन भाग्यके आगे किसका कुछ चला है? …

अब देखोना अभी अभी आया हुवा विवेकका ताजा अनुभव …

वह सोच रही थी तभी कॉम्प्यूटरका बझर बजा.

काफी दिनोंसे चॅटींग और मेलींग कम करनेके बाद ज्यादातर उसे किसीका मेसेज नही आता था ….

फिर यह आज किसका मेसेज होगा …

कोई हितचिंतक?…

या कोई हितशत्रू…

आजकल कैसे हर बातमें उसे दोनो पहेलू दिखते थे – एक अच्छा और एक बुरा. ठेस पहूंचनेपर आदमी कैसे संभल जाता है और हर कदम सोच समझकर बढाता है.

अंजलीने पलटकर मॉनीटरकी तरफ देखा.

” विवेकका मेसेज है …” कॉम्प्यूटरपर बैठी शरवरी अंजलीकी तरफ देखकर सहमकर बोली. शरवरीके चेहरेपर डर और आश्चर्य साफ नजर आ रहा था. वह भावनाए अब अंजलीके चेहरेपरभी दिख रही थी. अंजली तुरंत उठकर शरवरीके पास गई. शरवरी अंजलीको कॉम्प्यूटरके सामने बैठनेके लिए जगह देकर वहांसे उठकर बगलमें खडी हो गई. अंजलीने कॉम्प्यूटरपर बैठनेके पहले शरवरीको कुछ इशारा किया वैसे शरवरी तुरंत दरवाजेके पास जाकर जल्दी जल्दी कॅबिनसे बाहर निकल गई.

” मिस. अंजली … हाय … कैसी हो ?” विवेकका उधरसे आया मेसेज अंजलीने पढा.

एक पल उसने कुछ सोचा और वह भी चॅटींगका मेसेज टाईप करने लगी –

” ठीक है … ” उसने मेसेज टाईप किया और सेंड बटनपर क्लीक करते हूए उसे भेज दिया.

” तुम्हे फिरसे तकलिफ देते हूए मुझे बुरा लग रहा है … लेकिन क्या करे? … पैसा यह साली चिजही वैसी है … कितनेभी संभलकर इस्तमाल करो तो भी खतम हो जाती है …” उधरसे विवेकका मेसेज आ गया.

अंजलीको शक थाही की कभी ना कभी वह और पैसे मांगेगा …

” मुझे इस बार 20 लाख रुपएकी सख्त जरुरत है …” उधरसे विवेकका मेसेज आ गया.

” अभी तो तुम्हे 50 लाख रुपए दिए थे … अब मेरे पास पैसे नही है …” अंजलीने झटसे टाईप करते हूए मेसेज भेज भी दिया.

मेसेज टाईप करते हूए उसके दिमागमें औरभी काफी विचारोंका चक्र चल रहा था.

” बस यह आखरी बार … क्योंकी यह पैसे लेकर मै परदेस जानेकी सोच रहा हूं ” उधरसे विवेकका मेसेज आया.

” तुम परदेस जावो … या और कही जावो … मुझे उससे कुछ लेना देना नही है … देखो … मेरे पास कोई पैसोका पेढ तो नही है … ” अंजलीने मेसेज भेजा.

” ठिक है … तुम्हे अब मुझे कमसे कम 10 लाख रुपए तो भी देने पडेंगे … पैसे कब कहा और कैसे पहूंचाने है वह मै तुम्हे मेल कर सब बता दुंगा …” उधरसे मेसेज आया.

अंजली कुछ टाईप कर उसे भेजनेसे पहलेही विवेकका चॅटींग सेशन बंद हो गया था. अंजली एकटक उसके सामने रखे कॉम्प्यूटरके मॉनिटरकी तरफ देखने लगी. वह देखतो मॉनिटरके तरफ थी लेकिन उसके दिमागमें विचारोंका तांता लग गया था. लेकिन फिरसे उसके दिमागमें क्या आया क्या मालूम?, वह झटसे उठकर खडी हो गई और लंबे लंबे कदम भरते हूए कॅबिनसे बाहर निकल गई.

‘इथीकल हॅकींग कॉम्पीटीशन – ऑर्गनायझर – नेट सेक्यूरा’ ऐसा एक बॅनर बडे अक्षरोंमें स्टेजपर लगाया गया था. आज कॉम्पीटीशन का आखरी दिन था और जितनेवालोंके नाम घोषीत किए जाने थे. पारीतोषीक वितरणके लिए प्रमुख अतिथीके तौर पर अंजलीको बुलाया गया था. स्टेजपर उस बॅनरके बगलमें अंजली प्रमुख अतिथी के लिए आरक्षित कुर्सीपर बैठी हुई थी. और उसके बगलमें एक अधेड उम्र आदमी, भाटीयाजी बैठे थे. वे ‘नेट सेक्यूरा’ के हेड थे. तभी स्टेजके पिछेसे ऍन्कर सामने माईकके पास जाकर बोलने लगा,

” गुड मॉर्निंग लेडीज ऍंड जन्टलमन… जैसे की आप सब लोग जानते हो की हमारी कंपनी ” नेट सेक्यूराका यह सिल्वर जूबिली साल है और उसी सिलसिले में हमने ‘इथीकल हॅकींग’ इस प्रतियोगीता का आयोजन किया था … आज हम उस प्रतियोगीताके आखरी दौरसे यानीकी पारितोषीक वितरणके दौरसे गुजरने वाले है … इस पारितोषीक वितरण के लिए हमने एक खास मेहमान को यहां आमंत्रित किया है … जिन्हे हालहीमें ‘आय टी वूमन ऑफ द ईयर’ सम्मान देकर गौरवान्वीत किया गया है … ”

हॉलमें बैठे सब लोगोंकी नजरे स्टेजपर बैठे अंजलीपर टीक गई थी. अंजलीनेभी एक मंद स्मित बिखेरते हूए हॉलमें बैठे लोगोंपर एक नजर दौडाई.

” और उन खास मेहमानका नाम है … मिस अंजली अंजुळकर …. उनके स्वागतके लिए मै स्टेजपर हमारे एक्सीक्यूटीव मॅनेजर श्रीमती नगमा शेख इन्हे आमंत्रित करता हूं …”

श्रीमती नगमा शेखने स्टेजपर आकर फुलोंका गुलदस्ता देकर अंजलीका स्वागत किया. अंजलीनेभी खडे होकर उस गुलदस्तेका बडे विनयके साथ अभिवादन करते हूए स्विकार किया. हॉलमें तालीयां गुंज उठी. मानो एक पलमें वहां उपस्थित लोगोंके शरीमें उत्साह प्रवेश कर गया हो. तालीयोंकी आवाज थमतेही ऍन्कर आगे बोलने लगा –

” अब मै स्टेजपर उपस्थित हमारे मॅनेजींग डायरेक्टर श्री. भाटीयाजीके स्वागतके लिए हमारे मार्केटींग मॅनेजर श्री. सॅम्यूअल रेक्सजीको यहां आमंत्रित करता हूं …”

श्री. सॅम्यूअल रेक्सने स्टेजपर जाकर भाटीयाजीका एक गुलदस्ता देकर स्वागत किया. हॉलमें फिरसे तालियां गुंज उठी.

” अब भाटीयाजींको मै बिनती करता हूं की वे यहां आकर दो शब्द बोलें ” ऍन्करने माईकपर कहां और वह भाटीयाजींकी माईकके पास आनेकी राह देखते हूए खडा रहा.

भाटीयाजी खुर्चीसे उठकर खडे हो गए. उन्होने एक बार अंजलीकी तरफ देखा. दोनों एक दुसरेकी तरफ देखकर मुस्कुराए. और अपना मोटा शरीर संभालते हूए धीरे धीरे चलते हूए भाटीयाजी माईकके पास आकर पहूंच गए.

” आज इथीकल हॅकींग इस स्पर्धाके लिए आमंत्रित की गई … जी.एच इन्फॉर्मॆटीक्स इस कंपनीकी मॅनेजींग डायरेक्टर और आय टी वूमन ऑफ दिस इयर मिस अंजली अंजुळकर, यहां उपस्थित मेरे कंपनीके सिनीयर आणि जुनियर स्टाफ मेंबर्स, इस स्पर्धामें शामिल हूए देशके कोने कोनेसे आए उत्साही युवक आणि युवतीयां, और इस स्पर्धाका नतिजा जाननेके लिए उत्सुक लेडीज ऍन्ड जन्टलमन… सच कहूं तो … यह एक स्पर्धा है इसलिए नही तो हर एक के जिंदगी की हर एक बात एक स्पर्धाही होती है … लेकिन स्पर्धा हमेशा खिलाडू वृत्तीसे खेली जानी चाहिए .. अब देखो ना … यह इतना बडा अपने कंपनीके स्टाफका समुदाय देखकर मुझे एक पुरानी बात याद आ गई … की 1984 में हमने यह कंपनी शुरु की थी…. तब इस कंपनीके स्टाफकी गिनती सिर्फ 3 थी … मै और, और दो सॉफ्टवेअर इंजिनिअर्स… और तबसे हमने हर दिन लढते झगडते …. हर दिनको एक स्पर्धा एक कॉंपीटीशन समझते हूए हम आज इस स्थितीमें पहूंच गए है….. मुझे यह बताते हूए खुशी और अभिमान होता है की आज अपने कंपनीने इस देशमेंही नही तो विदेशमेंभी अपना झंडा फहराया है और आज अपने स्टाफकी गिनती .. 30000 के उपर पहूंच चूकी है …”

हॉलमें फिरसे एकबार लोगोंने तालियां बजाते हूए हॉल सर पर उठा लिया. तालीयां थमनेके बाद भाटीयाजी फिरसे आगे बोलने लगे. लेकिन स्टेजपर बैठी अंजली उनका भाषण सुनते हूए कब अपने खयालोंमे डूब गई उसे पताही नही चला …

अंजली और शरवरी कॉफी हाऊसमें एकदुसरेके सामने बैठे थे और दोनो अपने अपने सोच मे डूबी धीरे धीरे कॉफीकी चुस्कीयां ले रही थी. उनमें एक अजिबसा सन्नाटा फैला हुवा था. आखिर अंजलीने उस सन्नाटेको भंग किया –

” बराबर 2 दिन हो गए है … उसकी अगली मेल अभीतक कैसे नही आई ? ”

” शायद उसे शक हुवा होगा ” शरवरीने कहा.

” ऐसाही लगता है … ” अंजली आह भरती हुई बोली.

” मुझे लग रहा था की इस बार हम उसे पकडनेमें जरुर कामयाब होंगे … लेकिन अब मुझे चिंता होने लगी है की हम उसे कभी पकडनेमें कामयाबभी होंगे की नही ” अंजलीने कहा.

” और हा उसे शक होना भी उतनाही खतरनाक है .. उसने सारे फोटो अगर इंटरनेटपर डाले तो सारा ही खेल बिगड जाएगा … और बदनामीभी होगी वह अलग ” शरवरीने कहा.

अंजलीने अपने सोचमें डूबे हूए हालतमें सिर्फ सर हिलाया.

” एकही झटकेमें उसे पकडना जरुरी है … नही तो अपना प्लान पुरा फेल हो जाएगा ” अंजलीने कहा ….

…. हॉलमें चल रहे तालीयोंकी गुंजसे अंजली अपने सोचके विश्वसे बाहर आ गई. उसने चारो तरफ अपनी नजरे दौडाई. भाटीयाजींका स्पीच खत्म हो चुका था और वे उसके बगलकेही सिटपर वापस आ रहे थे. वह उनके तरफ देखकर मुस्कुराई, मानो उनके स्पिचकी सराहना कर रही हो. उधर ऍन्कर फिरसे माईकके पास गया था और उसने ऐलान किया – ” अब मै पारितोषीक वितरणके लिए जी. एच. इन्फॉरमेटीक्सकी मॅनेजींग डायरेक्टर … दि आय. टी वुमन ऑफ दिस इयर… मिस. अंजली अंजुळकर … उन्हे आमंत्रित करता हूं …”

अंजली उठ खडी होगई और माइकके पास चली गई. फिरसे हॉल तालीयोंसे गुंज उठा.

” तो अब हम पारितोषीक वितरणके लिए आगे बढते है … ” एन्करने माइकपर जाहिर किया.

”… जैसे आप लोग जानते हो … इस प्रतियोगिता को जब जाहिर किया गया तब हमे इसमें भाग लेनेके लिए इच्छूक लोगोंका बहुत प्रतिसाद मिला… देशभरसे लगभग तिन हजार लोगोंके अप्लीकेशन फॉर्मस हमें मिले …. पहले छाननीमें हमनें उसमेंसे सिर्फ 50 अप्लीकेशन्स चूने … और अब फायनलमें जो चुने है वे है सिर्फ तिन … लेकिन उन तिन लोगोंके नाम जाननेके पहले हमें थाडा रुकना पडेगा. क्योंकी पहले हम कुछ लोगोंको कुछ प्रोत्साहनपर प्राईजेस देने वाले है ….”

प्रोत्साहनपर प्राइजेस देनेमें जादा समय न बिताते हूए ऍन्कर एक एकको स्टेजपर बुला रहा था और अंजली उनको प्राईज देकर उनको शाबासकी देकर उनकी वहांसे रवानगी कर रही थी. प्रोत्साहनपर प्राईजेस खत्म हूए वैसे लोगोंमे फिरसें उत्साह बढता हूवा दिखने लगा.

” अब जिन तिनोंके नाम जाननेके लिए हम उत्सुक है वह वक्त आ चुका है … सबसे पहले मै तिसरा प्राईज जिसे मिला उस प्रतियोगीका नाम जाहिर करने वाला हूं … ” एन्करने सब लोगोंकी जिज्ञासा और बढाते हूए एक बडा पॉज लिया , ” तिसरा प्राईज है 1 लाख रुपये कॅश और मोमेंटो… तो थर्ड प्राईज… मि. अमोल राठोड फ्रॉम जयपूर… प्लीज कम ऑन द स्टेज… ”

हॉलमें तालियां गुंजने लगी. एक पतलासा सावला 20 -22 जिसकी उम्र होगी ऐसा एक लडका सामनेके दसमेंसे एक कतारमेंसे खडा होकर स्टेजकी तरफ जाने लगा. उस प्रतियोगीकी तरफ देखकर किसे लगेगा नही की उसे तिसरा प्राईज मिल सकता है … लेकिन उसके चलनेमें एक जबरदस्त आत्मविश्वास झलक रहा था. अमोल राठोड स्टेजपर आया. जिस आत्मविश्वाससे वह चला था उसी आत्मविश्वासके साथ उसने पुरस्कारका स्विकार किया और अंजलीसे हस्तांदोलन किया. हॉलमें मेडीयाकी भी काफी उपस्थिती थी. पुरस्कार स्विकार करते वक्त बिजली चमकें ऐसे फोटोंकें फ्लॅश दोनोंके उपर चमक रहे थे.

फिरसे हॉलमें मानो जोरसे बारिश हो ऐसे लोगोंने तालियां बजाई. अमोल राठोड स्टेजसे उतरकर फिरसे अपने कुर्सीकी तरफ जाने लगा वैसे ऍन्कर दुसरा प्राईज जिसे मिला उसके नामका ऐलान करनेके लिए सामने आया,

” दुसरा पारितोषीक है 1.5 लाख रुपये कॅश और मोमेंटो… तो थर्ड प्राईज गोज टू… मिस. अनघा देशपांडे फ्रॉम पुणे … प्लीज कम ऑन द स्टेज… ”

हॉलमें फिरसे तालियां बजने लगी. एक गोरी उंची पतली नाजूकसी लगभग 20-21 सालकी युवती स्टेजपर आने लगी. अंजली शायद वह खुदभी एक स्त्री होनेसे उस लडकीकी तरफ आंखे भरकर देख रही थी. अनघा स्टेजपर अंजलीके पास आ गई. पुरस्कार देकर अंजलीने उसे गले लगा लिया. फिरसे कॅमेरेके फ्लॅश जैसे बिजली चमके ऐसे चमकने लगे.

अनघा जैसेही स्टेजसे निचे उतरकर अपने जगहपर वापस आगई ऍन्करने फिरसे माईकपर कब्जा कर लिया था ,

” अब आखिरमें हम जिस पलकी इतनी बेसब्रीसे राह देख रहे है वह पल एकदम नजदिक आ पहूंचा है … पहला पुरस्कार ऐलान करनेका पल … इन फॅक्ट मै अपने आपको बडा भाग्यशाली समझता हूं की पहला पुरस्कार किसको जानेवाला है यह ऐलान करनेका सौभाग्य मुझे मिल रहा है … क्योंकी वह प्रतिस्पर्धी सारे भारतमें एक अव्वल प्रतिस्पर्धी रहनेवाला है … तो पहले देखते है की वह प्रथम पुरस्कार क्या है … प्रथम पुरस्कार है 3 लाख रुपए कॅश, मोमेंटो ऍन्ड अ जॉब ऑफर इन नेट सेक्यूरा… ”

सब लोग शांत होकर सुन रहे थे. मानो उस पलके लिए उन्होने अपनी सांसे रोककर रखी थी. बहुत लोग अपनी गर्दन उंची कर सामने देखने की कोशीश कर रहे थे. हॉलमें सब तरफ पिनड्रॉप सायलेन्स था ….

” फर्स्ट प्राईज गोज टू … द वन ऍन्ड ओन्ली वन… मि. अतूल बिश्वास फ्रॉम चेन्नई …”

दुसरी कतार विचलित हूई दिखी, क्योंकी दुसरी कतारसे कोई उठा था. सब लोगों के सर उस दिशामें मुड गए. इसबार हॉलमें सबसे बडा और सबसे दिर्घ तालियोंका आवाज हुवा. सचमुछ उसका यश उसके नामके अनुरुप ‘अतूल’ यानी की अतूलनिय था. वह उठकर लगभग दौडते हूए ही स्टेजपर चला गया, इससे उसका अपूर्व उत्साह और आत्मविश्वास दिख रहा था. गोरा, उंचा, स्मार्ट, कसा हूवा शरीर ऐसा वह सशक्त यूवक था. अंजलीने अपनी दिशामें आते उस पहले पुरस्कारके हकदारकी तरफ देखा. उसके चेहरेपर एक तेज चमक रहा था. आंखे निली और चमकीली थी. उसकी आखोंमे देखकर पलभरके लिए अंजलीको विवेककी याद आ गई. लेकिन अपने विचारोंको दिमागसे झटककर वह आगे गई. वह अंजलीके सामने आकर खडा होगया और उसने लोगोंकी तरफ मुडकर उनको अभिवादन किया. पहलेका तालियोंका आवाज जो अब भी बरकरार था वह और बढ गया. लोगों को अभिवादन कर उसने अंजलीकी तरफ देखा और उसकी नजर अंजलीपर से हटनेका नाम नही ले रही थी, मानो वह उसके मदहोश करनेवाली आंखोमें अटकसा गया था. तालियोंकी गुंज अब भी चल रही थी. लेकिन अचानक एक अजिब घटना घटी, अंजलीने जितने जोरसे हो सकता है उतनी जोरसे उसके गालपर एक चाटा जड दिया था. तब कहा वो होशमें आगया. हॉलमें चल रहा तालियोंका आवाज एकदमसे बंद होगया, मानो किसीने स्विच ऑफ किया हो. उसने और वहां उपस्थित किसीनेभी सोचा नही होगा वैसी अजिब वह घटना थी. हां अंजलीने उसके गालपर एक जोरका चाटा जमा दिया था. उसका ही क्यों सारे उपस्थित लोगोंका इस बातपर यकिन नही हो रहा था. हॉलमें एकदम श्मशानवत चुप्पी फैल गई.. एकदम पिनड्रॉप सायलेन्स.

” यस आय स्लॅप्ड हिम… ऍन्ड ही डीजर्व इट… क्योंकी वह एक क्रॅकर है … सिर्फ क्रॅकरही नही तो ही इज आल्सो अ ब्लॅकमेलर…” हॉलमें चुप्पीका भंग हुवा वह अंजलीके इन शब्दोनें .

अंजली लगातार बोल रही थी. उसकी आंखोमें आग थी. गुस्सेसे अंजलीका पुरा शरीर कांप रहा था. तभी इन्स्पेक्टर कंवलजीत, जो पहलेसे ही तैयार थे, वे डायसपर दो कॉन्स्टेबलके साथ आ गए. उन्होने प्रथम अतूलकी कॉलर पकडकर दो तिन तमाचे उसके कानके निचे जड दिए.

” इन्स्पेक्टर ” अतूल गुर्राया.

उसके मासूम, स्मार्ट चेहरेने अब उग्र रुप धारण किया था. उसे जडाए हुए तमाचोंकी वजहसे लाल हुवा उसका चेहरा औरही भयानक लग रहा था. इन्स्पेक्टरने जादा वक्त ना दौडाते हूए उसे हथकडीयां पहनाकर अरेस्ट किया और वे गुस्सेसे चिल्लाए, ” टेक दिस बास्टर्ड अवे…”

कॉन्स्टेबल उसे लेकर, लगभग खिंचते हूएही वहांसे चले गए. उसका मद और नशा अबभी उतरा हुवा नही दिखाई दे रहा था. वह वहांसे जाते हूए कभी गुस्सेसे इन्स्पेक्टरकी तरफ तो कभी अंजलीकी तरफ देख रहा था.

” याद रखो मुझे अरेस्ट करना तुम्हे बहुत महंगा पडनेवाला है ” जाते जाते वह चिल्लाया.

कॉन्स्टेबल जब अतूलको वहांसे ले गया और अतूल सब लोगोंके नजरोंसे ओझल हुवा तब कहां इतनी देरसे हक्काबक्का रहे लोगोंमे खुसुरफुसुर शुरु हो गई. कुछ लोग अबभी डरे, सहमे और सदमे मे थे, तो कुछ लोगोंको यह सब क्या हो रहा है कुछ समझ नही आ रहा था. प्रथम पुरस्कार जिसे मिला उस लडकेको अचानक अंजलीने मारा और इन्स्पेक्टरने डायसपर आकर उसे गिरफ्तार किया. सबकुछ कैसे लोगोंके समझके बाहर था. लोगोंमें चलरही खुसुफुसुर देखकर इन्स्पेक्टरने ताड लिया की लोगोंको पुरी केस और उसकी गंभिरता समझाना जरुरी है, नही तो लोग और गडबडी मचा सकते है. क्योंकी अतूल जो कुछ पल पहलेही सबलोगों का हिरो था उसे अंजलीने अगलेही पल उसे व्हिलन करार दिया था. लोगोंको वह सच्चा या अंजली सच्ची यह जाननेकी उत्कंठा होनाभी लाजमी था.

” शांत हो जाईए … शांत हो जाईए प्लीज…” इन्स्पेक्टर हात उपर कर, जो कुछ लोग उठ खडे हूए थे उन्हे बिठाते हूए बोले, ” कोई डरनेकी या घबरानेकी कोई जरुरत नही… दिस इज अ केस ऑफ ब्लॅकमेलींग ऍन्ड सायबर क्राईम… मैने खुद इस केसपर काम किया है … और इस केसका गुनाहगारके तौरपर अभी अभी आपके सामने अतूल सरकारको पकडा गया है …”

फिरभी लोग शांत होनेके लिए तैयार नही थे, तब ऍन्करने फिरसे माईकका कब्जा लिया, ” दोस्तो शांत हो जाईए .. प्लीज शांत हो जाईए .. हमारी प्रतिस्पर्धाभी इथीकल हॅकींग … यानीकी हॅकिंगके बारेमेही थी… और इन्स्पेक्टरने अभी आप लोगोंके सामने हॅन्डल की केसभी हॅकींग और क्रॅकींगके बारेमेंही थी .. इसलिए इन्स्पेक्टर साहेबको मेरी बिनती है की वे इस केसके बारेमें… उन्होने यह केस कैसे हॅन्डल की… यह केस हॅन्डल करते वक्त कीन कीन चुनौतीयोंका सामना उन्हे करना पडा… और आखिर वह गुनाहगारतक कैसे पहूंचे … यह सब यहां इकठ्ठा हूए लोगोंको विस्तारसे बतायें …”

अब कहा लोग फिरसे शांत हो चुके थे. यह केस क्या है? … और इन्स्पेक्टरने उसे कैसे हॅन्डल किया.. यह जाननेकी लोगोंमें उत्सुकता दिखने लगी. एन्करने एकबार फिरसे इन्स्पेक्टरकी तरफ देखा और उन्हे आगे आकर पुरी कहानी बयां करनेकी बिनती की. इन्स्पेक्टरने अंजलीकी तरफ देखा. अंजलीने आखोंसेही इजाजत दे दी. इन्स्पेक्टर सामने आये और उन्होने माईक ऍन्करसे अपने पास ले लिया .

इन्स्पेक्टर कहानी कथन करने लगे –

” सायबर क्राईम यह अब भारतमें नया नही रहा है … आजकल पुरे देशमें लगभर रोज कुछना कुछ सायबर क्राईमकी घटनाएं घटीत होती रहती है …. लेकिन तहकिकात करते वक्त मुझे हमेशा इस बातका अहसास होता है की लोगोंकी सायबर क्राइमके बारेंमे बहूत गलतफहमीयां है … जितनी उनकी सायबर क्राईमके बारेमें गलतफहमीयां है उतनाही उनका अपने देशके पुलिस डिपार्टमेंटपर भरोसा उडा हूवा दिखाई देता है … उन्हे हमेशा आशंका लगी रहती है की यह टोपी और डंडे लेकर घुमनेवाले पुलिस यह इतना ऍडव्हान्स… यह इतना टेक्नीकल क्राईम कैसे हॅन्डल कर सकते है? … उन्हे सायबर क्राईमके बारेमें अपना पुलिस डिपार्टमेंट कितना सक्षम है इसके बारेमें आशंकाए लगी रहती है. … लेकिन अब अभी अभी मैने हॅन्डल किए केसके जरीए मै लोगोंको यकिन दिलाना चाहता हूं की … सायबर क्राईमके बारेमें अपना पोलीस डीपार्टमेंट सिर्फ सक्षमही नही तो पुरी तरहसे तैयार है … इस तरह का या और किसी तरहका गुनाह होनेके बाद जिस कार्यक्षमतासे हम दुसरे गुनाहगारोंको तुरंत पकड सकते है उसी कार्यक्षमतासे हम सायबर क्रिमीनल्सको भी पकड सकते है…. लेकिन फिर भी कुछ चिजोंके बारेंमे हम गुनाह हॅन्डल करते वक्त कम पडते है … खासकर जब उस गुनाहको दुसरे किसी देशके जमिन से अंजाम दिया जाता है तब… उस केसमें वह गुनाहगार किसी दुसरे देशके कानुनके कार्यक्षेत्रमें आता है … और फिर वह देश हमें उस गुनाहके बारेमें उस गुनाहगारको पकडनेके लिए कितना सहकार्य करते है इसपर सब निर्भर करता है…. सायबर गुनाहके बारेमें और एक महत्वपुर्ण बात… इसमें इंटरनेट इस्तेमाल करनेवाले लोगोंको कुछ चिजोंमे बहुतही जागरुक होना आवश्यक होता है .. जैसे किसीको, उस सामनेके पार्टीकी पुरी जानकारी रहे बिना खुदकी जानकारी … … पासवर्ड .. फोन … मोबाईल देना बहुतही खतरनाक होता है … वैसे अनसेफ, अनप्रोटेक्टेड, अनसेक्यूअर कनेक्शनपर फायनांसीयल ट्रान्झेक्शन करना … अपने खुदके प्रायव्हेट फोटो इंटरनेटपर भेजना … इत्यादी… यहभी खतरेसे खाली नही है… अब मै यह जो केस विस्तारपुर्वक बतानेवाला हूं … इससे आपको किस तरह जागरुक रहना पडेगा इसका अंदाजा आ जाएगा …”

इतनी प्रस्तावना देकर इन्स्पेक्टर अतूलके केसके बारेंमे बताने लगे …

एक रुममें अतूल और अलेक्स रहते थे. रुमके स्थितीसे यह जान पडता था की उन्होने रुम किराएसे ली होगी. कमरे में एक कोने में बैठकर अतूल अपने कॉम्प्यूटरपर बैठकर चॅटींग कर रहा था और कमरेके बिचोबिच अलेक्स डीप्स मारता हूवा एक्सरसाईज कर रहा था. अतूल अपने कॉम्प्यूटरपर दिख रहे चॅटींग विंडोमें धीरे धीरे उपर खिसक रहे चॅटींग मेसेजेस एक एक करके पढ रहा था. शायद वह चाटींगके लिए कोई अच्छा साथीदार ढूंढ रहा होगा. जबसे उसे चॅटींगका अविश्कार हूवा तब से ही उसे यह बहुत पसंद आया था. पहले खाली वक्तमें वक्त बितानेका गप्पे मारना इससे कारगर कोई तरीका नही होगा ऐसी उसकी सोच थी. लेकिन अब जबसे उसे चॅटींगका अविश्कार हुवा उसकी सोच पुरी तरह बदल गई थी. चॅटींगकी वजहसे आदमीको मिले बिना गप्पे मारना अब संभव होगया था. कुछ जान पहचानवाले तो कुछ अजनबी लोगोंसे चॅट करने में उसे बडा मजा आने लगा था. अजनबी लोगोंसे आमने सामने मिलने के बाद कैसे उन्हे पहले अपने कंफर्टेबल झोन में लाना पडता है और उसके बाद ही बातचित आगे बढ सकती है. और उसके लिए सामनेवाला कैसा है इसपर सब निर्भर करता है और उसको कंफर्टेबल झोन में लाने के लिए कभी एक घंटा तो कभी कई सारे दिनभी लग सकते है. चॅटींगपर वैसा नही होता है. कोई पहचान का हो या अजनबी बिनदास्त मेसेज भेज दो. सामनेवाले ने एंटरटेन किया तो ठीक नही तो दुसरा कोई साथी ढूंढो. अपने पास सारे विकल्प होते है. कुछ न समझनेवाले तो कुछ गाली गलोच वाले कुछ संवाद उसे चॅटींग विंडोमें उपर उपर खिसकते हूए दिखाई दे रहे थे.

तभी उसे बाकी मेसेजसे कुछ अलग मेसेज दिखा ,

” अच्छा तुम क्या करती हो? … मेरा मतलब पढाई या जॉब?”

किसी विवेक का मेसेज था.

वह उसका असली नामभी हो सकता था या नकली …

” मैने बी. ई. कॉम्प्यूटर किया हूवा है … और जी. एच. इन्फॉरमॅटीक्स इस खुदके कंपनीकी मै फिलहाल मॅनेजींग डायरेक्टर हूं ” विवेकके मेसेजके रिस्पॉन्सके तौरपर यह मेसेज अवतरीत हूवा था.

भेजनेवाले का नाम अंजली था.

अचानक मेसेज पढते हूए अतूलके दिमागमें एक विचार कौंधा.

इस मेसेजसे क्या मै कुछ फायदा ले सकता हूं ?…

वह मनही मन सोचकर सारी संभावनाए टटोल रहा था. सोचते हूए अचानक उसके दिमागमें एक आयडीया आ गया.

वह झटसे अलेक्सकी तरफ मुडते हूए बोला, ” अलेक्स जल्दीसे इधर आ जाओ ”

उसका चेहरा एक तरहकी चमकसे दमक रहा था.

अलेक्स एक्सरसाईज करते हूए रुक गया और कुछ इंटरेस्ट ना दिखाते हूए धीमे धीमे उसके पास आकर बोला, ” क्या है ?… अब मुझे ठिकसे एक्सरसाईज भी नही करने देगा ?”

” अरे इधर मॉनिटरपर तो देखो … एक सोनेका अंडा देनेवाली मुर्गी हमें मिल सकती है ..” अतूल फिरसे उसका इंटरेस्ट जागृत करनेका प्रयास करते हूए बोला.

अब कहा अलेक्स थोडा इंटरेस्ट लेकर मॉनिटरकी तरफ देखने लगा.

तभी चॅटींग विंडोमें अवतरीत हूवा और उपर खिसक रहा विवेकका और एक मेसेज उन्हे दिखाई दिया,

“” अरे बापरे!.. ” तुम्हे तुम्हारे उम्रके बारेमें पुछा तो गुस्सा तो नही आएगा ?… नही … मतलब मैने कही पढा है की लडकियोंको उनके उम्रके बारेमें पुछना अच्छा नही लगता है. … ”

उसके बाद तुरंत अंजलीने भेजा हूवा रिस्पॉन्सभी अवतरीत हूवा –

” 23 साल”

” देख तो यह हंस और हंसिनी का जोडा… यह हंसीनी एक सॉफ्टवेअर कंपनीकी मालिक है … मतलब मल्टी मिलीयन डॉलर्स…” अतूल अपने चेहरेपर आए लालचभरे भाव छूपानेका प्रयास करते हूए बोला.

तेभी फिरसे चॅटींग विंडोमें विवेकका मेसेज अवतररीत हूवा,

” अरे यह तो मुझे पताही था… मैने तुम्हारे मेल आयडीसे मालूम किया था…. सच कहूं ? तूमने जब बताया की तूम मॅनेजींग डायरेक्टर हो … तो मेरे सामने एक 45-50 सालके वयस्क औरतकी तस्वीर आ गई थी… ”

अलेक्सने उन दोनोंके उस विंडोमें दिख रहे सारे मेसेजेस पढ लिए और पुछा, ” लेकिन हमें क्या करना पडेगा ?”

” क्या करना है यह सब तुम मुझपर छोड दो … सिर्फ मुझे तुम्हारा साथ चाहिए ” अतूल अपना हाथ आगे बढाते हूवा बोला.

” कितने पैसे मिलेगे ?” अलेक्सने असली बातपर आते हूए सवाल पुछा.

” अरे लाखो करोडो में खेल सकते है हम ” अतूल अलेक्सका लालच जागृत करनेका प्रयास करते हूए बोला.

” लाखो करोडो?” अलेक्स अतूलका हाथ अपने हाथमे लेते हूए बोला, ” तो फिर मै तो अपनी जानभी देनेके लिए तैयार हूं ”

तभी फिरसे चॅटींग विंडोमें अंजलीका मेसेज अवतरीत हूवा , ” तूमने तुम्हारी उम्र नही बताई ?…”

उसके पिछेही विवेकका जवाब चॅटींग विंडोमें अवतरीत हूवा, ” मैने मेरे मेल ऍड्रेसकी जानकारीमें … मेरी असली उम्र डाली हूई है …”

” 23 साल… बहूत नाजुक उम्र होती है … मछली प्यारके जालमें फसकर कुछभी कर सकती है ” अतूल अजिब तरहसे मुस्कुराते हूए बोला.

लगभग आधी रात हो गई थी. अतूलके कमरेका लाईट बंद था. लेकिन फिरभी कमरेमें चारो तरफ धुंधली रोशनी फैल गई थी- कमरेमें, कोनेमें चल रहे कॉम्प्यूटरके मॉनिटरकी वजहसे. अतूल कॉम्प्यूटरपर कुछ करनेमें बहुत लीन था. उसके आसपास सब तरफ खानेकी, नाश्तेकी प्लेट्स, चायके खाली, आधे भरे हूए कप्स, चिप्स, खाली हो चुके व्हिस्किके ग्लासेस और आधीसे जादा खाली हो चुकी व्हिस्किकी बॉटल दिख रही थी. उसके पिछे कॉटपर हाथपैर फैलाकर अलेक्स सोया हुवा था. उस आधी रातके सन्नाटेमें अतूल तेजीसे कॉम्प्यूटरपर कुछ कर रहा था और उसके किबोर्डके बटन्सका एक अजिब आवाज उस कमरेमें आ रहा था. उधर अतूलके पिछे सो रहे अलेक्सका बेचैनीसे करवटपे करवट बदलना जारी था.

आखिर अपने आपको ना रोक पाकर अलेक्स उठकर बैठते हूए अतूलसे बोला, ” यार तेरा यह क्या चल रहा है? … 8 दिनसे देख रहा हूं … दिनभर किचकिच… रातकोभी किचकिच… कभीतो शांतीसे सोने दे… तेरे इस साले किबोर्डके आवाजसे तो मेरा दिमाग पागल होनेकी नौबत आई है …”

अतूल एकदम शांत और चूप था. कुछभी प्रतिक्रिया ना व्यक्त करते हूए उसका अपना कॉम्प्यूटरपर काम करना जारी था.

”अच्छा तुम क्या कर रहे हो यह तो बताएगा ? … आठ दिनसे तेरा ऐसा कौनसा काम चल रहा है ?… मेरी तो कुछ समझमें नही आ रहा है …” अलेक्स उठकर उसके पास आते हूए बोला.

” विवेक और अंजलीका पासवर्ड ब्रेक कर रहा हूं …. अंजलीका ब्रेक हो चुका है अब विवेकका ब्रेक करनेकी कोशीश कर रहा हूं ” अतूल उसकी तरफ ना देखते हूए कॉम्प्यूटरपर अपना काम वैसाही शुरु रखते हूए बोला. .

” उधर तु पासवर्ड ब्रेक कर रहा है और इधर तेरे इस किबोर्डके किचकीचसे मेरा सर ब्रेक होनेकी नौबत आई है उसका क्या ?” अलेक्स फिरसे बेडपर जाकर सोनेकी कोशीश करते हूए बोला.

किसका पासवर्ड ब्रेक हूवा और किसका ब्रेक होनेका रहा इससे उसे कुछ लेना देना नही था. उसे तो सिर्फ पैसेसे मतलब था. अलेक्सने अपने सरपर चादर ओढ ली, फिरभी आवाज आ ही रहा था, फिर तकिया कानपर रखकर देखा, फिरभी आवाज आ ही रहा था, आखीर उसने तकीया एक कोनेमें फाडा और उसमेंसे थोडी रुई निकालकर अपने दोनो कानोंमे ठूंस दी और फिरसे सोनेकी कोशीश करने लगा.

अब लगभग सुबहके तिन बजे होंगे, फिरभी अतूलका कॉम्प्यूटरपर काम करना जारीही था. उसके पिछे बेडपर पडा हूवा अलेक्स गहरी निंदमें सोया दिख रहा था.

तभी कॉम्प्यूटरपर काम करते करते अतूल खुशीके मारे एकदम उठकर खडा होते हूए चिल्लाया, ” यस… या हू… आय हॅव डन इट”

वह इतनी जोरसे चिल्लाया की बेडवर सोया हूवा अलेक्स डरके मारे जाग गया और चौककर उठते हूए घबराए स्वरमें इधर उधर देखते हूए अतूलसे पुछने लगा, ” क्या हूवा ? क्या हूवा ? ”

” कम ऑन चियर्स अलेक्स… हमें अब खजानेकी चाबी मिल चुकी है … देख इधर तो देख …” अतूल अलेक्सका हाथ पकडकर उसे कॉम्प्यूटरकी तरफ खिंचकर ले जाते हूए बोला.

अलेक्स जबरदस्तीही उसके साथ आगया. और मॉनिटरपर देखने लगा.

” यह देखो मैने विवेकका पासवर्डभी ब्रेक किया है और यह देख उसने भेजी हूई मेल ” अतूल अलेक्सका ध्यान मॉनिटरपर विवेकके मेलबॉक्ससे खोले हूए एक मेलकी तरफ आकर्षीत करते हूए बोला.

मॉनिटरपर खोले मेलमें लिखा हूवा था –

” विवेक … 25 को सुबह बारा बजे एक मिटींगके सिलसिलेमें मै मुंबई आ रही हूं … 12.30 बजे हॉटेल ओबेराय पहूचूंगी … और फिर फ्रेश वगैरे होकर 1.00 बजे मिटींग अटेंड करुंगी … मिटींग 3-4 बजेतक खत्म हो जाएगी … तुम मुझे बराबर 5.00 बजे वर्सोवा बिचपर मिलो … बाय फॉर नॉऊ… टेक केअर”

” चलो अब हमें अपना बस्ता यहांसे मुंबईको ले जानेकी तैयारी करनी पडेगी. ” अतूलने अलेक्ससे कहा.

अलेक्स अविश्वासके साथ अतूलकी तरफ देख रहा था. अब कहां उसे विवेक आठ दिनसे क्या कर रहा था और किस लिए कर रहा था यह पता चल गया था.

” यार अतूल … यू आर जिनियस” अब अलेक्सके बदनमेंभी जोश दौडने लगा था.

वर्सोवा बिचपर अंजली विवेककी राह देख रही थी और उधर बडे बडे पत्थरोंके पिछे छुपकर अतूल और अलेक्स अपने अपने कॅमेरे उसपर केंद्रीत कर विवकके आनेकी राह देखने लगे. थोडी देरमें विवेकभी आ गया, विवेक और अंजलीमें कुछ संवाद हुवा, जो उन्हे सुनाई नही दे रहा था लेकिन उनके कॅमेरे अब उनके एक के पिछे एक फोटो खिचने लगे. थोडीही देरमें विवेक और अंजली एकदुसरेके हाथमें हाथ डालकर बिचपर चलने लगे. इधर अतूल और अलेक्सभी पत्थरोके पिछेसे आगे आगे खिसकते हूए उनके फोटो ले रहे थे.

अंधेरा छाने लगा था और एक लमहेमें उनमें क्या संवाद हुवा क्या पता?, विवेकने अंजलीको कसकर अपने बाहोंमें खिंच लिया. इधर अतूल और अलेक्सकी फोटो निकालनेकी रफ्तार तेज हो गई थी. फिरभी वे संतुष्ट नही थे. क्योंकी उन्हे जो चाहिए था वह अबभी नही मिला था.

अंजलीकी कार जब ओबेराय हॉटेलके सामने आकर रुकी. उसके कारका पिछा कर रही अतूल और अलेक्सकी टॅक्सीभी एक सुरक्षीत अंतर रखकर रुक गई. अंजली गाडीसे उतरकर हॉटेलमें जाने लगी और उसके पिछे विवेकभी जा रहा था, तब अतूलने अलेक्सकी तरफ एक अर्थपुर्ण नजरसे देखा और वे दोनोभी उनके खयालमें नही आए इसका ध्यान रखते हूए उनका पिछा करने लगे.

अब अंजली और विवेक हॉटेलके रुममें पहूंच गए थे और रुमका दरवाजा बंद हो गया था. उनका पिछा कर रहे अतूल और अलेक्स अब जल्दी करते हूए उनके रुमके दरवाजेके पास आगए. अलेक्सने दरवाजा धकेलकर देखा. वह अंदरसे बंद था.

” अब क्या हम यहां उनकी पहरेदारी करनेवाले है ?” अलेक्सने चिढकर लेकिन धीमे स्वरमें कहा.

” डोन्ट वरी… वुई हॅव अ सोल्यूशन ” अतूलने उसका हौसला बढाते हूए कहा.

अलेक्स दरवाजेके कीहोलसे अंदर हॉटेलके रुममें देख रहा था …

अंदर फोन उठाते हूए अंजलीके हाथका हल्कासा स्पर्ष विवेकको हुवा. बादमें फोनका नंबर डायल करनेके लिए उसने दुसरा हाथ सामने किया. इसबार उस हाथकाभी विवेकको स्पर्ष हुवा. इसबार विवेक अपने आपको रोक नही सका. उसने अंजलीका फोन डायल करनेके लिए सामने किया हाथ हल्केसे अपने हाथमें लिया. अंजली उसकी तरफ देखकर शर्माकर मुस्कुराई. उसने अब वह हाथ कसकर पकडकर खिंचकर उसे अपने आगोशमें लिया था. सबकुछ कैसे तेजीसे हो रहा था. उसके होंठ अब थरथराने लगे थे. विवेकने अपने गरम और अधीर हूए होंठ उसके थरथराते होंठपर रख दिए और उसे झटसे अपने मजबुत आगोशमें लेकर, उठाकर, बाजुमें रखे बेडपर लिटा दिया ….

अलेक्स अंदर कीहोलसे इतनी देरसे अंदर क्या देख रहा है? … और वहभी कुछ शिकायत ना करते हूए. अतूलको आशंका हूई. उसने अलेक्सका सर कीहोल से बाजू हटाया. और वह अब खुद अंदर देखने लगा …

अंदर अंजलीके शरीर पर विवेक झुक गया था और वह उसके गलेको चुम रहा था मानो उसके कानमें कुछ कह रहा हो. धीरे धीरे उसका मजबुत मर्दानी हाथ उसके नाजूक अंगोसे खेलने लगा. और प्रतिक्रियाके रुपमें वहभी किसी लताकी तरह उसे चिपककर सहला रही थी. हकसे अब वह उसके शरीरसे एक एक कर कपडे निकालने लगा और वहभी उसके शरीरसे कपडे निकालने लगी….

अलेक्सने अतूलकी उसका सर कीहोलसे बाजू होगा इसकी थोडी देर राह देखी. लेकिन वह वहांसे हटनेके लिए तैयार नही था. तब अलेक्सने जबरदस्ती उसका सर कीहोलसे बाजु हटाया और वह उसे बोला, ” मेर भाई यह देखनेसे अपना पेट भरनेवाला नही है … थोडा अपने पेट पानीका भी सोचो ”

अंदरका दृष्य देखनेमें लिन हूवा अतूल अब कहा होशमें आ गया.

” लेकिन अब उनके फोटो तूम कैसे निकालनेवाले हो ?” अलेक्सने कामका सवाल पुछ लिया.

” डोन्ट वरी वुई आर इक्वीपड विथ टेक्नॉलॉजी.” अलेक्सने उसे दिलासा दिया और उसने अपने जेबसे एक वायरजैसी चिज निकालकर उसका एक सिरा अपने कॅमेरेसे जोडा और दुसरा सिरा दरवाजेके कीहोलसे अंदर डाला.

” यह क्या है … पता है ?” अलेक्सने पुछा.

” दिस इज स्पेशल कॅमेरा माय डियर” अतूलने कहा और वह उस स्पेशल कॅमेरेसे हॉटेलके रुमके अंदरके सारे फोटो निकालने लगा.

शामका वक्त था. अतूल सुबहसे अबतक उसके रुममें कॉम्प्यूटरपर बैठा हूवा था. अलेक्स उसके बगलमें आकर खडा हो गया और उसका क्या चल रहा है यह देखने लगा. अलेक्सकी आहट होतेही अतूल कीबोर्डकी कुछ बटन्स दबाता हूवा बोला,

” देख यह है हमने निकाली हूई तस्वीरे … कैसी लग रही है ?”

कॉम्प्यूटरके मॉनिटरपर अंजली और विवेककी हॉट फोटोज किसी स्लाईड शो की तरह एकके पिछे एक ऐसी आगे आगे खिसकने लगी.

” वा वा .. एकदम परफेक्ट… जस्ट लाईक अ प्रोफेशनल फोटोग्राफर…” अलेक्स अतूलकी सराहना करते हूए बोला.

” लेकिन सिर्फ यह फोटोग्राफ्स देखकर क्या होनेवाला है … हमें आगे भी कुछ करना पडेगा … सिर्फ सुबहसे शामतक कॉम्प्यूटरपर बैठकर क्या होनेवाला है? ” अलेक्स उसे ताना मारते हूए बोला.

” अरे … अब आगेका काम यह कॉम्प्यूटरही करनेवाला है … पहले मै अंजलीके मेलबॉक्ससे विवेकको एक मेल भेजता हूं … फिर उसके बाद तुम्हारा काम शुरु होनेवाला है ” अतूलने कहा.

” तूम मेरे कामके बारेमें एकदम बिनदास रहो … सिर्फ पहले तुम्हारा काम होनेके बाद मुझे बता देना .. ” अलेक्सने कहा.

अतूलने काफी मेहनत करके हासिल किया हूवा पासवर्ड देकर अंजलीका मेलबॉक्स खोला और वह मेल टाईप करने लगा –

” विवेक… सबसे पहले तुम्हे लिखू या ना लिखू ऐसा सोचा …. लेकिन बादमे तय किया की लिखनाही ठिक रहेगा … हम मुंबईको मिलनेके बाद मै वापस गई और इधर एक प्रॉब्लेम होगया … वैसे उसको प्रॉब्लेम नही बोल सकते … लेकिन तुम्हारे लिए उसे प्रॉब्लेमही कहना पडेगा … इधर मेरे रिश्तेदारोंको क्या लगा क्या मालूम लेकिन उन्होने तुरंत मेरी शादी तय की है … पहले मुझे बहुत बुरा लगा … लेकिन बादमै मैने उसके बारेमें बहुत सोचा और मै इस नतिजेपर पहूंची हू की मेरे रिश्तेदार जो भी कर रहे है वह मेरे भलेके लिए ही है .. लडका अच्छा है, अमेरीकामें पढा हूवा है ….इंडस्ट्रीयल फॅमिली है और हमारे बराबरीकी है … अब मुझे धीरे धीरे समझने लगा है की अबतक जो भी हमारे बिच हूवा वह एक अपरीपक्वताका नतिजा था…. इसलिए तुम्हारे और मेरे लिए यही अच्छा रहेगा की कुछ हुवाही नही इस तरह सब भूल जाएं … हम मुंबईको मिले थे यह शायद मेरे रिश्तेदारोंको पता चल चुका है … तुमने मुझसे मिलनेकी या मुझसे संपर्क बनानेकी कोशीशभी की तो वे लोग तुम्हे कुछभी कर सकते है … इसलिए तुम इस मेलका रिप्लायभी मत भेजना … मेरा मेलबॉक्सभी शायद मॉनिटर किया जा रहा है … अपना खयाल रखना …इतनाही मै तुम्हे कह सकती हूं … अंजली”

अतूलने मेल मानो अंजलीनेही टाईप कर विवेकको भेजी हो इस तरहसे टाईप की. मेल पुरी तरह लिखनेके बाद उसने एक बार फिरसे उसे पढकर देखा. उसके चेहरेपर एक वहशी मुस्कुराहट छुपाए नही छुपाई जा रही थी. उस मेलमें कुछभी त्रूटी बची नही है इसकी तसल्ली होतेही उसने वह मेल विवेकको भेज दी और अंजलीका मेलबॉक्स बंद किया.

इधर विवेक सायबर कॅफेमें बैठा था. उसे आशंका … नही यकिन था की अंजलीकी कोई तो मेल उसे आई होगी. उसने अपना मेलबॉक्स खोला और उसे मेलबॉक्समें अंजलीकी आई हूई मेल दिखाई दी. उसने तुरंत, मानो उसके बदनमें बिजली दौड गई हो, वह मेल खोली. मेल पढते हूए उसका खिला चेहरा एकदमसे मायूस हो गया. मेल पुरी पढनेके बादभी वह जैसे शुन्यमें देख रहा हो ऐसे मॉनिटरकी तरफ देखता रहा.

यह ऐसे कैसे हूवा ?…

वह अपना मजाक तो नही कर रही है ?…

उसे एक पलके लिए लगा.

तभी सायबर कॅफेमें एक आदमी आ गया. वह आए बराबर सिधा विवेकके पास गया. धीरेसे उसके पास झुककर उसने उसके कानमें कुछ कहा, –

” विवेक… आपही है ना ?”

” हां ” विवेक आश्चर्यसे उस आदमीकी तरफ देखते हूए बोला.

क्योंकी वह उस आदमी को पहचानता नही था.

” अंजलीजी घरसे भागकर आई है … बाहर गाडीमें आपकी राह देख रही है …” वह आदमी फिरसे उसके कानमें बोला.

विवेकने झटसे कॉम्प्यूटरके मॉनिटरपर खुले हूए थे वह सब वेब पेजेस बंद कर दिए. और उस आदमीके पिछे पिछे सायबर कॅफेसे बाहर निकल गया.

उस आदमीके पिछे पिछे सायबर कॅफेके बाहर जाते हूए विवेक सोचने लगा.

उसने तो मुझे जो हूवा वह सब भूल जानेके लिए मेल की थी …

फिर वह अचानक भागकर क्यों आगई होगी? ….

शायद उसके रिश्तेदारोंने उसपर दबाव बनाया होगा …

और इसलिए उसने वह मेल लिखी होगी …

अब विवेक उस आदमीके पिछे पिछे सायबर कॅफेके बाहर पहूंच गया था. बाहर सब तरफ अंधेरा था और अंधेरेमें एक कोनेमें उसे एक खिडकीयोंको सब काले शिशे लगाई हूई कार दिखाई दी.

इसी गाडीमें आई होगी अंजली…

जैसे वह आदमी उस गाडीकी तरफ बढने लगा, विवेकभी उसके पिछे पिछे उस गाडीकी तरफ बढने लगा. गाडीके पास पहूंचतेही उसके खयालमें आगया की गाडीका पिछला दरवाजा खुला है.

दरवाजा खुला रखकर वह अपनी राह देख रही होगी….

गाडीके और पास पहूंचतेही विवेकने पिछले खुले दरवाजेसे अंजलीके लिए अंदर झांककर देखा.

लेकिन यह क्या ?…

तभी किसी काले सायेने पिछेसे आकर उसके नाकपर क्लोरोफॉर्मका रुमाल रख दिया और उसे अंदर गाडीमें धकेल दिया. वह अंदर जानेके लिए प्रतिकार करने लगा तो उस काले सायेने लगभग जबरदस्ती उसे अंदर ठूंस दिया. गाडीका दरवाजा बंद होगया और गाडी तेजीसे दौडने लगी. विवेकके खयालमें आगयाकी उसके साथ कुछ धोखा हूवा है. लेकिन तबतक देर हो चुकी थी. उसे अब अहसास होने लगा था की वह अपना होश खोने लगा है.

जिस आदमीने विवेकको गाडीतक लाया था उसने जेबसे पैसे निकाले और वह वे पैसे गिनते हूए वहांसे निकल गया.

विवेक एक बेडपर बेसुध पडा हुवा था. अब धीरे धीरे उसे होश आने लगा था. जैसेही वह पुरी तरह होशमें आगया, उसे वह एक अन्जान जगहपर है ऐसा अहसास होगया. वह तुरंत बैठ गया और अपनी नजर चारो तरफ दौडाने लगा. उसके सामने अलेक्स और उसके दो साथी काले लिबासमें बैठे थे. उनके चेहरेभी काले कपडेसे ढंके हूए थे. विवेकने उठकर खडे होनेकी कोशीश की तब उसके खयालमें आगया की उसके हाथपैर बंधे हूए है.

वैसेही हालमें जोर लगाकर फिरसे उठकर खडे होनेकी कोशीश करते हूए वह बोला, ” कौन हो आप लोग? … मुझे यहां कहां और क्यो लाया आप लोगोनें …”

” चिंता मत करो … यहां हम तुझे ठाठबाठमें रखनेवाले है … हमने तुम्हे अंजलीजीके रिस्तेदारोंके कहे अनुसार यहा लाया है … वैसे वे लोग बहुत अच्छे है … जादातर ऐसे झमेलेमें पडते नही है … लेकिन क्या करे इसबार बाते उनके बसके बाहर निकल गई .. फिरभी उन्होने तुम्हे कोई तकलिफ ना हो इसका खास ध्यान रखनेकी हिदायत दी है … “

अलेक्स वहांसे उठकर जानेलगा तो विवेक चिल्लाया.

” मुझे छोड दो … मुझे पकडकर तुम्हे क्या मिलनेवाला है ?”

अलेक्स जाते हूए एकदमसे रुक गया, और मुंहपर उंगली रखते हुए विवेकसे बोला,

” चूप जादा आवाज नही करना … “

फिर अपने दो साथीकी तरफ देखकर वह बोला, ” ओय… तुम दोनो इसपर ध्यान रखो … “

फिर दुबारा विवेककी तरफ देखकर अलेक्स बोला, ” और मजनू तूम … जादा चालाकी करनेकी कोशीश मत करना.. नही तो दोनो पैर तोडकर तुम्हारे हाथमें दे देंगे… और ध्यान रखो अंजलीजीके रिश्तेदार अच्छे लोग होंगे … हम नही … “

अलेक्स आगे और उसके दो साथी उसके पिछे पिछे कमरेके बाहर निकल गए. उन्होने कमरेको बाहरसे ताला लगाकर चाबी उन दोनोंमेसे एक के पास दी, उसे वह चाबी संभालकर रखनेकी हिदायत दी और अलेक्स वहांसे निकल गया.

सुबहका वक्त था. एक कमरेमें अतूल कॉम्प्यूरपर बैठा था और अलेक्स उसके बगलमें बैठा हुवा था, ” अब देखो … हमारा मजदूरीका काम अब खत्म हुवा है ” अतूलने अलेक्ससे कहा और उसने कॉम्प्यूटरपर विवेकके मेलबॉक्सका ब्रेक किया हुवा पासवर्ड देकर विवेकका मेलबॉक्स खोला.

” अब असली काम शुरु हो गया है …” अतूल कॉम्प्यूटर ऑपरेट करते हूए बोला.

अलेक्स चूपचाप गौरसे वह क्या कर रहा है यह देख रहा था.

अतूल अब विवेकके मेलबॉक्समें मेल टाईप करने लगा –

“” मिस अंजली… हाय… वुई हॅड अ नाईस टाईम … आय रिअली ऍन्जॉइड इट.. खुशीसे लथपथ और आपके प्यारसे भीगे हूए वह क्षण मैने अपने हृदय और कॅमेरेमें कैद कर रखे है …”

अतूलने टाईप करते हूए एक बार अलेक्सकी तरफ देखा. दोनों एक दुसरेकी तरफ देखकर अजीब तरहसे मुस्कुराए. फिर अतूल आगे टाईप करने लगा –

” मै तुम्हारी क्षमा मांगता हूं की वे पल मैने तुम्हारे इजाजतके बिना कॅमेरेमें कैद किए … वे पल थे ही ऐसे की मै अपने आपको रोक ना सका … तुम्हे झूठ लगता है? … तो देखो … उन पलोंमेसे एक पलका फोटो मै इस मेलके साथ भेज रहा हूं … ऐसे काफी पल मैने मेरे कॅमेरेमें और मेरे दिलमें कैद करके रखे है … सोच रहा हूं की उन पलोंको .. उन फोटोग्राफ्सको इंटरनेटपर पब्लीश करुं … क्यों कैसी झकास आयडिया है ? नही? … लेकिन वह तुम्हे पसंद नही आएगा … नही तुम्हारी अगर वैसी इच्छा ना हो तो उन पलोंको मै हमेशाके लिए मेरे हृदयमें दफन कर सकता हूं … लेकिन उसके लिए तुम्हे एक मामुली किमत अदा करनी होगी … क्या करें हर चिजकी एक तय किमत होती है … नही?…”

फिरसे अतूल टाईप करते हूए रुका, वह अलेक्सकी तरफ मुडकर बोला,

” अलेक्स बोलो तुम्हे कितनी किंमत चाहिए ?”

” मांगो 20-25 लाख” अलेक्सने कहा.

” बस 25 लाखही … ऐसा करते है 25 तुम्हारे और 25 मेरे … 50 कैसा रहेगा ” अतूलने कहा.

” 50 !” अलेक्स आश्चर्यभरी आंखोसे अतूलकी तरफ देखते हूए बोला.

अतूल फिरसे बची हूई मेल टाईप करने लगा –

” कुछ नही बस सिर्फ 50 लाख रुपए… तुम्हारे लिए एकदम मामुली रकम है … और हां … पैसोंका बंदोबस्त जल्दसे जल्द करो … पैसे कहां और कैसे पहूंचाने है … यह सब बादकी मेलमें बताऊंगा …

मै इस मेलके लिए तुम्हारी तहे दिलसे माफी चाहता हूं … लेकिन क्या करे कुछ पानेके लिए कुछ खोना पडता है … अगले मेलकी प्रतिक्षा करना… और हां … मुझे पुलिससे बहुत डर लगता है … और जब मुझे डर लगता है तब मै कुछभी कर सकता हूं …. किसीका खुनभी …

— तुम्हारा … सिर्फ तुम्हारा … विवेक ”

अतूलने पुरी मेल टाईप की. फिर एक दो बार पढकर देखी ताकी कोई गलती ना छुटे. फिर कोई गलती नही है इसकी तसल्ली होते ही ‘सेंड’ बटनपर क्लीक कर अंजलीको भेजभी दी.

जब स्क्रिनपर ‘मेल सेंट’ मेसेज आया. दोनोंने एक दुसरेका हाथ टकराकर ताली बजाई.

उधर अंजलीने जब मेलबॉक्स खोलकर वह मेल पढी, उसे अपने पैरोंके निचेसे मानो जमिन खिसक गई हो ऐसा लगा. उसने झटसे अपने सामने रखे इंटरकॉमपर दो डीजीट दबाए ,

” मोना… सेन्ड शरवरी इन … इमिडीयटली”

शामका वक्त था. अतूल एक कमरेमें कॉम्प्यूटरपर बैठा हुवा था. उस कमरेसे बगलकेही कमरेमें बंद किया हुवा विवेक दिख रहा था. लेकिन विवेकको उसके कमरेसे अतूलके कमरेमेंका कुछ नही दिख रहा था. अतूलको रातदिन कॉम्प्यूटरके सिवा कुछ सुझताही न था. अलेक्स अपना एक्सरसाईज वैगेरे निपटाकर पसिना पोंछते हूएही अतुलके पास जाकर बैठ गया.

” क्यों लडकी क्या बोलती है? … उसे पैसा प्यारा है या अपनी इज्जत? ” अलेक्सने पुछा.

अलेक्सको अपने पास आकर बैठा हुवा पाकर अतुल विवेकका मेलबॉक्स खोलते हूए बोला,

” देखो तुम्हे एक मजेकी चिज दिखाता हूं ”

अतूलने विवेकके मेलबॉक्समेंसे एक मेल खोली.

” देखोतो इस मेलमें अंजलीने क्या लिखा हुवा है.”

दोनो पढने लगे. मेल पढनेके बाद दोनो उनके कमरेको और विवेकके कमरेंको अलक करते कांचसे विवेककी तरफ देखने लगे.

”देखोतो इस मेलमें यह अंजली …

विवेकको समझानेकी कोशीश कर रही है…

वह सोच रही होगी..

कबूतरकी एकदमसे कैसे मर सारी वफाए…

अब इसको क्या बताएं, कैसे समझाए

कि बेचारा इधर पिंजरेमे बंधा तडप रहा है ”

फिरसे विवेककी तरफ देखते हूए उन्होने एक दुसरेके हाथसे ताली बजाई और वे जोरसे हंसने लगे. दोनोंका हंसना थमनेके बाद अलेक्सने एक आशंका उपस्थित की,

” यह विवेक अपने होस्टेलसे अचानक गायब होनेसे वहा कुछ हंगामा तो नही खडा होगा ?”

” अरे हां … अच्छा हुवा तुमने याद दिलाया … उसके होस्टेलमें रह रहे उसके किसी दोस्तको मेल कर उसका बंदोबस्त करता हुं ” अतूलने कहा.

अतूल मेल टाईप करने लगा और टाईप करते हूए बोला, ” लेकिन अलेक्स याद रखो … इसके आगेही असली खतरा है … इसके आगे हमे सारी मेल्स अलग अलग सायबर कॅफेमें जाकर भेजनी पडेगी … नही तो ट्रेस होनेका बडा खतरा है … ”

…. कॉम्प्यूटरपर मेल आनेका बझर बजतेही अंजलीने अपना मेलबॉक्स खोला. उसे एक नई मेल आयी हूई दिखाई दी. वह मेल उसने भेजे स्निफर प्रोग्रॅमकीही थी. उसने झटसे वह मेल खोली और

” यस्स!” उसके मुंहसे जितभरे उद्गार निकले.

उसने भेजे स्निफरने अपना काम सही सही निभाया था.

उसने बिजलीके गतीसे मेल सॉफ्टवेअर ओपन किया और …

” यह उसका मेल आयडी और यह उसका पासवर्ड” कहते हूए विवेकका मेल ऍड्रेस टाईप करते हूए उस प्रोग्रॅमको विवेकके मेलका पासवर्ड दिया.

अंजलीने उसका मेल अकाऊंट खोलतेही और की बोर्डकी दो चार बटन्स और दोन चार माऊस क्लीक्स दबाए. और दोनोभी कॉम्प्यूटरके मॉनिटरकी तरफ देखने लगी.

” ओ माय गॉड … आय जस्ट कान्ट बिलीव्ह” अंजलीके खुले मुंहसे निकला.

शरवरी कभी मॉनिटरकी तरफ तो कभी अंजलीके आश्चर्यसे खुले मुंहकी तरफ देख रही थी.

” शरवरी यह देखो विवेकके मेलबॉक्समें … देखो यह मेल … जो है तो मेरे नामकी पर मैने भेजी नही है … ” “” मतलब ?” शरवरीने पुछा.

” मतलब मै और विवेकके अलावा दुसरा कोई है जो यह मेल अकाऊंटस खोल रहा है … और हो सकता है वही तिसरा आदमी जो मुझे ब्लॅकमेल कर रहा है … लेकिन वह तिसरा है कौन ?”

कॉन्फरंस रुममें अंजली, इन्स्पेक्टर कंवलजीत और शरवरी बैठे हूए थे. अंजली इन्स्पेक्टर और शरवरीसे इसी केसके सिलसिलेमें कुछ बाते कर रही थी. सब कुछ बयान होनेके बाद अंजलीने एक लंबी सांस ली और आगे कहा,

” तो पुरी कहानी इस प्रकार है …”

अंजलीने फिरसे एकबार सामने बैठे इन्स्पेक्टर कंवलजीत और शरवरीकी तरफ देखा.

” कंवलजीत अंकल… अब मुझे डर … वह ब्लॅकमेलर फोटो इंटरनेटपर डालेगा क्या? इस बात का नही है … मुझे असली चिंता है विवेककी … शायद विवेक उनके कब्जेमें है … उसके जानको खतरातो नही ?” अंजलीने अपना डर जाहिर किया.

” उसकी जो मेल आई थी उसे हमारे एक्स्पर्टसने ट्रेस करनेकी कोशीश की थी … एक्सॅक्ट लोकेशन और कॉम्प्यूटरका तो कुछ पता नही चला … लेकिन इतना जरुर पता चला की मेल मुंबईसे कहीसे की गई होगी.”

” इसका मतलब पैसे कहां देना है और कैसे देना है यह बतानेवाली मेलभी मुंबईसेही आएगी ” इतनी देरसे चुप्पी साधी हूई शरवरी पहली बार बोली.

” शायद हां … या शायद ना भी … यह वह क्रिमीनल कितना पहूंचा है इसपर निर्भर करेगा … लेकिन इसबार हम पहलेसेही तयार होनेसे, मेल कौनसे गांवसे, उस गांवके किस जगहसे और कौनसे कॉम्प्यूटरसे आई यह हमे पता चल सकेगा … ” इन्सपेक्टरने कहा.

” इसका मतलब हमारे पास उसके अगले मेलका इंतजार करनेके अलावा दुसरा कोई चारा नही है … ” अंजली निराश होकर बोली.

” हां … लगता तो ऐसाही है .. ” इन्स्पेक्टरभी सोचते हूए सारी संभावनाए जांचते हूए बोला.

एक पुरानी कार एक सायबर कॅफेके पास आकर रुकी. गाडीके ड्रायव्हींग सिटपर अलेक्स बैठा हूवा था और उसके बगलके सिटपर अतूल बैठा हूवा था. शायद किसीको शक ना हो इसलिए उन्होने वहां आनेके लिए और अगले सारे कामके लिए उस पुरानी कारको चूना था. गाडी रुकतेही गाडीसे अतूल निचे उतरा.

” तूम अब पैसे लानेके लिए निकल जावो … मै मेलपर उसे जगहकी सारी जानकारी देता हूं … और सुनो … जरा संभलकर … तुम्हे काफी अंतर तय करना है ” अतूलने उतरते हूए अलेक्ससे कहा.

” यू डोन्ट वरी… तूम एकदम बिनधास्त रहो ” अलेक्स गाडीके ड्रायव्हींग सिटपर बैठे हूए बोला.

” अच्छा पैसे मिलनेके बाद उस पंटरका क्या करना है ” अलेक्सने कुछ सोचते हूए पुछा. उसका इशारा विवेककी तरफ था.

” उसका क्या करना है .. यह बादमें देखेंगे …. लेकिन वह अपनी महबुबाके लिए शहीद होगा इसकी जादा संभावना पकडकर हमे चलना होगा… क्योंकी रास्तेसे चलते हूए सामने आए गढ्ढोंको भरते हूए आगे जाना जरुरी होता है … नही तो वापस आते हूए उसी गढ्ढोंमे फिसलकर गिरनेकी संभावना जादा होती है.” अतूल उतरते हूए गुढतासे हसते हूए अलेक्सकी तरफ देखते हूए बोला.

अलेक्सभी उसकी तरफ देखकर मुस्कुराया.

अतूल गाडीसे उतरा और सायबर कॅफेकी तरफ निकल पडा. अलेक्सने गाडी आगे बढाई और अगले चौराहेपर मुडकर वह तेजीसे आगे निकल गया.

उधर अतूलने भेजा हुवा मेसेस अंजलीके मॉनिटरपर अवतरीत हुवा. और तभी शरवरी अंजलीके कॅबिनमें आ गई. शरवरीको देखतेही अंजलीने उसे ‘उसकाही मेसेज है’ ऐसा इशारा किया. इशारा मिलतेही शरवरी तुरंत कॅबिनके बाहर गई. बाहर जाकर शरवरी अंजलीके ऑफीसके बगलमें स्थित एक रुममें चली गई. उस रुममें इन्स्पेक्टर कंवलजीत और, और दो लोग एक कॉम्प्यूटरके सामने बैठे थे. शरवरीने कमरेमें प्रवेश करतेही कहा –

” सर उसका मेसेज आया है ”

वे तिनों एकदम सतर्क होकर, सिधे बैठकर कॉम्प्यूटरकी तरफ देखने लगे.

” कम ऑन सुरज ट्रेस द ब्लडी बास्टर्ड ” उन दोनोंको उत्साहीत करनेके उद्देशसे इन्सपेक्टरने कहा.

” सर ही इज ट्रेस्ड … द कॉल इज अगेन फ्रॉम मुंबई … ऍन्ड सी द आय पी ऍड्रेस…”

इन्स्पेक्टरने मॉनिटरकी तरफ देखा और तुरंत मोबाईल लगाया,

” हॅलो राज… हमने उस ब्लॅकमेलरको ट्रेस किया है … उसे अभीभी अंजलीने चॅटींगपर बिझी रखा है … तूम वहां मुंबईमें उसके सही सही ठिकानेका पता लगाओ … ऍन्ड सी दॅट द फेलो शुड नॉट एस्केप… हां यह लो ब्लॅकमेलरका आय पी ऍड्रेस ….”

अबभी अंजलीको ब्लॅकमेलरका मेसेज ‘ हाय मिस अंजली ‘ उसके चॅटींग विंडोमें दिख रहा था. वह अब मनही मन उसे जादासे जादा वक्त तक चॅटींगपर कैसे बिझी रखा जाए ताकी पुलिस उसे ट्रेस कर पकड सकें, इसके बारेमें सोच रही थी. तभी अगला मेसेज आया,

‘ अंजली प्लीज ऍकनॉलेज युवर प्रेसेन्स ‘

अब अंजलीके पास कुछतो मेसेजे भेजनेके अलावा कोई चारा नही था, नही तो वह डिस्कनेक्ट होनेका डर था.

‘ हॅलो.. ‘ उसने मेसेज टाईप कर भेजा.

इधर इन्स्पेक्टरने फिरसे मुंबईको फोन लगाया.

” राज … कुछ पता चला?”

” यस सर … द एरीया वुई हॅड जस्ट फाईन्ड आऊट… इट्स ठाणे… बट द एक्सॅक्ट स्पॉट वुई आर ट्राईंग टू लोकेट…” उधरसे राज बोल रहा था.

” कमॉन डू समथींग ऍन्ड फाईन्ड आऊट क्वीकली” इन्स्पेक्टरने कहा.

उधर अंजलीको ब्लॅकमेलरका अगला मेसेज आया –

‘ मै मेलमें सारी डिटेल्स भेज रहा हूं … ‘

अंजलीको लगा की उसे सारी डिटेल्स चॅटींगपरही भेजनेके लिए कहा जाए … लेकिन नही उसे आशंका होगी …

लेकिन वह अब डिस्कनेक्ट कर सकता है … उससे संभाषण जारी रखना आवश्यक था….

अचानक उसे कुछ सुझा और उसने मेसेज टाईप किया,

‘ लेकिन 50 लाख रुपए देनेके बादभी तुम मुझे ब्लॅकमेल नही करोगे इसकी क्या गॅरंटी ?’

उधर इन्सपेक्टरको चैन नही पड रहा था. उन्होने फिरसे मुंबई राजको फोन लगाया,

” राज .. कुछ पता चला ?”

” सर वुई हॅव फाऊंड आऊट द एक्सॅक्ट लोकेशन ऍन्ड दी एक्सॅट स्पॉट…” उधरसे राजने कहा.

” गुड व्हेरी गुड… नाऊ क्वीकली इन्स्ट्रक्ट द ठाणे पुलिस टू रेड द स्पॉट … ” इन्स्पेक्टरने जोशके साथ कहा.

” यस सर” उधरसे प्रतिक्रीया आ गई …

अंजली अब सोच रही थी की वह उसे चटींगपर बातोंमें उलझानेमें कामयाब रही की नही, क्योंकी अबतक उसका कोई रिप्लाय नही आया था.

तभी उसका रिप्लाय आ गया,

‘ देखो … यह दुनिया भरोसेपर चलती है … तुम्हे मुझपर भरोसा करनाही पडेगा … और तुम्हारे पास उसके अलावा दुसरा कोई चाराभी नही है ‘

उसके मायूस चेहरेपर खुशीकी एक लहर दौड गई, क्योंकी कमसे कम अबतक वह उसे बातोंमें उलझानेमें कामयाब रही थी.

अब आगे उसे और उलझानेके लिए क्या मेसेज भेजा जाए, वह सोच रही थी और उसने कुछ टाईपभी किया. लेकिन तभी ब्लॅकमेलरका अगला मेसेज आ गया –

‘ ओके देन बाय… दिस इज अवर लास्ट कन्व्हरसेशन… टेक केअर… तुम्हारा … और सिर्फ तुम्हारा विवेक…’

वह और कुछ टाईप कर उसे भेजती उससे पहलेही वह चॅटींग रुमसे गायब होगया.

वह इतने जल्दी चॅटींग खत्म करेगा ऐसा उसे अंदेशा नही था. अंजली तुरंत अपने कुर्सीसे उठकर जल्दी जल्दी अपने कॅबिनसे बाहर निकल गई. बाहर आकर सिधे वह बगलके रुममे, जहां इन्स्पेक्टर और दो कॉम्प्यूटर एक्स्पर्टस बैठे थे वहा चली गई. अंजली वहा पहूंचतेही वे अंजलीके डरसे सहमें चेहरेकी तरफ देखने लगे थे.

” अंकल उसने अभी अभी चॅटींग शेशन क्लोज किया है … लेकिन मुझे यकिन है की वह अबभी इंटरनेटपर कनेक्टेड होगा और मेल लिख रहा होगा ..” अंजलीने कहा.

” डोन्ट वरी… ठाणे पुलिस हॅव ऑलरेडी स्टार्टेड टू रेड द लोकेशन… ” इन्स्पेक्टरने कहा.

पुलिसकी एक गाडी आकर एक सायबर कॅफेके सामने रुकी. गाडीसे एक इन्स्पेक्टर चार पाच हवालदारोंको साथमें लेकर सायबर कॅफेकी तरफ चलने लगा. वे हवालदार उसके अगले आदेशकी राह देखते हूए उसके पिछे पिछे चलने लगे. इन्स्पेक्टर सायबर कॅफेमें घूस गया और उसके पिछे वे चार हवालदारभी कॅफेमें घुस गए. पहले वे रिसेप्शन काऊंटरपर रुके. रिसेप्शन काऊंटरपर बैठा स्टाफ एकदम इतने पुलिसको देखकर हडबडाकर उठ खडा हूवा.

” यस सर… ” उस स्टाफके मुंहसे मुश्कीलसे निकला.

इन्स्पेक्टरने उससे कुछ ना बोलते हूए उसके सामने रखा लॉग रजिस्टर उठाया और उसमें वह कुछ खोजनेकी कोशीश करने लगा.

” क्या हुवा साब?” वह स्टाफ फिरसे हिम्मत करके बोला.

इन्स्पेक्टरने गुस्सेसे सिर्फ उसकी तरफ देखा, वैसे वह सहम गया और चुप होगया. इन्स्पेक्टर लॉगबुकमें एक एक एन्ट्री ठिकसे देखने लगा. एक जगह इन्स्पेक्टरकी रजीस्टरपर दौडती उंगली रुक गई और आंखोकी पुतलीयांभी स्थिर हो गई. उस एन्ट्रीमें नाम के रकानेमें ‘विवेक सरकार’ ऐसा लिखा हुवा था. इन्स्पेक्टर मन ही मन मुस्कुराया. उसे शायद ब्लॅकमेलरने सब सावधानी बरतनेके बावजुद वह अब पकडा जाने वाला है इस बातकी हंसी आ रही होगी. इन्स्पेक्टर उस एन्ट्रीके सामने दी सारी जानकारी पढते हूए बोला,

” सतरा नंबर किधर है ?”

” आवो मेरे साथ… मै तुम्हे उधर ले जाता हूं ” वह स्टाफ इन्स्पेक्टरको एक तरफ ले जाते हुए बोला. वह सायबर कॅफेका स्टाफ आगे आगे और इन्स्पेक्टर अपने साथीयोंके साथ उसके पिछे पिछे चल रहे थे.

चलते हूए एक जगह रुककर उस स्टाफने एक बंद कॅबिनका दरवाजा धकेलकर खोला. सब पुलिस अब गुनाहगारको पकडनेके तैयारीमें थे. लेकिन कॅबिन खोलतेही जब उन्होने कॅबिनके अंदर देखा, उनके चेहरे खुलेकी खुलेही रह गए. क्योंकी कॅबिन खाली थी. कॅबिनमें कॉम्प्यूटर शुरु था लेकिन कॅबिनमें कोई नही था. इन्स्पेक्टरने चारो हवालदारोंको कॅफेमें चारो तरफ उस गुनाहगारको ढुंढनेके लिए भेजा.

इन्स्पेक्टर और चारो हवालदारोंने काफी समय तक सारा कॅफे और कॅफेके आसपासका इलाका छान मारा . लेकिन कुछभी हाथ नही लगा. गुनाहगार अब उनके कब्जेमें आनेवाला नही है इसकी तसल्ली होतेही इन्स्पेक्टरने मोबाईल लगाया,

” सर आय थींक वुई वेअर लेट बाय फ्यू सेकंड्स … हि हॅज एस्केप्ड… आय ऍम सॉरी… हम उसे पकड नही पाए ”

इन्स्पेक्टर कंवलजीत मोबाईलपर बोल रहे थे और उनके आसपास अंजली, शरवरी और वे दो कॉम्प्यूटर एक्स्पर्टस बडी आशासे क्या हुवा यह सुननेका प्रयास कर रहे थे.

” शिट … एस्केप्ड… ” इन्स्पेक्टर झुंझलाए.

और कुछ पल कुछतो सोचनेजैसा करनेके बाद वह मोबाईलपर बोले,

” अब एक काम करो … वहांसे उसके फिंगर प्रिट्स लो … जिस कॉम्प्यूटरपर वह बैठा था उसके फोटोग्राफ्स लो … ऍन्ड सी द हिस्ट्री लॉग ऑफ द कॉम्प्यूटर”

” यस सर ” उधरसे जवाब आया.

इन्सपेक्टरने मोबाईल डिस्कनेक्ट किया और निराशासे अंजलीकी तरफ देखते हूए उसे किस तरह कहां जाए यह सोचने लगे.

” द ब्लडी बास्टर्ड हॅज एस्केप्ड…” उन्होने कहा.

लेकिन उनके बातचित और हावभावसे कमरेमें उपस्थित सारे लोग यह बात पहलेही समझ चुके थे.

<

p style=”text-align: justify;”>जंगलमें सब तरफ सुखे पत्ते फैले हूए थे. उन सुखे पत्तोकों रौंदते हूए एक काले शिशे चढाई हूई कार धीरे धीरे उस जंगलसे गुजरने लगी. वह कार जब जंगलसे गुजर रही थी तब उन सुखे पत्तोंके रौंदनेसे एक अजिबसी आवाज उस जंगलके शांतीमे बाधा डाल रही थी. आखिर एक पेढके पास वह कार रुक गई. उस कारके ड्रायव्हर सिटवाला शिशा धीरे धीरे निचे खिसकने लगा और अब वहां ड्रायव्हीग सिटपर बैठी हुई काला चष्मा लगाई हूई अंजली दिखने लगी. उसने एक पेढपर लगाई लाल निशानी देखी और उसने बगलके सिटपर रखी एक ब्रिफकेस उठाकर खिडकीसे उस निशान लगाए पेढकी तरफ फेंक दी. ब्रिफकेसका ‘धप्प’ ऐसा आवाज आ गया. उसने फिरसे अपनी पैनी नजर चारो तरफ घुमाई और अपनी कार स्टार्ट कर वह वहांसे चली गई.

जंगलसे बाहर निकलकर अंजलीकी कार अब प्रमुख रस्तेपर आ गई थी. तभी अंजलीका मोबाईल बजा.

अंजलीने डिस्प्ले ना देखते हूएही वह अटेंड किया, ” हॅलो…”

” हॅलो… मै इन्स्पेक्टर कंवलजीत बोल रहा हूं …” उधरसे आवाज आया.

” यस अंकल..”

” पैसे कब और कहां भेजने है इसके बारेमें ब्लॅकमेलरकी मेल तुम्हे आईही होगी ” इन्स्पेक्टर कंवलजीतने पुछा.

” हां आई थी .. सच कहूं तो मै अब वहां पैसे पहूंचाकर वापसही आ रही हूं ” अंजलीने कहा.

” व्हॉट… ” इन्स्पेक्टरके स्वरमें आश्चर्य स्पष्ट झलक रहा था.

”आय जस्ट कांन्ट बिलीव्ह धीस… तुमने मुझे बताया नही … हम जरुर कुछ कर सकते थे. ” इन्स्पेक्टरने आगे कहा.

” नही अंकल अब यहां मुझे पुलिसका शामिल होना नही चाहिए था . … एक बार तो पुलिस पुरी तरहसे नाकामयाब रही है … यहां मै चान्स लेना नही चाहती थी … और मुझे चिंता सिर्फ विवेककी है … पैसे जानेका अफसोस मुझे नही … बस ब्लकमेलरको पैसे मिलनेके बाद वह विवेकको छोड देगा … और पुरा मसलाही खत्म हो जाएगा ” अंजलीने कहा.

” मै प्रार्थाना करता हूं की तूम जैसा सोचती हो… सब वैसाही हो … लेकिन मुझे चिंता होती है तो बस इस बातकी की अगर वैसा नही हुवा तो ?” इन्स्पेक्टरने कहा.

” मतलब ?” अंजलीने पुछा.

” मतलब … तुमने पैसे देकरभी उसने अगर विवेकको नही छोडा तो ?” इन्स्पेक्टरने अपना डर जाहिर किया.

अंजली एकदम सोचमें पड गई.

अतूल और अलेक्स उस काले ब्रिफकेसके सामने बैठे थे. उनके चेहरेपर खुशी झलक रही थी. आखिर अतूलने अपने आपको ना रोक पाकर वह बॅग खोली. दोनो आंखे फाडकर उन पैसोंकी तरफ देख रहे थे. अतूलने उस बॅगसे एक पैसोंका बंडल उठाया, अपने नाकके पास लिया और वह उस बंडलसे अपनी उंगली फेरते हूए उस नोटोंकी खुशबु लेने लगा.

” देख तो कितनी अच्छी खुशबु आ रही है … ” अतूलने कहा.

अलेक्सनेभी एक बंडल उठाकर उसकी खुशबु लेते हुए वह बोला,

” और देखोतो अपने मेहनतके कमाईके पैसेकी खुशबु कुछ औरही आती है … नही?”

दोनोंने हंसते हूए एक दुसरेकी जोरसे ताली ली.

” इतने सारे पैसे वहभी एकसाथ… मै तो पहली बार देख रहा हूं ” अलेक्सने कहा.

दोनों उस बैगमें हाथ डालकर सारे बंडल्स उलट पुलटकर देखने लगे.

” नोटोंके बंडल्स देखते हूए अलेक्स बिचमेही रुककर बोला, ” अब उस पंटरका क्या करना है … उसे छोड देना है ? ”

” छोड देना है ? … कहीं तुम पागल तो नही हूए ? … अरे अब तो शुरवात हूई है … मुर्गीने अंडे देनेकी अबतो शुरवात हुई है ” अतूल बिभत्स हास्य धारण करते हूए बोला.

अंजली अपने कुर्सीपर बैठकर कुछ ऑफीशियल कागजाद उलट पुलटकर देख रही थी और उसके बगलमेंही शरवरी कॉम्प्यूटरपर बैठकर कुछ ऑफीशियल काम कर रही थी. तभी कॉम्प्यूटरका बझर बजा. अंजलीने पलटकर मॉनिटरकी तरफ देखा.

” उसकाही मेसेज है ” शरवरीने बताया.

अंजली उठकर कॉम्प्यूटरके पास गई. उसके आतेही कॉम्प्यूटरके सामनेसे उठकर उसने अंजलीको जगह दे दी.

” जा जल्दी जा ‘ अंजलीने कॉम्प्यूटरके सामने बैठते हूए शरवरीसे कहा.

शरवरी तुरंत वहांसे निकलकर कॅबिनके बाहर चली गई. अंजलीके कॅबिनसे बाहर आकर शरवरी सीधे बगलके रुममें चली गई. वहां इन्स्पेक्टर कंवलजित और वे दोनो कॉम्प्यूटर एक्स्पर्टस एक कॉम्प्यूटरके सामने बैठे थे. शरवरी जल्दी जल्दी उनके पास गई. उसकी आहट होतेही तिनो पलटकर उसकी तरफ मुडकर देखने लगे.

” जैसे आपने बोला था वैसाही हो गया … ब्लॅकमेलरका फिरसे मेसेज आ गया है … ” शरवरी जल्दी जल्दी आनेसे सांस फुले स्थितीमें बोली.

वे दोनों कॉम्प्यूटर एक्सपर्टस कुछ ना बोलते हूए अपने काममें लग गए.

” सुरज… कम ऑन… इस बार किसीभी हालमें साला छुटना नही चाहिए…. ”

” सर ऍज बिफोर दिस टाईम ऑल्सो हि इज कॉलींग फ्रॉम मुंबई… और उसका आय पी ऍड्रेस देखिए …” एक्सपर्टने सॉफ्टवेअरके कुछ रिपोर्ट्स देखते हूए कहा.

वह बोलनेके पहलेही इन्सपेक्टरने मुंबईको इन्स्पेक्टर राजको फोन लगाया,

” हां राज … फिरसे हमने ब्लॅकमेलरको ट्रेस किया है … अबभी वह चटींगही कर रहा है … तुम उसकी एक्सॅक्ट लोकेशनका पता करो … ऍन्ड सी दॅट दिस टाईम द बास्टर्ड शुड नॉट एस्केप… और हां उसका आय पी ऍड्रेस लिख लो …”

अतूल सायबर कॅफेमें एक कॉम्प्यूटरके सामने बैठकर चॅटींगमें उलझा हुवा था.

” मिस अंजली… हाय कैसी हो ?” उसने मेसेज टाईप कर भेजा.

काफी समय हो गया था फिरभी उसका जवाब नही आया था. लेकिन उसका नामतो चॅटींगमें दिख रहा था.

कॉम्प्यूटर खुला छोडकर कही गई तो नही साली…

या फिर अपना अचानक मेसेज आनेसे गडबडा गई होगी …

उसने सोचा. अबभी उसका मेसेज आया नही था. गुस्सेसे उसका चेहरा लाल होने लगा था. तभी उधरसे मेसेज आ गया , ” ठिक हूं ”

तब कहा अतूलने चैनकी सांस ली. वह अब अगला मेसेज, जो उसके लिए बहुत महत्वपुर्ण था, टाईप करने लगा,

” तुम्हे फिरसे तकलिफ देते हूए मुझे बुरा लग रहा है … लेकिन क्या करे? … पैसा यह साली चिजही ऐसी है … कितनेभी संभलकर इस्तमाल करो तो भी खतम हो जाती है … मुझे इस बार 20 लाख रुपएकी सख्त जरुरत है …”

अतूलने टाईप कर मेसेज भेजभी दिया.

” अभी तो तुम्हे 50 लाख रुपए दिए थे मैने … अब मेरे पास पैसे नही है …” उधरसे अंजलीका दोटूक जवाब आया.

” बस यह आखरी बार … क्योंकी यह पैसे लेकर मै परदेस जानेकी सोच रहा हूं ” विवेकने कुछ सोचकर टाईप किया और ‘सेंड’ बटनपर क्लिक किया.

” तुम परदेस जावो … या और कही जावो … मुझे उससे कुछ लेना देना नही है … देखो … मेरे पास कोई पैसोका पेढ तो है नही … ” अंजलीका मेसेज आया.

अतुलको फिरसे गुस्सा आ रहा था, लेकिन अपने गुस्सेपर काबू करते हूए उसने टाईप किया.

” ठिक है … तुम्हे अब मुझे कमसे कम 10 लाख रुपए तो भी देने पडेंगे … पैसे कब कहा और कैसे पहूंचाने है वह मै तुम्हे मेल कर सब बता दुंगा …”

उसने ‘सेंड’ बटनपर क्लिक कर मेसेज भेज दिया, और चॅटींग सेशनसे लॉग आऊटभी कर दिया. वह अंजलीसे जादा बहस नही करना चाहता था.

अब अतुल मेलबॉक्स खोल रहा था, तभी उसका ध्यान यूंही खिडकीके बाहर गया और वह भौंचक्का होकर उधर देखने लगा. बाहर एक पुलिस इन्स्पेक्टर और, और एक दो पुलिस तेजीसे सायबर कॅफेके तरफही आ रहे थे. अब अतूलके हरकतोंमे तेजी आ गई. उसने झटसे अपना कॉम्प्यूटर ऑफ किया और काऊंटरपर पैसे देकर वह सायबर कॅफेसे बाहर निकल गया. वह बाहर निकल गया उसके बाद कुछ पलही गुजर गए होंगे जब जल्दी जल्दी पुलिस इन्स्पेक्टर और उसके साथी सायबर कॅफेमें घुस गए. सायबर कॅफेमें प्रवेश करतेही इन्सपेक्टरने ऐलान किया,

” नो बडी वील गो आऊट ऑफ दी कॅफे… ऑल ऑफ यू स्टे व्हेअर यू आर… नो बडी वील मुव्ह ”

अंजलीके कॅबिनके बगलके रुममें दो कॉम्प्यूटर एक्सपर्टस, अंजली और शरवरी बडी आस लगाए मोबाईलपर बोल रहे इन्स्पेक्टर कंवलजितकी तरफ देख रहे थे.

इन्स्पेक्टरने मोबाईल अपने कानसे हटाया और मायूसीसे अंजलीकी तरफ देखते हूए कहा,

” द बास्टर्ड इस मॅनेज्ड टू एस्केप अगेन…”

अंजली और शरवरी ने एकदुसरेकी तरफ देखा, उनके खिले हूए चेहरे मायूस हो गए थे.

अंजली अपने कॅबिनमें अपने काममें व्यस्त थी. तभी फोनकी घंटी बजी.

” हॅलो ” अंजलीने फोन उठाया.

” अंजली देअर इज गुड न्यूज फॉर यू…”” उधरसे इन्स्पेक्टर कंवलजित बोल रहे थे.

” यस अंकल”

” ब्लॅकमेलरने विवेकको छोड दिया है …” इन्स्पेक्टरने अंजलीको खुशखबरी सुनाई.

” ओ.. थॅंक गॉड … आय कान्ट एक्सप्लेन … आय ऍम सो हॅपी…”

अंजलीको विवेकके छुटनेकी खबर जबसे मिली थी तबसे उसे कुछभी सुझ नही रहा था. उसे कब मिलती हूं ऐसा उसे हो रहा था. वह ऑफीसका सारा काम वैसाही छोडकर सिधे एअरपोर्टकी तरफ निकल पडी.

… उसे पहले बताना कैसा रहेगा ?

नही … उसे सरप्राईज देते है …

और उसे डायरेक्ट बतानेका कोई रास्ताभी तो नही …

इमेल थी. लेकिन आजकल अंजलीको इमेल, चॅटींग इन सारी चिजोंसे सक्त नफरत और मनमें डरसा बैठ गया था.

एअरपोर्ट आया वैसे उतरकर उसने ड्रायव्हरको गाडी वापस ले जानेके लिए कहकर वह लगभग दौडते हूए तिकिट काऊंटरके पास गई.

” मुंबईके लिए … अब कोई फ्लाईट है ?” उसने पुछा.

” वन फ्लाईट इज देअर .. जस्ट रेडी टू टेक ऑफ…” काऊंटरपर बैठे लडकिने बताया.

” वन टीकट प्लीज” अंजली अपना क्रेडीट कार्ड आगे करते हूए बोली.

उसने काऊंटरसे टिकट खरीदा और लगभग दौडते हूए ही वह फ्लाईटकी तरफ दौड पडी. तभी उसका मोबाईल बजा. उसने मोबाईलका डिस्प्ले देखा. डिस्प्लेपर उसके ऑफिसका नंबर था. उसने आगे कुछ ना सोचते हूए ही फोन बंद किया और दौडते हूएही फ्लाईटमें जाकर बैठ गई. सिटवर बैठतेही फिरसे उसका मोबाईल बजने लगा. उसने मोबाईलका डिस्प्ले देखा. वही ऑफीसका नंबर

ऑफीसचा नंबर… क्या काम होगा ?… शरवरी एक कामभी ठिकसे नही संभाल सकती ..

उसने फोन बंद किया. लेकिन वह फिरसे बजने लगा.

शरवरी कभी ऐसा बार बार फोन नही करती …

कुछ तो जरुरी काम होगा …

उसने फोन उठाया और उधर फ्लाईटका लास्ट कॉल हो गया.

” क्या है शरवरी?… ” वह लगभग चिढकरही बोली.

लेकिन यह क्या? उधरसे आनेवाला आवाज आदमीका था – हां विवेकका आवाज था.

” विवेक तूम… ” वह एकदमसे सिटसे उठकर खडी होते हूए बोली, ” ऑफीसमें तुम कैसे .. कब.. और वहां क्या कर रहे हो …?” उसे क्या बोला जाए कुछ समझ नही आ रहा था.

वह बोलते हूए जल्दी जल्दी प्लेनके दरवाजेकी तरफ जा रही थी.

” तुम्हे मिलनेके लिए आया था ” उधरसे विवेकका आवाज आया.

वह जब प्लेनके दरवाजेके पास पहूंची तब प्लेनका दरवाजा बंद किया जा रहा था.

” रुको मुझे उतरना है … ”

” क्यों क्या हुवा ?” अटेंडंट्ने पुछा.

” आय ऍम नॉट फीलींग वेल” उसके पास अब पुरी बात समझानेका वक्त नही था.

वह दरवाजा बंद करते हूए रुक गया. और वह तेजीसे चलते हूए प्लेनसे उतर गई.

वह अटेंडंट उसकी तरफ आश्चर्यसे देख रहा था.

“इसकी तबीयत ठिक नही … फिर वह इतने जल्दी जल्दी और जोशके साथ कैसे उतर रही है ?’ उसके मनमें आया होगा.

उसकी टॅक्सी लगभग अब उसके घरके पास पहूंच गई थी. टॅक्सी जैसेही उसके घरतक आकर पहूंची उसके दिलकी धडकने तेज हो रही थी. प्लेनसे बाहर निकलतेही वह सिधे एअरपोर्टके बाहर आ गई थी और टॅक्सी लेकर उसने टॅक्सीवालेको सिथे उसके घर ले जानेके लिए कहा था. और प्लेनमें जब विवेकका फोन आया था तभी उसने उसे अपने घर आनेके लिए कहा था. उसे ऑफीसमें सिन नही चाहिए था. तबतक टॅक्सी उसके घरके आहातेमें आकर रुकी. उसे पोर्चमेही विवेक उसकी बडी अधिरतासे राह देखता हूवा दिखाई दिया. उसकी टॅक्सी आतेही वह पोर्चसे उतरकर उसके टॅक्सीके पास आ गया. उसेभी अब रहा नही जा रहा था. टॅक्सीका दरवाजा खोलकर सिधे वह उसके बाहोंमे घुस गई. न जाने कितने दिनोंसे वे एक दुसरेकों मिल रहे थे. अंजली के आंखोमें आंसू आ गए और वे फिर रुकनेका नाम नही ले रहे थे.

” अरे अरे… यह क्या ?” विवेक उसे थपथपाते हूए बोला.

” देखो तो मै पुरा की पुरा सहीसलामत तुम्हारे पास पहूंच गया हूं ” वह मजाकिया अंदाजमे, मौहोल थोडा ढीला करनेके लिए बोला.

लेकिन वह उसे इतनी मजबुतीसे चिपक गई थी की वह उसे छोडनेके लिए तैयार नही थी.

अंजली और विवेक जबसे आए थे तबसे अंजलीके बेडरुममें, एक दुसरेकों बाहोंमे भरकर, लेटे हूए थे. ना उन्हे खानेकी सुध ती ना पिनेकी.

” जब उसकी पहली मेल आई, तब तुम्हे क्या लगा?” विवेकने पुछा.

” सच कहूं … मुझे तो मानो मेरे पैर के निचेसे जमिन और सर के उपरसे आसमान खिसक गया ऐसा लगा था… मैने तो दिलसे तुम्हे स्विकारा था और ऐसी स्थितीमें ऐसाभी कुछ हो सकता है, मैने सपनेभी नही सोचा था….” अंजलीने कहा.

” इसका मतलब तुम्हे सब सच लगा था ” विवेकने मजाकिया अंदाजमें पुछा.

” अरे.. मतलब ?… भलेही दिल नही मानता था पर परिस्थितीयां उसीके ओर इशारा कर रही थी. ” अंजलीने अपना बचाव करते हूए कहा.

” और तुम्हे क्या लगा था ?” अंजलीने पुछा.

” नही तुम ठिक कहती हो … मेराभी हाल कुछ कुछ तुम जैसाही था … भलेही दिल ना माने परिस्थितीयां किसी ओर इशारा कर रही थी. ” विवेकने उसे सहलाते हूए कहा.

” ऐसा वक्त फिरसे अपने जिंदगीमें कभी ना आए ” अंजलीने कहा.

” सचमुछ… पहले तो मुझे अपने प्यारको किसीकी नजर लगी हो ऐसाही लग रहा था. ” विवेक उसके माथेको चुमते हूए बोला.

उसने उसके माथेको चुम लिया और वह उसके होंठोके पास अपने होंठ ले जाकर बडे बडे सांस लेते हूए वही रुक गया. और फिर आवेशके साथ एकदुसरेके होठोंको अपने मुंहमें लेकर वे एक बडे चुंबनमें मशगुल हो गए.

अचानक अंजलीको उनका पहले हॉटेलमें हुवा वह प्रणय याद आ गया और उसीके साथ कोई उनके फोटो खिंच रहा है ऐसा आभास हो गया.

वह झटसे अपने होंठ उसके होठोंसे हटाते हूए वह पिछे हट गई.

” क्या हुवा ?” विवेकने पुछा.

” हम वही गलती दुबारा तो दोहरा नही रहे है ” अंजलीने मानो खुदसेही पुछा.

” मतलब ?” विवेकने पुछा.

” यह सब और वहभी शादीसे पहले… तूम मेरे बारेंमे क्या सोच रहे होगे ” अंजलीने अपने जहनमें उठा दुसरा सवालभी पुछा.

” डोन्ट बी सिली” वह फिरसे पहल करते हूए बोला.

लेकिन उसके हाथपैर मानो ठंडे पड चुके थे. वह कुछभी प्रतिक्रिया नही दे रही थी.

” तुम्हे अगर इसमें गलत लगता है और… तुम्हारा दिल अब नही मान रहा है तो ठिक है … ” वह उससे अलग होते हूए वहांसे उठते हूए बोला.

” वैसा नही हनी … डोन्ट मिसअंडरस्टॅंड मी” वह उसे फिरसे अपने पास खिंचते हूए बोली.

उसने फिरसे उठनेका प्रयास किया लेकिन अब वह उसे छोडनेके लिए तैयार नही थी. विवेकको कुछ समझ नही रहा था की. वह शिथील होकर सिर्फ उसके पास बैठा रहा. लेकिन अब मानो अंजलीके शरीरमें किसी चिजका संचार हुवा था. वह कॉटपर उसे एक तरफ गिराकर उसके उपर चढ गई और उसके शरीरपर सब तरफ चुंबनोकी मानो बरसात करने लगी. और फिर उनके बिच कुछ पलके लिए क्यों ना हो तैयार हुवा फासला मिट गया और वे एकदुसरेमें कब समा गए उन्हे कुछ पताही नही चला.

अंजली सुबह सुबह निंदसे जब जाग गई तब वह अपने पास पडे विवेकके मासूम चेहरेकी तरफ एकटक देखने लगी. उसने खिडकीसे बाहर झांककर देखा. बाहर अभीभी अंधेरा था. वह फिरसे विवेकके चेहरेकी तरफ एकटक देखने लगी. अचानक उसके खयालमें आगयाकी उसका मासूम चेहरा धीरे धीरे उग्र होता जा रहा है.

शायद वह कोई बुरा सपना देख रहा हो….

उसने उसके चेहरेपर हाथ फेरनेकी कोशीश की. लेकिन उसके हाथका स्पर्ष होतेही वह चौंककर उठ गया और गुस्सेसे बोला, ‘ मै तुम्हे छोडूंगा नही … मै तुम्हे छोडूंगा नही ”

कुछ पलके लिए तो अंजलीभी घबराकर असमंजसमें पड गई.

” क्या हुवा ?” अंजलीने पुछा.

लेकिन कुछ पलमेंही उसका गुस्सा ठंडा पडा दिखाई दिया. और वह इधर उधर देखते हूए फिरसे सोनेके लिए लेटते हूए बोला,

” कुछ नही ”

और फिरसे सो गया.

सुबह सुबह अंजली, विवेक, शरवरी और इन्स्पेक्टर कंवलजीत कॉन्फरंन्स रुममें इकठ्ठा हूए थे.

” मै इस बातसे संतुष्ट हूं की आखिर ब्लॅकमेलरने विवेकको कोईभी हानी ना पहूंचाते हूए छोड दिया.” अंजली काफी समयसे चल रहे चर्चाके बाद एक गहरी सांस लेते हूए बोली.

” एक मिनीट” विवेकने हस्तक्षेप किया.

सब लोग एकदम गंभीर होकर उसकी तरफ देखने लगे.

” मुझे लगता है …. ब्लकमेलरकी वजहसे हमे, मुझे, आपको, अंजलीको – सबकोही काफी तकलिफ उठानी पडी…. ” विवेकने कहा.

” विवेक… पैसा चला गया इस बातका मुझे दुख नही है … तुझे कुछ हानी नही हुई यह मेरे लिए सबसे महत्वपुर्ण है ” अंजलीने बिचमेही उसे काटते हूए कहा.

इन्स्पेक्टर कंवलजीतभी उसकी हां मे हां मिलाएंगे इस आशासे अंजलीने उनकी तरफ देखा. लेकिन वे कुछ नही बोले.

” अंजली बात सिर्फ पैसोकी नही है … कमसे कम मुझे लगता है की उसे यूही छोड देना कुछ उचित नही होगा. .. वैसे अबभी देरी नही हूई है… अब अगर हमने उसे पकडनेकी कोशिश की तो कैसा रहेगा?…” विवेकने सवाल खडा किया और वह इन्सपेक्टरकी प्रतिक्रिया परखनेके लिए उनकी तरफ देखने लगा. इन्स्पेक्टरने सोचते हूए कमरेकी छतकी तरफ देखा और वे कुछ बोलनेही वाले थे तभी शरवरी बिचमेंही बोली.

” लेकिन हमे ना उसका नाम पता है … ना उसका पता… वह क्या करता है यहभी हमे पता नही है … फिर अगर हमने उसे पकडनेकीभी ठान ली तो उसे पकडेंगे कैसे ? …” शरवरीने अपनी आशंका जाहिर की.

अंजलीने शरवरीकी तरफ देखकर मानो उसके बातको मुक संमती दर्शाई.

” इतके दिन हम उसे पकडनेकी कोशीश कर रहे थे…. वे सब कोशिशें एकदम खाली गई ऐसा कहना कुछ उचित नही होगा … क्योंकी अबभी अपनेपास कुछ क्लूज है … एक तो उस ब्लॅकमेलरका हॅंन्ड रायटींग जो हमें सायबर कॅफेके लॉगबुकसे मिला…. दुसरा उसके फिंगर प्रिन्टस जो हमें सायबर कॅफेसेही मिले और तिसरा … यह फोटोग्राफस देखो … ” इन्स्पेक्टर कंवलजीत बोल रहे थे.

अबभी ब्लॅकमेलरको पकडनेकी विवेककी तिव्र इच्छा देखकर मानो इन्स्पेक्टरके शरीरमें फुर्ती दौड रही थी. वे अपने जेबसे दो फोटोग्राफ्स निकालकर वहा इकठ्ठा हूए लोगोंको दिखाकर आगे बोले,

” यह फोटोग्राफ्स उस सायबर कॅफेमें मिले कॉम्प्यूटरके है, जहां फोटोग्राफ लेनेके थोडीही देर पहले ब्लकमेलर बैठा हुवा था .. इस फोटोग्राफ्सकी तरफ थोडा गौरसे देखो … देखो कुछ खयालमें आता है क्या ?” इन्सपेक्टरने वे फोटो सबको देखनेके लिए आगे खिसकाए.

सब लोगोंने वह फोटोग्राफ्स एक एक करके देखे. लेकिन किसीकोभी उन फोटोग्राफ्समें कुछ अलग महसूस नही हुवा. तभी विवेक वे फोटोग्राफ्स देखते हूए मंद मंद मुस्कराया.

” क्या हुवा ?” अंजलीने पुछा.

” जरा देखोतो… गौरसे देखो … इस फोटोग्राफ्समें कॉम्प्यूटरका माऊस कॉम्प्यूटरके बाए तरफ की बजाय दाई तरफ रखा हुवा दिख रहा है …” विवेकने कहा.

” यस यू आर ऍब्सुलेटली राईट” इन्स्पेक्टरने उत्साहभरे स्वरमें कहा.

अब अंजलीभी मंद मंद मुस्कुराने लगी.

” लेकिन इसका क्या मतलब है ?” शरवरी अबभी संभ्रममें थी.

”… इसका एकही मतलब निकलता है की वह ब्लकमेलर लेफ्ट हॅन्डेड है … ” इन्स्पेक्टरने कहा.

” यस दॅट्स राईट ” अब कहा शरवरीभी मुस्कुराने लगी थी.

तभी कॉन्फरंस रुममें रखे हूए फोनची घंटी बजी. फोन अंजलीके बगलमेंही रखा हूवा था. उसने फोन उठाया,

” हॅलो”

” गुड मॉर्निंग अंजली … ” उधरसे नेट सेक्यूराके मॅनेजींग डायरेक्टर मि. भाटीयां बोल रहे थे.

” गुड मॉर्निंग भाटीयाजी…” अंजलीने उतनीही सरगर्मीसे उनका स्वागत किया, ” बोलीए क्या कहते हो ?”

” हमारे यहा हमने एक नेटवर्किंग सॉफ्टवेअर डेव्हलपमेंट कॉन्टेस्ट रखी थी … कॉन्टेस्टचा टॉपीक है इथीकल हॅकींग… उस कॉन्टेस्टमें प्राईज डिस्ट्रीब्यूशन आपके हाथसेही हो ऐसी हमारी इच्छा है … ” उधरसे भाटीयाजी मानो अपना हक जताते हूए बोले.

” आपने बुलाया और हम नही आए ऐसा कभी होगा क्या भाटीयाजी … मै जरुर आऊंगी … प्राईज डिस्ट्रीब्यूशन कब है ?… ” अंजलीने पुछा.

” पुरा प्रोग्रॅम अभी फायनल होनेका है … वैसे वह प्रोग्रॅम टेंटीटीव्हली समव्हेअर अराऊंड धीस मंथ होगा … पुरा प्रोग्रॅम फायनल होतेही आपको वैसे डीटेलमें बताया जाएगा … ” उधरसे भाटीयाजी बोले.

” नो प्रॉब्लेम”

” थॅंक्स”

” मेन्शन नॉट”

” ओके बाय… सीयू”

” बाय”

अंजलीने फोन क्रॅडल वापस रखा और उसने वहा बैठे सब लोगोंपर अपनी नजर घुमाई. उसके चेहरेपर फिरसे मुस्कुराहट दिखने लगी थी.

” मेरे दिमागमें एक आयडीया आया है … अभी नेट सेक्यूराके मॅनेजींग डायरेक्टर मि. भाटीयाजींका फोन था … इथीकल हॅकींगपर वे एक सॉफ्टवेअर डेव्हलपमेंट कॉन्टेस्ट ले रहे है … मुझे यकिन है की अगर इस कॉन्टेस्ट का प्रचार बडे पैमानेपर अगर किया गया और उस कॉन्टेस्ट जितनेवालोंको अगर बडे बडे प्राईजेस रखे गए … तो वह ब्लॅकमेलर इस प्रतियोगीतामें जरुर हिस्सा लेगा …” अंजलीने कहा.

” लेकिन तुम यह सब इतने यकिनके साथ कैसे कह सकती हो ?” विवेकने आशंका जताई.

” पुरे यकिनके साथतो नही… फिरभी … क्रिमीनल सायकॉलॉजीके अनुसार… वह ब्लॅकमेलर अभी अपना आत्वविश्वास और गर्वमें पुरी तरह चुर है … उसतक अगर यह कॉन्टेस्टकी बात पहूचाई गई तो वह उसमें जरुर हिस्सा लेगा … ” इन्स्पेक्टरने अपना अंदाजा लगाया.

सुबह सुबह ऑफीसमें आए बराबर अंजली अपने काममें व्यस्त हो गई. तभी शरवरी कॅबिनमें आ गई.

” प्रतियोगीता कब कलसे शुरु होनेवाली है ना? ” अंजलीने शरवरीसे पुछा.

” हां” शरवरीने एक फाईल ढुंढते हूए जवाब दिया.

” कितने लोगोंके अप्लीकेशन्स आए है ?” अंजलीने पुछा.

” लगभग तिन हजार” शरवरीने उत्तर दिया.

” ओ माय गॉड … इतने लोगोंमें उस ब्लॅकमेलरको ढुंढना यानी … पहाड खोदकर चुहा निकालने जैसा होगा… और वहभी अगर वह इस प्रतियोगीतामें शामील हुवा तो?… नही?” अंजलीने पुछा.

” हां कठिण तो है ही ” शरवरी एक फाईल लेकर शरवरीके सामने आकर बैठते हूए बोली.

तभी अंजलीका फोन बजा. अंजलीने फोन उठाकर अपने कानको लगाया,

” अंजली… मै इन्स्पेक्टर कंवलजित बोल रहा हूं ..” उधरसे आवाज आया.

” मॉर्निंग अंकल….”

” मॉर्निंग … तुम्हे पता तो होगाही की प्रतियोगिताके लिए 3123 अप्लीकेशन्स आए है … उसमें हमने जो लेफ्ट हॅन्डेड और राईट हॅन्डेड जानकारी मंगवाई थी … उसके अनुसार जो लेफ्ट हॅन्डेड लोगोंके है वे 32 अप्लीकेशन्स अलग किए हूए है…. उसमेसें एक लडकेका हॅन्डरायटींग हुबहु मॅच हो रहा है … उसका नाम है अतूल विश्वास… ” उधरसे इन्स्पेक्टरने जानकारी दी.

” गुड व्हेरी गुड… ” अंजली एकदम खुश होते हूए बोली, ” थॅंक्यू अंकल… मै आपके उपकार किस तरह उतार सकुंगी… मुझे तो कुछ समझमें नही आ रहा है …” अंजली खुशीके मारे बोली.

” इतने जल्दी इतना खुश होकर नही चलेगा … अभी तो सिर्फ शुरुवात है … उसे कानुकके शिकंजेमें पकडनेके लिए हमे और काफी मेहनत करनी पडेगी ..” इन्स्पेक्टरने कहा.

” क्यों? … अभी तुरंत हम उसे नही पकड पाएंगे ?” अंजलीने निराश होकर पुछा.

” नही अभी नही … आगे तो सुनो … हमने अभी उसका फोन टॅप करना शुरु किया है .. ताकी उसके और कोई साथीदार होंगे तो उसे हम पकड पाएंगे … और सारे सबुत इकठ्ठा होतेही उसे अरेस्ट करेंगे .. ” इन्स्पेक्टर कंवलजितने कहा.

अंजलीका तो मानो खुन खौल रहा था. उस ब्लॅकमेलरको कब एक बार पकडकर उसे सजा दी जाए ऐसा उसे हो रहा था. उसे फिलहाल वह कुछभी नही कर सकती इस बातका दुख हो रहा था.

लेकिन नही…

मै कुछ तो करही सकती हूं …

यह खबर अगर विवेकको दी जाए तो…..

यह खबर सुनतेही वह कितना खुश हो जाएगा …

उसने फोनका क्रेडल उठाया और वह एक नंबर डायल करने लगी.

पोलिस स्टेशनमें इन्स्पेक्टर कंवलजितके सामने एक पुलिस बैठा हुवा था.

” सर हमने अतुल बिश्वासके सारे फोन कॉल्स टॅप किए है … उनमेंसे यह एक महत्वपुर्ण लगा ..” वह पुलिस सामने रखा टेपरेकॉर्डर शुरु करते हूए बोला.

टेपरेकॉर्डर शुरु हो गया और उसमेंसे वह टेप किया हुवा फोन कॉल सुनाई देने लगा.-

” अलेक्स… मुझे वहां आनेके लिए 7-8 दिन लगेंगे … पैसे संभालकर रखना … मै वहां पहूचनेके बाद हम उसे बाट लेंगे .. ” अतुलने कहा.

” ठिक है .. ” अलेक्सने कहा.

” और हां … अपने कॉम्प्यूटरको पुरी तरहसे फॉरमॅट करना… उसमें कुछभी बाकी रहना नही चाहिए … ”

” ठिक है … तूम इधरकी बिलकुल चिंता मत करो… मै सब संभाल लूंगा ..”

” ओके देन … बाय”

” बाय .. ”

इन्स्पेक्टर कंवलजितने वह संवाद रिवाईंड कर फिरसे बार बार सुना. और फिर वे एक इरादेके साथ खडे होते हूए उस पुलिससे बोले,

”चलो ”

इन्सपेक्टरने भलेही सिर्फ एकही शब्द कहा था, फिरभी वह इशारा उस पुलिसको काफी था. इन्स्पेक्टर आगे आगे और वह पुलिस उनके पिछे पिछे चलने लगे.

रातका समय था. एक अंधेरे कमरेमें अलेक्स कॉम्प्यूटरके सामने बैठकर कुछ कर रहा था. कमरेमें जोभी कुछ उजाला था वह उस मॉनिटरकाही था. उस मॉनिटरके रोशनीमें अलेक्सका भद्दा चेहरा और ही भयानक दिख रहा था. तभी दरवाजेपर दस्तक हूई. अलेक्स उठ खडा हूवा,

लगता है आगए साले बेवडे…

उसने सोचा. यह उसके रातमें इकठ्ठा होनेवाले दोस्तोंके आनेका वक्त था. वे इकठ्ठा होकर देर रात तक पिते थे और गप्पे मारते बैठते थे. और इतनेमें उसके पास पैसा आनेसे उसके यहां आनेवाले दोस्तोंकी गिनती बढती जा रही थी.

” कोण है बे?” मस्तीमें बोलते हूए उसने दरवाजा खोला.

और उसके चेहरेका रंग फिका पड गया. उसके चेहरेकी मस्ती पुरी तरहसे उड गई थी. उसके सामने दरवाजेमें इन्स्पेक्टर कंवलजीत और और पांच छे पुलिस खडे थे. उनमेंसे दो लोग ड्रेसमें नही थे. वह कुछ सोचे और कुछ हरकत करे इसके पहलेही पुलिसने उसे दबोचकर अरेस्ट किया.

” मैने क्या किया ?” अलेक्स अपने चेहरेपर मासुमियतके भाव लाकर बोला.

कोई कुछभी प्रतिक्रिया नही दे रहा है यह देखकर वह फिरसे बोला,

” मुझे क्यों अरेस्ट किया गया … कुछ तो कहोगे ?”

फिरभी कोई कुछ नही बोला.

” ऐसे आप कुछभी गलती ना होते हूए किसीको अरेस्ट नही कर सकते … यह कानुनन अपराध है ” वह अपनी आवाज बढाकर बोला.

फिरभी कोई कुछ बोलनेके लिए तैयार नही था, यह देखते हूए वह चिढकर चिल्लाया,

” मुझे क्यो अरेस्ट किया गया है ?”

” पता चलेगा… जल्दीही पता चलेगा ” इन्सपेक्टरका एक साथी ताना मारते हूए धीमे स्वरमें बोला.

अब कंधा उचकाकर, चेहरेपर जितने हो सकते है उतने मासुमियतके भाव लाकर, वह उनकी हरकते निहारने लगा. एक बलवान पुलिस उसके हाथोमें हथकडीयां पहनाकर उसे घरके अंदर ले गया. बाकी सारे पुलिस घरमें सब तरफ फैलकर घरकी तलाशी लेने लगे. उनमेंसे दो लोग ड्रेसमें नही थे, वे कॉम्प्यूटर एक्सपर्ट थे. उन्होने तुरंत कॉम्प्यूटरपर कब्जा किया. कॉम्प्यूटर शुरुही था इसलिए अपराधीसे पासवर्ड हासिल करना या उस कॉम्प्यूटरका पासवर्ड ब्रेक करना, यह सब टल गया था. पुलिसकी टीम पुरे घरकी और आसपासकी तलाशी लेते हूए जब कॉम्प्यूटरके इर्द गिर्द इकठ्ठा हो गई, तब कॉम्प्यूटरपर बैठे एक्सपर्टमेंसे एकने इन्स्पेक्टर कंवलजितसे कहा,

” सर इसमें तो कुछभी नही है ”

” घरमेंभी कुछ नही मिल रहा है ” टीममेंसे एकने जोड दिया.

” कुछ होगा तो मिलेगा ना … मुझे लगता है आप लोग गलत घरमें घुस गए हो ” अलेक्सने बिचमेंही कहा.

” ठिकसे देखो .. उसने अगर हार्डडिस्क फॉरमॅट की हो तो अपने रिकव्हरी टूल्स रन करो ” इन्सपेक्टरने कहा.

” यस सर” कॉम्प्यूटर एक्सपर्ट बोला.

टिममेंसे कुछ पुलिस अबभी घरमें सामान उलट पुलटकर देख रहे थे. तभी एक पुलिस वहा इन्सपेक्टरके पास एक बॅग लेकर आया. उसने बॅग खोली तो अंदर कपडे थे. उसने कपडेभी बाहर निकालकर देखा, लेकिन अंदर कुछभी नही था.

” देखो … घरका कोना कोना छान मारो …” इन्स्पपेक्टर उन्हे मायूस हुवा देखकर उनका हौसला बढानेके उद्देशसे बोला.

” यस सर” उस पुलिसने कहा और फिरसे घरमें ढुंढने लगा.

तभी कॉम्प्यूटर एक्स्पर्टका उत्साहीत स्वर गुंजा ” सर मिल गया ”

सारे लोग अपने अपने काम छोडकर कॉम्प्यूटरके इर्द गिर्द जमा हो गए. और वे कॉम्प्यूटरके मॉनिटरकी तरफ बडी आस लेकर देखने लगे. उनमेंसे सिनियर कॉम्प्यूटर एक्सपर्टने कॉम्प्यूटरपर एक फाईल खोली. शायद उसने वह रिकव्हरी टूल्सका इस्तेमाल कर रिकव्हर की होगी. वह फाईल यानी ब्लॅकमेलरने पहले मेलमें अंजलीको भेजा हुवा अंजली और विवेकके प्रणयका फोटो था. इन्सपेक्टरने अब गुस्सेसे मासूम बननेकी कोशीश कर रहे अलेक्सकी तरफ देखा. अलेक्सके चेहरेसे मासूमियतभरे भाव कबके उड चुके थे. उसने अपनी गर्दन झुकाई थी. इन्स्पेक्टरने अपने साथीसे इशारा करतेही वह पुलिस अरेस्ट किए हुए अलेक्सको बाहर ले गया. अलेक्स चुपचाप कुछभी प्रतिकार ना करते हूए उस पुलिसके पिछे पिछे चलने लगा.

अलेक्सको उस पुलिसने वहांसे बाहर ले जातेही, इन्स्पेक्टर कंवलजितने अपना मोबाईल लगाया –

” अंजली गुड न्यूज… ”

… पुरी कहानी सुनाकर इन्स्पेक्टरने एक लंबी सांस ली. स्टेजपर इन्स्पेक्टर कंवलजित, अंजली, नेट सेक्यूराके डायरेक्टर और ऍन्कर खडे थे. पुरी कहानी खत्म होगई थी, फिरभी लोग अभीभी शांत थे. हॉलमें मानो शमशानसी चुप्पी फैली हुई थी. तभी अंजलीको हॉलके पिछले हिस्सेमें विवेक खडा हुवा दिखाई दिया. अंजलीने हात हिलाकर उसे स्टेजपर बुलाया. विवेकभी लगभग दौडते हूएही स्टेजपर गया. अंजलीने उसका हाथ अपने हाथमें लेकर उसे अपने पास खडा किया. अबतक जो सब लोग शांत थे वे अब तालियां बजाने लगे. और तालियाभी इतनी की मानो उन्होने सारा हॉल सरपर लिया हो. तालियां रुकनेका नाम नही ले रही थी.

अबभी विवेकका हाथ अंजलीके हाथमें कसकर पकडा हुवा था. अंजलीने दुसरा हाथ दिखाकर लोगोंको शांत रहनेका इशारा किया और वह माईक हाथमें लेकर बोलने लगी –

” हमारा प्रेम… यां यू कहिए … हमारा इ – लव्ह … लगा था कमसे कम इसमें तो बाधाएं नही आयेंगी .. लेकिन ऐसा लगता है की प्यार की राहमें हमेशा बाधाए होती है …”

अंजलीने हॉलमें सब तरफ अपनी नजरे घुमाई और वह विवेकका हाथ और कसकर पकडते हूए आगे बोली, ” … लेकिन कुछभी हो … आखिर जित प्यारकीही होती है ”

लोगोंने तालिया बजाते हूए फिरसे पुरा हॉल मानो अपने सरपर उठा लिया.

अब विवेकने माईक अपने हाथमें लिया और लोगोंको शांत रहनेका इशारा करते हूए वह बोला,

“” हमारे दोनोके प्रेमकहानीसे आप लोग एक सिख जरुर ले सकते है की … ” एक क्षण स्तब्ध रहकर वह आगे बोला, ” की बुरेका अंत आखिर बुरेमेंही होता है …”

फिरसे लोगोंने तालियां बजाकर मानो उसके कहनेको अपनी सहमती दर्शाई. तभी एक कंपनीका आदमी स्टेजके पिछले हिस्सेसे स्टेजपर आ गया. उसकी चारो ओर घुमती हूई आंखे स्टेजपर किसीको ढूंढ रही थी. आखिर उसे कंपनीके मॅनेजिंग डायरेक्टर भाटीयाजी दिखतेही वह उनके पास गया और उनके कानमें कुछ बोलने लगा. वह जोभी बोल रहा था वह सुनकर भाटीयाजींके चेहरेपर अचानक हडबडाहट, आश्चर्य और डरके भाव दिखने लगे. उनके चेहरेपर वे भाव देखकर स्टेजपर उपस्थित बाकी लोगोंके चेहरेपरभी भाव बदल गए थे. स्टेजपर जो हल्का फुल्का खुशीका माहौल था वह एकदमसे तनावमें बदल गया था. उस कंपनीके आदमीने भाटीयाजीको सब बतानेके बाद भाटीयाजीने स्टेजपर इधर उधर देखा और वे इन्स्पेक्टर कंवलजितकी तरफ बढने लगे.

अब भाटीयाजी इन्स्पेक्टरके कानमें कुछ बोल रहे थे. इन्स्पेक्टरकीभी वही दशा हो गई थी. उनके चेहरेपरभी हडबडाहटभरे आश्चर्य और डरके भाव आगए थे. तबतक अंजली, विवेक और वह ऍन्करभी इन्स्पेक्टरके पास पहूंच गए.

” क्या हुवा ?” अंजलीने एकबार इन्स्पेक्टरकी तरफ तो दुसरी बार भाटीयाजीकी तरफ देखते हूए पुछा.

” जाते हूए वह अपना आखरी दांव खेल गया है ” इन्सपेक्टरने बताया.

” लेकिन क्या हुवा ?” विवेकने पुछा.

” थोडा खुलकर तो बताओ ?” अंजलीने भाटीयाजीकी तरफ देखते हूए पुछा.

” खुलकर बोलनेके लिए अब वक्त नही है … चलो मेरे साथ चलो ” भाटीयाजी अब जल्दी करते हूए बोले. और तेजीसे स्टेजके पिछले हिस्सेसे उतरकर उस कंपनीके आदमीके साथ अपने ऑफीसकी तरफ जाने लगे.

इन्स्पेक्टर, अंजली, और विवेकभी चुपचाप उनके पिछे चलने लगे. वह ऍन्कर उनके पिछे जाएकी ना जाए इस दुविधामें स्टेजपरही रुका रहा, क्योंकी अबतक हॉलमें उपस्थित लोगोंमे खुसुरफुसुर और गडबडी शुरु हो गई थी. हकिकतमें क्या हुवा यह जाननेकी जैसे उन लोगोंकी उत्सुकता बढ रही थी. लेकिन जितने वे लोग अनभिज्ञ थे उतनाही वह ऍन्करभी अनभिज्ञ था. लेकिन क्या हुवा यह जाननेसे बडी जिम्मेदारी अब उस एन्करके कंधेपर आन पडी थी – किसीभी तरह उन लोगोंको शांत करके वहां उस हॉलसे सही सलामत बाहर निकालनेकी.

कंपनीके उस आदमीने कंपनीके मॅनेजींग डायरेक्टरके कानमें कुछ खुसफुसाकर प्रोग्रॅमका सारा मुडही बदल दिया था. डायससे निचे उतरकर कंपनीके मॅनेजिंग डायरेक्टर भाटीयाची सिधे अपने कॅबिनके तरफ जाने लगे. भाटीयाजींको वह फासला मानो बहोत दूर लग रहा था. डायसकी सिढीयां उतरकर और उनके ऑफीसकी सिढीयां चढते हूए पहलीबार उन्हे थकावट महसूस हो रही थी. उनके पिछे इन्स्पेक्टर कंवलजित और सबसे पिछे असमंजसमें चल रहे अंजली और विवेक थे. सबलोग जब भाटीयाजींके कॅबिनमें घुस गए, तब वहां पहलेसेही कुछ लोगोंने कॉम्प्यूटरके इर्दगिर्द भिड की थी. भाटीयाजीभी उस भिडमें शामिल हो गए और कॉम्प्यूटरके मॉनिटरकी तरफ आश्चर्यसे देखने लगे. अंजली और विवेकने जब उस भिडमें घुसकर उस मॉनिटरकी तरफ देखा. तब कहां उनको सारे मसलेका अवलोकन हुवा. उनके मनमें चल रही सारी शंकाए एक पलमें नष्ट होकर वह जगह अब चिंता और डरने ली थी. मॉनिटरपर एक ब्लींक हो रहा मेसेज दिख रहा था – All the server data and computer Data has been deleted. To recover enter the password’ और मॉनिटरपर उलटी गिनती दिखा रही टाईम बॉम्बके घडी जैसी एक घडी दिख रही थी. – 5hrs… 10mins… 26secs

“” ओ माय गॉड… ” भाटीयाजींके आश्चर्यासे खुले रहे मुंहसे निकल गया.

उनका पुरा बदन पसिना पसिना हो गया था और चेहरेपरभी पसिनेकी बुंदे दिख रही थी. सब डाटा अगर डिलीट हूवा तो होनेवाले नुकसानके कल्पनाभरसेही वे घबरा गए थे.

” सर यही नही तो कंपनीके सारे कांम्प्यूटरपर यह मेसेज आया है … ” कंपनीका एक आदमी बोला. और फिर सब लोगोंको डॆव्हलपमेंट सेंटरकी तरफ ले जाते हूए बोला, ” सर जरा इधरभी देखिए ..”

उसके पिछे सारे लोग कुछ ना बोलते हूए जा रहे थे, मानो समशानमें जा रहे हो.

डेव्हलपमेंट सेंटर यानी एक बडा हॉल था और वहां छोटे छोटे क्यूबिकल्स बनाकर हर डेव्हलपरकी तरफ ध्यान दिया जा सके और सबको प्रायव्हसीभी मिले इसका खास ध्यान रखा गया था. वहां सब कॉम्प्यूटरके मॉनिटर्स शुरु थे और सब मॉनिटरपर एकही मेसेज था – All the server data and computer Data has been deleted. To recover enter the password’

और यहांभी सब कॉम्प्यूटर्सपर उलटी गिनती चल रही थी.

5hrs… 3 mins… 2 secs

” सचमुछ गुनाहगार जाते हूए अपनी आखरी चाल चल गया है ” विवेकने कहा.

” इट्स अ टीपीकल एक्सांपल ऑफ ईटेररीझम” अंजलीने कहा.

” हमारे तो कंपनीका अस्तित्वही खतरेमें आया है ” भाटीयाजी अपने चेहरेसे पसिना पोंछते हूए बोले.

” आप चिंता मत किजिए … पासवर्ड गुनाहगारसे कैसे उगलना है यह हमारा काम है ” इन्स्पेक्टरने कहा.

तभी दो पुलिस हथकडी पहने हूए अतूलको वहां लेकर आ गए. इन्स्पेक्टरने पुरा मसला समझमें आतेही उसे वापस यहां लानेके लिए अपने साथीयोंको पहलेही वायरलेसपर बताया था. अतूल धीमे मस्ती भरी चालसे मंद मंद मुस्कुराते हूए इन्स्पेक्टरकी तरफ चलने लगा.

” पासवर्ड क्या है ?…” इन्स्पेक्टरने उसे कडे स्वरमें पुछा.

इन्स्पेक्टरने ‘साम दाम दंड भेद’ से पहले ‘दंड’ का इस्तेमाल करनेकी ठान ली थी ऐसा दिख रहा था.

” जल्दी क्या है … पहले मेरी हथकडीतो खोलो … अभी और 5 घंटे बाकी है ” अतूल हसते हूए शांत स्वरमें बोला.

इन्स्पेक्टर गुस्सेसे उसे मारनेके लिए उसकी तरफ बढे वैसे अतूल चेहरेपर कुछभी डर ना दिखाते हूए वैसेही खडा रहते हूए, उनकी आखोंमें आखे डालकर बोला, ‘ अं हं… इस्न्पेक्टर यह गल्ती कभी ना करना … ऐसी गलती करोगे तो मै पासवर्ड तो दुंगा लेकिन वह पासवर्ड देनेके बाद … तुम्हारेपास जो 5 घंटे बाकि है वहभी नही रहेंगे….. पुरा डाटा वह पासवर्ड देनेके बाद तुरंत नष्ट हो जाएगा …”

इन्स्पेक्टरने उसपर उठाया हुवा हाथ पिछे लिया. उन्हे अहसास हो गया था की उसके बोलनेमें तथ्य था.

” खोलो मेरी हथकडी ” अतूलने फिरसे कहा.

इन्स्पेक्टरने उसे लेकर आए पुलिसको इशारा किया. उन्हे इशारा मिलतेही उन्होने चूपचाप उसकी हथकडी खोली. अतूलने अपनी खुली हूई कलाइयां एक के बाद एक दुसरे हाथमें लेकर घुमाई और वह अपने दोनो हाथ पिछे ले जाते हूए जम्हाई भरते हूए, उसे मिली हूई रिहाईका आनंद व्यक्त करते हूए बोला,

” हां अब देखो… कैसे खुला खुला लग रहा है ”

” पासवर्ड क्या है ?” फिरसे इन्स्पेक्टरका कडा स्वर गुंजा.

” इन्स्पेक्टर तुम्हे लगता है, की मै इतने आसानीसे और इतने जल्दी तुम्हे पासवर्ड बताऊंगा ?” अतूल इन्स्पेक्टरकी आंखोसे आंखे मिलाते हूए बोला.

” फिर तुम्हे और क्या चाहिए ?” इन्स्पेक्टरने अपना स्वर अबभी कडा रखते हूए पुछा.

” बस कुछ नही … सिर्फ मेरे पुरे रिहाईका इंतजाम .. ” अतूलने कहा.

” मतलब ?” इतनी देर से चुप था विवेक पहली बार बोला.

” अरे हां … अच्छा हुवा तु बोला … तुझे मेरे साथ आना पडेगा … मुझे यहांसे दूर … जहां ये लोग फिरसे पहूंच नही पाए ऐसी जगह मुझे पहुचानेकी जिम्मेदारी अब तुम्हारी … और फिर वहांसे मै इन्हे मोबाईलसे वह पासवर्ड बताऊंगा … ” अतूलने कहा.

” हमें क्या मुरख समझ रखा है ?” इन्स्पेक्टर फिरसे गुर्राया.

” इन्स्पेक्टर यह वक्त अब कौन मुरख है या बननेवाला है यह तय करनेका नही है … संक्षिप्तमें कहा जाए तो … यू डोन्ट हॅव चॉईस… तुम्हे मेरे कहे अनुसार करनेके अलावा कोई चारा नही है ” अतूलने कहा.

इन्स्पेक्टरने एक बार विवेककी तरफ तो दुसरी बार अतूलकी तरफ देखा.

” ठिक है ” विवेकने दृढतासे कहा.

इतनी बडी कंपनीका अस्तित्व और भविष्य खतरेमें आया था, इसलिए इन्स्पेक्टरको अतूलका सबकुछ सुननेके अलावा कोई रास्ता नही था. और उससे कितना नुकसान हो सकता है यह भाटीयाजींके पसिनेसे लथपथ चेहरेपर साफ दिख रहा था. वैसे देखा जाए तो भाटीयाजी बहुत हिम्मतवाले या यू कहा जाए की मोटी चमडीवाले आदमी थे. और उनके चेहरेपर और पुरे बदनमें पसिना आए मतलब कंपनीका अस्तित्व बुरी तरफ दाव पर लगा था यह स्पष्ट था.

अतूलने बताए अनुसार विवेकभी उसके साथ उसे उस जगहसे दूर छोडनेके लिए तैयार हुवा था. इसलिए उसके साथ कौन जाएगा यह एक बडी गुथ्थी सुलझ गई थी. क्योंकी उसके साथ अकेला जाना खतरेसे खाली नही था, यहांतककी खुदकी जान जानेकाभी खतरा था और वह किसे अपनेसाथ कोई हथीयार ले जाने देगा इतना मुर्ख नही था. लेकिन विवेकको उसके साथ अकेले भेजनेके लिए अंजलीका दिल नही मान रहा था. वह वैसे कुछ बोली नही लेकिन उसके चेहरेसे सबकुछ झलक रहा था. एक तरफ भाटीयाजींकी कंपनी उसकी वजहसेही खतरेमें आ गई थी और उसनेही विवेकको भेजेनेके लिए इन्कार करना उसे ठिक नही लग रहा था. अतुलको जाल डालकर फांसनेके काममें भाटीयाजींका बहुमोल योगदान था. और उन्होने उस बातके खतरेका अहसास होते हूए भी उसे पुरा सहयोग दिया था. और अब उनकी कंपनी खतरेमें आनेके बाद मुंह मोड लेना उसे जच नही रहा था.

विवेकनें उसकी दुविधा जानते हूए उसे अपनी बाहोमें लेते हूए थपथपाकर कहा.

” डोन्ट वरी हनी… आय वुल बी फाईन”

अंजली कुछभी बोली नही, लेकिन आखीर अपने दिलपर पत्थर रखकर वह उसे जाने देनेके लिए तैयार हो गई.

एक तरहसे इन्स्पेक्टर कंवलजितनेही उसे धिरज बंधाकर तैयार किया था.

भाटीयाजी, अंजली, विवेक और इन्स्पेक्टर कंवलजित स्टेजसे उतरकर वहांसे निकल जानेके बाद हॉलमें इकठ्ठा हूए लोगोंको शांतीसे बाहर निकालनेका काम ऍन्करने कुछ पुलिसकी मदत लेते हूए खुब निभाया था. अब कंपनीके कंपाऊंडके अंदर पुलिस, कंपनीके लोग, विवेक, अंजली और वह गुनाहगार के अतिरिक्त कोई नही था. कुछ लोगोंको इस पुरे मसलेकी खबर शायद लगी थी, क्योकी वे पुलिसकी डरकी वजहसे कंपाऊंडके बाहर जाकर इधर उधर छिपते हूए उधरही देख रहे थे. और वेभी लोग बहुत कम थे. इसलिए अब गुनाहगारको संभालनेमें या उसकी मांगे सुन लेनेमें इन्स्पेक्टर कंवलजितको जादा तकलिफ नही हो रही थी. अगर लोग अबभी कंपाऊंडके अंदर या हॉलमें होते तो शायद इस गुनाहगारको संभालनेसे उन लोगोंको संभालना जादा तकलिफदेह होता था.

आखिर अतूलको उसके कहे अनुसार कही बहुत दुर ले जाकर छोडनेके लिए पुलिस राजी हो गई. सब लोग कंपनीके बिल्डींगके बाहर खुले मैदानमे इकठ्ठा हुए थे. मैदानमें पुलिसकी और बाकी बहुतसारी गाडीयां खडी थी. अतूलने वहां खडी पाच छे गाडीयोंके पास जाकर गौरसे देखा और उनमेंसे एक गाडीके छतपर थपथपाते हूए पुछा,

” यह गाडी किसकी है ?”.

वह कंपनीके एक ऑफिसरकी गाडी थी. वह ऑफिसर डरते हूएही सामने आते हूए बोला, ” मेरी है ”

” चाबी दो ” अतूलने फरमान छोडा.

भाटीयाजींने उस ऑफीसरकी तरफ देखते हूए आंखोसेही उसे वैसा करनेके लिए कहा. उस ऑफीसरने चुपचाप अपने पॅन्टकी जेबसे चाबी निकालकर अतूलके हवाले कर दी.

” हम इस गाडीसे जाएंगे ” अतूलने एलान किया.

विवेकने एक कडा कटाक्ष अतूलकी तरफ डालते हूए कहा, ” पहले तुम्हारा मोबाईल इधर दो ”

अतूलने कुछ क्षण सोचा और अपना मोबाईल निकालकर विवेकके पास देते हूए बोला, ” गुड मुव्ह”

विवेकने वह मोबाईल लेकर इन्स्पेक्टरके पास दिया.

” अब तुम्हारा मोबाईल इधर लाओ ” अतूलने कहा.

विवेकने अपना मोबाईल निकालकर अतूलके पास दिया. अतूलने गाडीकी डीक्की खोली और वह मोबाईल डिक्कीमें डाल दिया. लेकिन उसे क्या लगा क्या मालूम, उसने वह मोबाईल फिरसे डीक्कीसे बाहर निकाला और उसे ऑफ कर फिरसे डिक्कीमें डालते हूए डिक्की बंद की.

” गुड मुव्ह” अब विवेककी बारी थी.

अतूल उसकी तरफ देखकर मक्कारकी तरह मुस्कुराते हूए बोला, ” हां अब सब ठिक है ”

” हू विल ड्राईव्ह द व्हेईकल?” विवेकने गाडीके पास जाते हूए पुछा.

” ऑफ कोर्स मी” अतूलने कहा और गाडीके ड्राईव्हींग सिटकी तरफ जाने लगा.

लेकिन अचानक अतूल बिचमेंही रुकते हूए बोला , ”वेट’

विवेकभी रुक गया. अतूल मुस्कुराते हूए विवेकके पास गया और उसकी उपरसे निचेतक पुरी तलाशी लेने लगा. शायद वह उसके पास कोई हथीयार है क्या यह देख रहा था.

” हां अब ठिक है ” अतूल ड्रायव्हींग सिटकी तरफ जाने लगा वैसे विवेकने कहा,

” वेट… दॅट अप्लाईज टू यू टू”

विवेकनेभी अतूलके पास जाकर उसकी पुरी तलाशी ली.

” हां अब ठिक है ” विवेकने कहा और गाडीकी तरफ जाने लगा वैसे अतूल इन्स्पेक्टरकी तरफ देखते हूए बोला,

” नही अभीभी सब ठिक नही है … ”

इन्सपेक्टर कुछ ना बोलते हूए अतूलकी तरफ देखने लगा.

” इन्स्पेक्टर अगर मुझे किसीभी क्षण खयालमें आगया की हमारा पिछा हो रहा है … या हमारी जानकारी कही भेजी जा रही है … तो ध्यानमें रखो … मै पासवर्ड तो दुंगा … लेकिन वह गलत पासवर्ड होगा … जो दिए बराबर तुम्हारे कंपनीका सारा डाटा तुरंत नष्ट हो जाएगा … समझे ?” अतूलने कडे स्वरमें ताकिद दी.

” डोन्ट वरी यू विल नॉटबी … फालोड… प्रोव्हायडेड यू गिव्ह अस द करेक्ट पासवर्ड…” इन्स्पेक्टरने कहा.

” दट्स लाईक अ गुड बॉय” अतूल गाडीके ड्रायव्हीग सिटपर बैठते हूए बोला.

अतूलने गाडी शुरु करके विवेककी तरफ कडी नजरसे देखा. विवेक उसकी बगलवाले सिटपर चुपचाप आकर बैठ गया और अंजलीकी तरफ देखते हूए उसने गाडीका दरवाजा खिंच लिया.

अतूलने गाडी रेस की और कंपनीके कंपाऊंडके बाहर ले जाकर तेजीसे रास्तेपर दौडाई.

कंपनीके मॅनेजींग डायरेक्टर भाटीयाजी, इन्स्पेक्टर कंवलजित और अंजली अभीभी अस्वस्थाके साथ कॉम्प्यूटरके मॉनिटरकी तरफ देख रहे थे. मॉनिटरपर अबभी वही मेसेज ब्लींक हो रहा था. – ‘ All the server data and computer Data has been deleted. To recover enter the password’ लेकिन मॉनिटरपर उलटी गिनती चल रही टाईम बॉम्बके घडी जैसी घडी दर्शा रही थी – 0 hrs… 20mins… 20secs.

घडीमें दिख रहे शुन्य घंटेने सब लोगोंमे एक अस्वस्थता, एक डर फैलाया था.

” अब तो सिर्फ 20 मिनटही बाकी है … अबभी उसका फोन कैसे नही आया? ” अंजलीने कहा.

वह भलेही उपरसे नही दिखा पा रही थी, उसे कंपनीके भले बुरेसे विवेककी जादा चिंता थी, और वह लाजमीभी था. इन्स्पेक्टर कंवलजितने अंजलीके कंधेपर अपना धीरजभरा हाथ रखते हूए कहा, ” धीरज रखो … फोन इतनेमेंही आएगा ”

” लेकिन अगर उसका फोन नही आया तो हमारे कंपनीका क्या होगा ?” भाटीयाजीने चिंताभरे स्वरमें कहा. यह उन्होने पुछा हुवा सवाल, सवालसे जादा चिंता दर्शा रहा था, इसलिए इस सवालको जवाब देनेके झमेलेंमे कोई नही पडा. और देंगे तो क्या जवाब देंगे ? तभी कंपनीके चार पाच कर्मचारी वहां जल्दी जल्दी आगए.

” क्या लिया क्या बॅक अप?” भाटीयाजींने उन्हे अधीरतासे पुछा.

” नही सर … उसने प्रोग्रॅमही इस तरहसे लिखा है की नेटवर्ककी सब आवाजाही बंद करके रखी है ” उनमेंसे एक कर्मचारी बोला.

” साला यह कॉम्प्यूटर जितना काम आसान बनाता है कभी कभी उतनाही मुश्कील बना देता है ” भाटीयाजी चिढकर बोले.

भाटीयांजी चिढनेकी वजहभी वैसी ही थी. उस नेटवर्कमें सॉफ्टवेअरके रुपमें उस कंपनीके क्लायंट्सके करोडो रुपए फंसे हूए थे. और वह सारा डाटा अगर डीलीट हुवा तो करोडो रुपयोंका नुकसान होना था. वह कंपनी वे सॉफ्टवेअर फिरसे डेव्हलप कर नही सकती थी ऐसी बात नही थी. लेकिन वह सॉफ्टवेअर डेव्हलप करनेके लिए लगनेवाला वक्त और कंपनीने लाखो कर्मचारीयोंकी मेहनतपर पाणी फेरनेवाला था. और डिलेव्हरी वक्तपर ना देनेसे कंपनीका नाम खराब होकर उनके कुछ ऑर्डर्स कॅन्सलभी हो सकते थे, वह अलग. इन्स्पेक्टर कंवलजितकी भाटीयाजींको धीरज बंधानेकी इच्छा हुई लेकिन हिंम्मत नही बनी. क्योंकी अब उन्हे खुदकोभी अतूलका फोन आएगा की नही इस बारेमें आशंका हो रही थी.

” कॅन समबडी ट्राय ऑन द मोबाईल” एक कर्मचारीने सुझाया.

” मै कबसे ट्राय कर रही हूं … लेकिन ‘स्विच्ड ऑफ’काही मेसेज आ रहा है ” अंजलीने कहा.

क्योंकी वह विवेकने हालहीमें खरीदा हुवा मोबाईल था और उसका नंबर अंजलीके पास था.

अतूल गाडी चला रहा था और उसके बगलमेंही विवेक बैठा हुवा था. इतने देरसे दोनोंभी चुपचाप थे. अतूल तेडे मेडे रस्तेपर इधर उधर गाडी मोडते हूए गाडी चला रहा था और विवेक रास्तेपर वह कहां गाडी ले जा रहा है और उसकी कहां भागनेकी मनिषा है यह समझनेकी कोशीश कर रहा था. वैसे बिच बिचमें अतूल विवेकको रास्ता पुछ रहा था, लेकिन जितना अतूल था उतनाही अनभिज्ञ विवेकभी था. और जब उसके यह खयालमें आगया उसके चेहरेपर एक हंसी दिखने लगी थी और उसने उसे रास्ता पुछनाभी बंद किया. विवेकको रास्ता मालूम ना होना यह बात अतूलके लिहाजसे फायदेमंदही थी. तभी अतूलने प्रमुख रास्तेसे अपनी गाडी एक निर्जन प्रदेशके लिए मोड दी.

” इधर किधर जा रहे है हम … वहांसे मोबाईलका सिग्नल नही मिलेगा शायद ” विवेकने कहा.

अतूल उसकी तरफ देखकर अजिब तरहसे सिर्फ मुस्कुरा दिया. रास्ते से काफी मोड लेनेके बाद अचानक अतूलने जोरसे ब्रेक दबाते हूए अपनी गाडी रोक दी और वह गाडीसे उतर गया. विवेकभी गाडीसे उतरकर सिधा डीकीकी तरफ चला गया. डीकी खोलकर पहले उसने मोबाईल बाहर निकालकर स्वीच ऑन करके देखा. मोबाईलपर आनेवाले सिग्नल्स देखकर वह राहतकी सांस लेते हूए बोला, ” सिग्नल्स तो आ रहे है ”

अतूल चलते हूए गाडीके दुसरे तरफसे विवेकके पास गया.

” हं अब उन्हे पासवर्ड बता दे ” विवेक मोबाईल उसके पास देते हूए बोला.

” अरे बताते है भाई … इतनी जल्दी किस बातकी ” अतूल कंधे उचकाकर बेपरवाही से बोला.

” नही ,… अब सिर्फ दस मिनिटही बचे हूए है ”

विवेक अतूलपर बहुत भडक गया था. लेकिन वह अपने आपपर नियंत्रण करते हूए जादासे जादा शांत रहनेकी कोशीश कर रहा था, क्योंकी शांतीसेही काम होने वाला था.

” दस मिनट … कॉम्प्यूटरके लिए बहुत है … तुम्हारे जानकारीके लिए बताता हूं … कॉम्प्यूटरमें वक्त नॅनोसेकंडमें गिना जाता है ” अतूलने कहा.

विवेकको उससे कॉम्प्यूटरके बारेमें जानकारी सुननेकी बिलकुल इच्छा नही थी. इस वक्त ऐसी बाते सुनकर विवेक अपने गुस्सेको काबू नही रख पा रहा था.

” कॉम्प्यूटरके लिए दस मिनट बहुत होंगे… मेरे लिए नही ” विवेक चिढकर बोला.

” हां वह भी सही है ” अतूल उसके पास जाते हूए बोला.

अतूल अब विवेकके एकदम सामने खडा होकर उसकी आखोंमें आखे डालकर देखते हूए बोला,

” तुम्हे पासवर्डही चाहिए ना ?”

” हां … और बहभी डाटा डिलीट होनेके पहले ” विवेक फिरसे चिढकर ताना मारते हूए बोला.

” अरे हां … वह डाटा डिलीट होनेके बाद पासवर्डकी क्या जरुरत ?” अतूल अपने आपसेही जोरसे हंस दिया.

और एकदम अपनी हंसी रोककर बोला, ” लेकिन पहले तुम्हारे पासका हथीयार मेरे हवाले कर दो ”

विवेकने उसकी तरफ चौंककर देखते हूए पुछा, ” हथीयार ?… मेरे पास कोई हथीयार नही .. तुमनेही तो निकलते वक्त मेरी तलाशी ली थी. ”

” मि. विवेक … मुझे क्या इतना बेवकुफ समझते हो ?… ” अतूल मोबाईल लगाते हूए बोला. विवेक कुछ नही बोला.

अतूलका मोबाईल लगा था और उधरसे इन्स्पेक्टर मोबाईलपर थे. ” अतूल पासवर्ड क्या है ?” उन्होने फोन लगतेही पुछा.

” इन्स्पेक्टर थोडा धीरज रखो … पहले इधरका एक काम निपट लूं और फिर तुम्हे पासवर्ड बताता हूं ” अतूल फोनपर बोला और उसने चलता हुवा मोबाईलही गाडीके बोनेटपर रख दिया.

” मैने सुना है की आजकल तुम्हारी पी एच डी चल रही है ” अतूलने विवेकसे पुछा.

फिरभी विवेक कुछ नही बोला.

” मुझे एक बात नही समझमें आती, इतनी अमीर लडकीको फांसनेके बाद तुम्हे पिएचडीकी क्या जरुरत है ?” अतूलने आगे पुछा.

विवेक कुछभी बोलनेके लिए तैयार नही था, सच कहे तो वह बोलनेके मन:स्थितीमें नही था.

” तुम्हारे पी एच डी का सब्जेक्ट क्या है ?” अतूलने एकदम गंभिर होते हूए पुछा.

विवेक उसके इस असम्बध्द सवालको कुछ जवाब देना नही चाहता था.

” तुम्हारे पी एच डी का सब्जेक्ट क्या है ?” अतूलने अब कडे स्वरमें पुछा.

विवेकने पहले उसकी आखोंमे देखा. वह इस सवालके बारेमें सिरीयस दिख रहा था.

” अनकन्व्हेन्शनल वेपन्स” विवेकने कंधे उचकाकर जवाब दिया.

” अनकन्व्हेन्शनल वेपन्स … हूं … तुम्हारे जुते बताओ.. निचेसे ” अतूलने मांग की.

विवेकको उसके सवालका उद्देश अब पता चल चुका था. उसे अबभी उसके पास कोई हथीयार होनेकी आशंका थी. विवेकने अपना दाया जुता वैसेही पैरमें रखते हूए उलटा कर बताया. अतूलने गौरसे देखा. वहां कुछ होनेके निशान तो नही दिख रहे थे.

” अब बाया बताओ ” अतूलने फिरसे आदेश दिया.

विवेकने थोडी हिचकिचाहट जताई तो वह चिल्लाया, ” कम ऑन क्वीक”.

विवेकने बाया जुताभी उलटा कर बताया. अतूलने गौरसे देखा. वहांभी कुछ नही था. लेकिन अब अतूल सोचमें पड गया. उसे विवेकके पास कुछ हथीयार होनेका पुरा विश्वास था.

” रुको … हात उपर करो …” अतूल उसके पास जाते हूए बोला.

विवेकने दोनो हाथ उपर किए. और अतूल उसके जेबसे एक एक सामान निकालकर बोनेटपर रखने लगा. पहले पॅन्टके जेबसे और फिर शर्टके जेबसे सब सामान निकालकर अतूलने गाडीके बोनेटपर रख दिया.

उस सामानमें कुछ लोहेके छोटे छोटे टूकडे थे. अतूल उन टूकडोंकी तरफ गौरसे देखते हूए बोला, ” यह क्या है ?”

” कुछ नही .. मेरे रिसर्चका सामान ” विवेकने कहा.

” अच्छा!” अतूल अविश्वासके साथ बोला. .

अतूल अब वे सारे टूकडे एक एक करते हूए उलट पुलटकर निहारने लगा. उन सारे टूकडोंमे उसे एक टूकडा थोडा अलग लगा. वह उसने उठाया और वह उसे और गौरसे निहारकर देखने लगा. उस टूकडेके एक तरफ लाल बटन जैसा कुछ तो था. उसकी तरफ विवेकका ध्यान आकर्षीत करते हूए अतूल बोला,

” यह क्या है ऐसा ?”

विवेक कुछ नही बोला. अतूलने वह टूकडा उलट पुलटकर देखते हूए वह लाल बटन दबाया. और क्या आश्चर्य गाडीके बोनेटपर रखे सब टूकडोंमे अब हरकत दिखने लगी थी. और वे किसी चुंबककी तरह एक दुसरेसे चिपकने लगे. जब सारे टूकडे चुंबककी तरह एक दुसरेसे चिपक गए. उसमेंसे एक बंदूककी तरह वस्तू तैयार हो गई.

” अच्छा तो यह ऐसा है ?…” अतूल आश्चर्यसे बोला, “‘ मेरा अंदेशा कभी गलत नही होता … मुझे पता था की तुम्हारे पास कोईना कोई हथीयारतो होनाही चाहिए ”

अतूलने वह बंदूक उठाकर उलट पुलटकर देखी.

” स्मार्ट व्हेरी स्मार्ट… विवेक यू आर जिनियस … बट ओन्ली इंटॆलेक्चूअली … नॉट प्रोफेशन्ली” अतूल अजीब तरहके मुस्कुराहटके साथ बोला.

अतूल अबभी वह छोटे छोटे लोहेके टूकडोंसे बनी बंदूक हाथमें लेकर उलट पुलटकर देखते हूए विवेक के इर्द गिर्द चल रहा था. उसने विवेककी तरफ अर्थपुर्ण ढंगसे मुस्कुराते हूए एक कटाक्ष टाकला. उसका हंसना ‘ अब कैसे आया उट पहाड के निचे’ इस तरह का था. विवेक चुपचाप अपने जगह खडा था. उसके इर्द गिर्द चलते चलते उसने अपने कलाईपर बंधे घडीमें देखा ,

” अबभी एक मिनट बाकी है ”

अतूल अब बोनेटके पास गया और उसने वहा रखा हुवा शुरु मोबाईल उठाकर अपने कानको लगाया. उधरसे अबभी, ” हॅलो… अतूल… हॅलो… पासवर्ड क्या है … जल्दी बोलो … टाईम खत्म होनेको आया है …” ऐसा सुनाई दे रहा था.

” इन्स्पेक्टर … इतनीभी जल्दी क्या है … बताता हूं ना पासवर्ड ” अतूलने कहा और उसने अपने हाथमें पकडी बंदूक विवेकपर तानी.

इधर अंजली, इन्स्पेक्टर, भाटीयाजी इन्स्पेक्टरके हाथमें पकडे मोबाईलपर चल रहा संभाषण कान लगाकर सुन रहे थे, और साथही सामने मॉनिटरकी तरफ देख रहे थे. कमसे कम मोबाईलपर आ रहे अतूलके बोलनेके आवाजसे तो लग रहा था की विवेक मुष्कीलमें फंसा हुवा है. और सामने मॉनीटरपर -‘ All the server data and computer Data has been deleted. To recover enter the password’ और मॉनिटरपर उलटी गिनती चल रहा टाईम बॉम्ब जैसी घडी बता रही थी – 0 hrs… 2mins… 10secs. और उपरसे अतूल अबभी पासवर्ड बतानेके लिए तैयार नही था. हर एकको अलग अलग चिंता सता रही थी. अंजलीको विवेककी. भाटीयाजींको कंपनीकी और इन्स्पेक्टरको विवेक और कंपनीकी. आखिर मॉनिटरपर चल रही घडी बता रही थी – 0 hrs… 0mins… 50secs.

” टाईम खत्म होनेको आया है … जल्दी पासवर्ड बताओ” इन्स्पेक्टर लगभग चिल्लाए.

” बताता हूम इन्स्पेक्टर… धिरज रखो ”

hrs… 0mins… 40secs.

” अब क्या डाटा डिलीट होनेके बाद बताओगे ? ” इन्स्पेक्टर चिढकर बोला.

भाटीयाजींने उनके पिठपर हाथ रखकर उन्हे शांत रहनेका इशारा किया. नही तो अतूल अगर चिढ गया तो वह पासवर्ड बतानेके लिए इन्कार कर सकता है.

hrs… 0mins… 30secs.

” प्लीज … जल्द से जल्द बता दो ” इन्स्पेक्टर मानो अब गिडगिडाने लगे थे.

” उसे पहले विवेकको छोड देनेके लिए बोलीए ” अंजली अपने आपको ना रोक पाकर चिल्लाई.

” और तुम्हे पहले विवेकको छोडना पडेगा ” इन्स्पेक्टर.

hrs… 0mins… 20secs.

” पहले उसे छोडना है या पासवर्ड बताना है ? ” अतूलभी मौकेका फायदा लेते हूए बोला.

” पहले विवेकको छोड दो ” अंजलीने कहा.

उधरसे अतूलके ठहाकेकी आवाज आ गई.

hrs… 0mins… 10secs.

” नही इन्स्पेक्टर पहले मै पासवर्ड बतानेवाला हूं …क्यो ठिक है ना ?”

” बोलो जल्दी …” इन्स्पेक्टर

” हं यह लो – इलव्ह… ऑल स्मॉल… नो स्पेस इन बिट्विन..”

hrs… 0mins… 3 secs.

सामने कॉम्प्यूटरपर बैठे एक कर्मचारीने तुरंत पासवर्ड टाईप किया.

hrs… 0mins… 1 secs.

और एंटर दबाया.

मॉनिटरवर चल रहा काऊंटर रुक गया और मेसेज आ गया, ” password correct… recovery started”

सब लोगोंने अपने इर्द गिर्द देखा. सभी कॉम्प्यूटरके मॉनिटरपर वही मेसेज आया था – ” password correct… recovery started”

हॉलमें उपस्थित सब लोग, सिर्फ एक अंजलीको छोडकर इतने खुश हो गए की वे तालियां बजाने लगे. मानो कोई यान आसमानमें किसी ग्रह पर सही सलामत उतरनेमें कामयाब हुवा हो. लेकिन अचानक इन्स्पेक्टरके हाथमें पकडे हूए शुरु मोबाईलसे आए बंदूकके आवाजने, सब लोगोंकी तालियां एकदम बंद हो गई और हॉलमें श्मशानवत सन्नाटा छा गया. अंजली तो इतनी देरसे उस पर पड रहा तनाव सह नही पाकर और बंदूकका आवाज सुनकर विवेकका क्या हो गया होगा इसके कल्पनामात्रसे बेहोश होकर निचे गिर गई.

एक तरफ अतूल मोबाईलपर बोल रहा था और दुसरे हाथमें उसने विवेकपर बंदूक तानी हूई थी. आखिर उसने लगभग 5 सेकंद बचे होगे तब इन्स्पेक्टरको पासवर्ड बताया था – ” हं यह लो पासवर्ड – इलव्ह… ऑल स्मॉल… नो स्पेस इन बिट्विन..”

अतूलने अब शुरु मोबाईल फिरसे गाडीके बोनेटपर रख दिया. और वह उस विवेककी तरफ ताने हूए बंदूकका ट्रीगर दबाने लगा.

” रुको … तुम बहुत बडी भूल कर रहे हो …” विवेक किसी तरह बोला.

” भूल … इसके बाद तुम्हारी वजहसे … सिर्फ तुम्हारे हठकी वजहसे … मुझे जिस अंडरवर्डमें जाना पड रहा है … उसके लिए मुझे एक योग्यता हासील करनी पडेगी … पुछो कौनसी ? … कम से कम एक खुन… और वह योग्यता अब मै हासिल करनेवाला हूं ” अतूलने कहा और उसने झटसे बंदूकका ट्रीगर दबाया.

एक बडीसी आवाज हो गई और बगलमें खडे गाडीके खिडकीके कांचपर खुनकी बडी बडी छिंटे उड गई थी.

मोबाईलसे बंदूककी आवाज सुननेके बाद अंजली चक्कर आकर निचे गिर गई. कंपनीके हॉलका खुशीका माहौल एकदमसे श्मशानवत सन्नाटेमें बदल गया. इन्स्पेक्टरने तुरंत एक दो लोगोंकी सहायता लेकर अंजलीको उठाया. किसीने झटसे फोन कर ऍम्बूलन्स बुलाई.

अंजली बेडपर पडी हुई थी. उसके पास डॉक्टर खडे थे और उसका बीपी चेक कर रहे थे. इन्स्पेक्टर, भाटीयाजी, शरवरी और, और दो चार लोग उसके आसपास खडे थे.

” डॉक्टर कैसी है उसकी तबियत ?” शरवरीने पुछा.

” इनके उपर अचानक बहुत बडा आघात हुवा है जो की वे सह नही पाई … ऐसे वक्त थोडा वक्त बितने देना बहुत जरुरी होता है … फिलहाल मैने इनको निंदका इन्जेक्शन दिया है … तबतक आप लोग बाहर बैठीएगा … लेकिन उन्हे होश आए बराबर उनके पास कोई होना बहुत जरुरी है … इनके करीबी कौन है ?” डॉक्टरने पुछा.

” मै ” शरवरीने जवाब दिया.

” आप कौन … इनकी बहन ?”

” नही मै इनकी दोस्त हूं ” शरवरीने कहा.

” दुसरा कोई नही है? … जैसे मां बाप भाई बहन.”

शरवरीने उलझनमें इधर उधर देखा तो इन्स्पेक्टरने कहा, ” डॉक्टर उनका नजदिकी ऐसा कोई नही है ”

” अच्छा ठिक है … ऐसा करो आप इनके पास रुको ” डॉक्टरने शरवरीसे कहा.

वैसेभी शरवरीका वहांसे हिलनेके लिए मन नही कर रहा था. बाकी सब लोग कमरेसे बाहर चले गए और शरवरी वही उसके सिरहाने बैठी रही. वह भलेही उसकी बॉस रही हो लेकिन उसने उसे कभी बॉसकी तरह ट्रीट नही किया था. और असलमें अंजलीने उसे एक दोस्तके हैसियतसेही वह पीए का जॉब जॉइन करनेके लिए कहा था. शरवरी उसके सिरहाने बैठकर उसे होश आनेका इंतजार करने लगी.

अंजलीको इंजक्शन देकर लगभग दोन-तिन घंटे हो गए होंगे. उसके रुमके बाहर अबभी इन्स्पेक्टर, भाटीयाजी और बाकी काफी लोग उसे होश आनेकी राह देख रहे थे. होशमें आनेके बाद उसकी दिमागी हालत कैसी रहती है इसपर काफी चिजे निर्भर करती थी. असलमें उसे मां बाप ऐसे एकदम करीबी कोई ना होनेसे उसने विवेकपर अपनी पुरी जिंदगी निछावर की थी. और उसका उसे ऐसे बिचमें छोडकर चला जाना उसके लिए बहुत बडा आघात था. तभी एक नर्स जल्दी जल्दी बाहर आ गई.

” इन्स्पेक्टर उन्हे होश आ गया है ” नर्सने कहा और वह फिरसे अंदर चली गई.

सारे लोग अंदर जानेके लिए हरकतमें आ गए.

अंदर अंजली शरवरीके कंधेपर सर रखकर जोर जोरसे रो रही थी. और शरवरी उसके पिठपर थपथपाकर और सरपर हाथ फेरते हूए उसे जितना हो सके उतना धीरज बंधानेकी कोशीश कर रही थी. दरअसल पहले वह बुरी खबर सुननेके बाद उसे अपनी भावनाए व्यक्त करनेके लिए मौका नही मिला था क्योंकी वह अपनी भावनाओंको व्यक्त करनेके पहलेही बेहोश हो गई थी. कमरेंमे वह हृदयविदारक दृष्य देखकर इन्स्पेक्टर उसे धीरज बंधानेके लिए आगे बढने लगे, तब बगलमें खडे डॉक्टरने उन्हे इशारेसेही मना कर दिया. डॉक्टरकाभी सही था क्योंकी उसका सारा दर्द बाहर आना बहुत जरुरी था. सब लोग, भलेही उन्हे बहुत दुख हो रहा था फिरभी चुप्पी साधकर वह दृष्य देखते रहे.

तभी कमरेके बाहर, काफी दुरसे, शायद अस्पतालके प्रमुख द्वारसे आवाज आया, ” अंजली…

वह आवाज सुनकर अंजलीही नही तो वहां उपस्थित सारे लोगोंको मानो कुछ आभास होगया है ऐसा लगा. अंजलीका रोना रुक गया था. सारे लोग स्तब्धतासे खडे होकर दरवाजेकी तरफ देख रहे थे.

” अंजली ” फिरसे आवाज आ गया.

इसबार काफी नजदिकसे आए जैसा. लगभग दरवाजेकी बाहरसे ही. अब अंजली उठकर खडी हो गई और दरवाजेकी तरफ जाने लगी. कमरेमें उपस्थित बाकी लोगभी दरवाजेकी तरफ जाने लगे. अंजली दरवाजे तक पहूंच गई होगी जब कमरेका दरवाजा खुला और दरवाजेमें विवेक खडा था. उसके सारे कपडे और सारा शरीर खुनसे सना हुवा था. दोनों आवेशके साथ एक दुसरेकी तरफ दौडे और उन्होने एक दुसरेको बाहोंमें लिया.

अतूलने इन्स्पेक्टरको पासवर्ड बतानेके बाद शुरु मोबाईल गाडीके बोनेटपर रखा. और वह उस विवेककी तरफ ताने हूए बंदूकका ट्रीगर दबाने लगा.

” रुको … तुम बहुत बडी गलती कर रहे हो …” विवेक किसी तरहसे बोला.

” भूल … इसके बाद तुम्हारी वजहसे … सिर्फ तुम्हारे हठकी वजहसे … मुझे जिस अंडरवर्डमें जाना पड रहा है … उसके लिए मुझे एक योग्यता हासील करनी पडेगी … पुछो कौनसी ? … कम से कम एक खुन मेरे नामपर होनेकी… और वह योग्यता अब मै हासिल करनेवाला हूं ” अतूलने कहा और उसने झटसे बंदूकका ट्रीगर दबाया.

एक बडीसी आवाज हो गई और अतूलके हाथमें पकडे बंदूकका किसी बॉंम्बकी तरह विस्फोट हो गया.

अतुलके शरीरके टूकडे टूकडे होकर चारो ओर उड गए थे. विवेक अपना बचाव करते हूए पिछेकी तरफ लपक पडा था. फिरभी खुनकी छिंटे अतूलके शरीरपर उड गई थी और उसका पुरा शरीर और कपडे खुनसे सन गए थे. पासमें खडे कारके शिशेभी अतूलके खुनसे सन गए थे.

थोडी देर बाद विवेक उठ खडा हुवा. उसने निचे गिरे हुए अतूलके शवपर अपनी नजर डाली.

फिरभी मैने उसे बतानेकी कोशीश की की वह बंदूक ना होकर बॉम्ब है …

लेकिन वह मानाही नही … उसमें मेरा क्या दोष…

विवेक मानो अपने आपको समझानेकी कोशीश कर रहा था.

आखिर क्या है … की पराई नार … और पराये हथीयारसे आदमीको बचना चाहिए…

विवेकके जहनमें आकर गया.

अंजली अपने ऑफीसमें अपने काममें व्यस्त थी. उसने हमेशाकी तरह आए बराबर कॉम्प्यूटर ऑन करके रखा था. तभी कॉम्प्यूटरपर चाटींगका बझर बजा. उसने मॉनिटरपर देखा. एक मेसेज था –

” मिस अंजली … 50 लाख रुपयोंका मेरे लिए इंतजाम करना वर्ना नतिजा तो तुम जानतीही हो …” अंजलीने वह मेसेज पढा और उसके रोंगटे खडे हो गए.

तभी विवेक और शरवरी उसके कॅबिनमें आ गए.

” अंजली चलो आज हम पिक्चरको चलते है …मॉर्निंग शो”

” विवेक … इधरतो देखो … ब्लॅकमेलरका फिरसे मेसेज आ गया है” अंजली उसका ध्यान मॉनिटरकी तरफ आकर्षीत करते हूए बोली.

विवेक कॉम्प्यूटरके पास जाकर देखने लगा. लेकिन शरवरी अपनी हंसी नही दबा सकी. वह जोरजोरसे हसने लगी.

” ए क्या हुवा ?” अंजली.

” अरे वह मेसेज अभी अभी विवेकने बगलके कॅबिनसे भेजा है ” शरवरी हंसते हूए बोली.

” लेकिन वह तो अभी अभी यहां आया है ” अंजली.

” अरे नही … बगलके कॅबिनसे वह मेसेज भेजकर तुरंत हम इधर आ गए.

” यू नॉटी बॉय” अंजली विवेकपर पेपरवेट उठाते हूए बोली.

और फिर पेपरवेट टेबलपर वापस रखते हूए वह उठ गई और उसके पास जाकर उसके छातीपर प्यारसे मारने लगी. विवेकने हल्केसे उसे अपने आगोशमें खिंच लिया.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here